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    मोदी सरकार पूर्वजों द्वारा बनवाये श्रम कानूनों को खत्म करने पर आमदा, क्यों


    Blog: आज हम आपको कुछ महत्वपूर्ण जानकारी से अवगत कराने जा रहे है. क्या आपको पता है कि पिछले साल 02 सितम्बर 2016 को देश के 11 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के नेतृत्व में 18 करोड़ कर्मचारी मिलकर देशव्यापी हड़ताल पर क्यों गए थे? आपको पता है कि 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियन मिलकर राष्ट्रीय सम्मलेन आने वाले 9,10 व 11 नवम्बर 2017 को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तीन दिन का देशव्यापी पड़ाव का आयोजन क्यों कर रहे है? क्या आप जानते है कि और उनको क्या मांगे है ? क्यों इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा देश के सभी श्रमिक संगठनों को?




    दोस्तों आइये, आपको पूरा विस्तार से बताता हूँ और आप लोगों से निवेदन है कृपया यह जानकारी खुद भी समझें और ज्यादा से ज्यादा शेयर करें.

    दरअसल मोदी सरकार श्रम कानूनों में बदलाव करने जा रही है. जिसमें नया श्रम कानून तीन पुराने श्रम कानूनों, इंडस्टिरियल एक्ट 1947, ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 और इंडिस्टियल एक्ट 1946 की जगह लेगा. अब सवाल है कि यदि ये कानून बन गया तो क्या होगा???

    क्या हैं ये नए कानून  (1) मोटर ट्रांसपोर्ट वर्क्स एक्ट 1961 (2) पेमेंट ऑफ़ बोनस एक्ट 1965, (3) इंटर स्टेट वर्कमेंन एक्ट 1979, (4) बिल्डिंग्स एंड कंस्ट्रक्टशन एक्ट 1996 .
               

    (1) कर्मचारियों  को नौकरी से निकालना आसान हो जाएगा. (2) यूनियन बनाना मुश्किल हो जाएगा,  न्यूनतम 10 फीसदी या 100 कर्मचारी की जरुरत होगी. जहाँ पहले 7 कर्मचारी मिलकर यूनियन बना लेते थे वहां अब 30 कर्मचारियों की जरुरत होगी. (3) एक माह में ओवर टाइम की सीमा 50 से बढ़ाकर 100 घंटे करना गलत है क्योकि इसका भुगतान डबल रेट में ना होकर अब सिंगल रेट में होगा. जब कानून में ही 100 घंटे का प्रवधान हो जाएगा तो मजदूरों को 8 घंटे के जगह 12 घंटे की नियमित ड्यूटी हो जाएगी. (4) फेक्टरी के मालिकों को अब ज्यादा अधिकार मिल जाएंगे  कोर्ट जाने का अधिकार खत्म हो जाएगा. (5) मौजूदा 44 श्रम कानूनों को ख़त्म करके 4 कर दिया जाएगा. (6) यूनियन में बाहरी लोगो पर रोक लगा दी जाएगी. (7) अप्रेंटिश् एक्ट में एक तरफ़ा बदलाव कर 2 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया जाएगा.

    साथियों ये इतना खतरनाक कानून है यदि इसका विरोध नहीं किया गया और ये बन गया तो बहुत् ही बुरे हाल हो जायेंगे.  मजदूरों, कर्मचारियों क लिए ये सब इसलिए किया जा रहा है क्योंकि देश में विदेशी निवेश होगा और विदेशी कंपनिया कहती हैं कि भारत के 44 श्रम कानून बहुत ही जटिल और मजदूर हितैषी है. पहले आप इनको खत्म करो फिर हम भारत आएंगे. इसलिए मोदी सरकार ये कदम उठा रही है और एक बार फिर भारत को गुलाम बनाने की पहल की गई है. इसलिए देश के 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियन ने मिलकर ऐलान कर दिया है की आने वाले 9,10 व 11 नवम्बर 2017 को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तीन दिन का देशव्यापी पड़ाव का आयोजन कर पुरजोर विरोध किया जायेगा कि इस कानून को वापस लिया जाए. हम इस देश को फिर से गुलाम नहीं होने देगें. ये कसम खाएं और तैयार हो जाएं हल्ला बोलने के लिए.

    लेखक: सुरजीत श्यामल 


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    7 comments:

    1. we both are with u sir ... this is our fight too,,, we are coming on 11 November for justice.
      ....................... nitu

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    2. What is the solution then? Visit any PSU, 95% employees u will find always in canteen, tea shop. In case of any wrong practice, dismissal of executives is very easy whereas labours & workers are highly protected. There are rules to recruit labours & workers only from home state, they seriously create problems specially with non local executives. If they are so efficient and obedient, then why they fear privatization? World is changing very fast. Nobody could afford continuous losses. Instead of going for All India Conference OR strike, they should work and put effort to bring profit to organization, Prime Minister will not make these rules.

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    3. Woow gr8 speach mr sanjay..
      Bt let me clear u one thing. Jo kuch aapne workers k liye yha,pe likha h na aapke officers sbse zadaa kaamchoor h smjhee rishwat khatee h lut rkha h companys koo. Or jate jate apni technology bhi beech detee h . Workers k canten me chai pine se etna nuksaan nhi ho rha h jitnaa apke officers choori kr kr ke desh ko phochaa rhe h. Understand .

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    4. सॉरी संजय जी आपके बातों से पूरी तरह असहमत हुँ..ऐसा आप कैसे बोल सकते हैं. या तो आप के ऊपर जिम्मेदारी का बोझ नही है या फिर आपके पास इतना धन है कि आपको लेबर कानून के छीन जाने का कोई दुख नही. जरूर जबाब देंगे

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    5. Now in PSU, new executives are Giving their 24 hrs. Whole day in office/fields/plants and remaining time of day on call. Because they want to do something for their organizations and country. But aaj haal ye ho gya hai kisi ko kuch nhi padi hai. Jyada se jyada comments kar skte hai.
      Modi Ji ye sab kaam only big industry k fayede k liye kar rhe hai. Jo Un par labors ka thoda bhi pressure tha Labour act ki wajah se, unki ye tension bhi finish kar denge Modi Ji. Kyo ki jo wada unhone big business men se kiya tha Wo to Pura krenge NA??. Real chiz to unhone di hai. Humne(Indian public) ne to mamuli sa EK VOTE diya hai.

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    6. B S Meena रिप्लाई में देरी के लिए माफ़ी चाहूंगा. आपने १०० फीसदी सच कहा है कि नई वर्कर्स २४ घंटे काम कर रहे है. ऐसा नहीं है कि वह शौक से कर रहे बल्कि उनको नौकरी से निकलने का भय दिखाकर दोहन किया जाता है. इसके जिम्मेवार हम लोग है. अगर अभी भी विरोध नहीं किया गया तो आने वाला कल बहुत ही भयानक होगा...

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