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    Friday, 4 August 2017

    नीतीश मोदी की राह पर, 50 साल के ऊपर के शिक्षकों को करेंगे जबरन रिटायर

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    Blog: अभी बिहार में नीतीश कुमार की बीजेपी के साथ गठजोड़ कर सरकार बने जुम्मा-जुम्मा चार दिन भी नहीं हुए हैं. मगर उन्होंने मोदी सरकार के निजीकरण के राह पर बिहार को  झोंकने का प्लान कर डाला. जानकारी के अनुसार बिहार सरकार 50 साल के ऊपर के शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े अधिकारियों को जबरन सेवानिवृति देगी. मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा में खराब रिजल्ट देने वाले स्कूलों के शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों और संबंधित जिले के शिक्षा पदाधिकारियों को जबरन रिटायर किया जायेगा. गुरुवार को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में इन पर कार्रवाई करने के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुहर लगा दी. मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद में आयोजित समीक्षा बैठक में पांच प्रतिशत से भी कम रिजल्ट देने वाले स्कूलों के शिक्षकों व प्रधानाध्यापकों व शिक्षा पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जायेगी. इनमें 50 साल से जिनकी उम्र ज्यादा हो चुकी होगी, उन्हें जहां जबरन सेवानिवृत्त कर दिया जायेगा, वहीं 50 साल से कम उम्र वाले शिक्षकों को चेतावनी देकर या फिर वेतन वृद्धि रोक कर छोड़ा जा सकता है. जानकारी के लिए बता दें कि अभी उनको रिटारमेंट की आयु 60 वर्ष है.
     

    इसके बाद खुद उनके ही सरकार के सहयोगी बीजेपी के एमएलसी श्री नवल किशोर यादव ने टीचर के साथ ही साथ आईपीएस अधिकारियों, मंत्रियों के रूप में राजनेताओं के काम की समीक्षा कर 50 वर्ष में रिटार्ड करने की मांग कर इसको शिक्षकों के खिलाफ सामंती फैसला बताया.
     

    बिहार में तेजस्वी यादव नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि आप शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए अपनी कमियों की गाज 50 पार शिक्षको पर गिराना चाहते है. नए कदम को लेकर तेजस्वी ने  निशाना साधते हुए सीएम नीतीश कुमार को खराब शिक्षा व्यवस्था का जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि यदि 50 साल से ज्यादा आयु वाले शिक्षक पढ़ाने योग्य नहीं हैं तो आप भी तो 65 साल से ज्यादा के हो चुके हैं, ऐसे में आपको भी गद्दी छोड़ देनी चाहिए.

    वही जब दूसरी तरफ शिवचंद्र प्रसाद नविन, भूतपूर्व संयुक्त सचिव, गोपगुट ने बताया कि बिहार कि पूरी शिक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था भी चौपट है. जब पहली बार 2005 में श्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद कि शपथ ली थी. उसके बाद ही सभी जिलाधिकारियों कि मीटिंग करके खुली छूट दे दी थी कि आप क्या करेंगे मुझे वह नहीं पता, मगर मुझे परिणाम चाहिए. उस समय "परिणाम" का मतलब नहीं पता चला मगर इसके बाद से ही सारे अधिकारी बेलगाम हो गए. उसी समय से भ्रष्टाचार चरम पर है. जनता की आवाज कोई अधिकारी नहीं सुनता और कहीं भी बिना पैसे के काम नहीं होता है.

    जीतन राम मांझी ने भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए कहा था कि सरकारी कार्यालयों में विचौलियों का वर्चश्व है, जिसके कारण बिहार की बदनामी हो रही है. उन्होंने आगे कहा था कि कमीशन में जनता के 4000 करोड़ लुट जाते हैं. यह कह कर चौका दिया था कि मुख्यमंत्री की कुर्सी तक भी कमीशन का पैसा आता था.
     

    ये वही नितीश कुमार है जिन्होने युवाओं कि उपेक्षा करके आर्मी से रिटार्ड लोगो को लेकर सैफ फ़ोर्स का गठन किया था. ये वही नितीश कुमार है जिनको पुरे बिहार में नियोजित शिक्षकों ने "अधिकार यात्रा" के दौरान काले झंडे ही नहीं दिखाए बल्कि जुटे चप्पल भी दिखाए थे. जिसके बाद उनको वेबस होकर यात्रा स्थगित करनी पड़ी थी. अब सीधी बात सी बात है कि जब कम पैसों में काम करने वाले बेरोजगारों का फ़ौज खड़ी है तो नितीश कुमार किसी रेगुलर टीचर को 70 से 80 हजार रूपये मासिक क्यों देंगे? आखिर धीरे-धीरे ही सही नितीश संघी के संग भगवा रंग में पुरे बिहार को  रंगेगे. "मोदी जी का सपना पूरा बिहार बेचना" शुरू करेंगे. 

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