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    पीएफ क्या है? जरुरत पड़ने पर कब, कहां और कैसे शिकायत करें, पूरी डिटेल जानकारी

    What is PF? When, when needed, where and how to complain, complete details

    Blog: अगर आप किसी सरकारी या गैर सरकारी विभाग या कंपनी में काम कर रहे है तो शायद ही पीएफ का नाम नहीं सुना हो. आज हम इसी पीएफ के बारे में काम की जानकारी उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं. सबसे पहले जान लें कि पीएफ आप कर्मचारी का हक़ है. इसकी जानकारी हरेक वर्कर को होनी चहिए. नौकरी ज्वाइन करते ही इसका लाभ पहले महीने से ही मिलना शुरू हो जाता है. पीएफ का पूर्ण लाभ लेने के लिए अपना खाता खुलते ही बैंक अकाउंट और आधार नंबर से जोड़ दें. इसके साथ ही पीएफ खाते के साथ मोबाइल नंबर को रजिस्टर्ड करवाये. ताकि हर महीने कम्पनी द्वारा जमा किये गए राशि का मैसेज के द्वारा अलर्ट आता रहे.

    सबसे पहले बात करते हैं कि कि पीएफ होता क्या है? (PF Kay hota hai?) पीएफ को ईपीएफ भी कहते हैं और इसका फुल फॉर्म एम्प्लोयी प्रोविडेंट फण्ड होता है. EPF एक तरह का निवेश है. जो किसी सरकारी अथवा गैर सरकारी कंपनी में कार्यरत् कर्मचारी के मासिक निवेश के रूप में जमा किया जाता है. जो कि उस कर्मचारी या उसके परिवार के सदस्यों को भविष्य में काम आता है. अधिकतर लोग EPF के बारे में जानते हैं, लेकिन आज हम आपको EPF पर कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जो न केवल आपको मालूम होनी चाहिए बल्कि आपको उनका लाभ भी लेना चाहिए.

    कंपनियों के लिए ईपीएफ के लिए क़ानूनी प्रावधान क्या हैं?

    कानून के नियमानुसार 20 या उससे अधिक वर्कर के काम करने वाले कंपनी को इसके तहत EPFO (Employee Provident Fund Organization) में पंजीकरण अनिवार्य है. एम्प्लॉयी प्रॉविडेंट फंड जिसे आमतौर पर ईपीएफ कहा जाता है. यह एक रिटायरमेंट स्कीम है. जब आप नौकरी ज्वाइन करते है तभी आपका कंपनी आपसे ईपीएफ का फार्म भरवाकर आपका खाता ईपीएफ ऑफिस में खोलता है. ईपीएफ खाते में एम्प्लॉयी और एम्प्लॉयर दोनों दोनों के द्वारा ही योगदान किया जाता है.

    क्या ईपीएफ खाते में नॉमिनी का नाम रेजिस्टर्ड करवा सकते हैं?

    आपकी मासिक सैलरी के बेसिक + डीए के कुल का 24 परसेंट हर महीने आपके ईपीएफ खाते में जमा होता है. आपके पीएफ खाते में आप अपने नॉमिनी का नाम रेजिस्टर्ड करवा सकते हैं. अगर किसी कारणवश पीएफ खाताधारक की मृत्यु हो जाए तो उस पैसा का हक़दार नॉमिनी हो जाता है. इस तरह से हर वर्कर को अपने खाते में अपने नॉमिनी का नाम रेजिस्टर्ड करवाना चाहिए, ताकि आगे कोई परेशानी न आये.

    15 हजार रुपये मासिक से अधिक सैलरी वाले वर्कर के लिए ईपीएफ में क्या प्रावधान हैं?

    अगर आपकी सैलरी (बेसिक सैलरी और डीए) 15 हजार रुपये मासिक या उससे कम है तो आपके लिए ईपीएफ खाता में रकम जमा करवाना अनिवार्य है. लाइव मिंट के अनुसार सरकार के द्वारा 21000/- रूपये सैलरी वाले को भी पीएफ का लाभ देने की बात चल रही है. फ़िलहाल के नियम के अनुसार अगर किसी का सैलरी (बेसिक सैलरी+डीए) 15 हजार रुपये महीना से अधिक हो गई है तो उनके पास ऑप्शन है कि वह ईपीएफ स्किम से बाहर आ सकता है. इसके बाद उनके बिना कुछ कटे पूरी सैलरी मिलेगी. मगर याद रहे इस अवस्था में केवल ईपीएफ का उनका हिस्सा मात्र 12 प्रतिशत जो कट रहा था, वही मिलेगा. मगर अगर इस ऑप्शन को चालू रखते है तो 24 प्रतिशत के हक़दार होते हैं. मगर बाहर होने का ऑप्शन तभी मिलता है जब आप कोई नई नौकरी की शुरुआत करते है. अगर आप एक बार ईपीएफ खाता खुल जाता है और इस स्कीम में शामिल हो जाते है और यदि उस दौरान आपकी सैलरी 15 हजार से ज्यादा होती है तो आप इस स्कीम से चाह कर भी बाहर नहीं आ सकते है.

    ईपीएफ खाताधारको के लिए पेंशन स्कीम क्या है और पेंशन कब मिलता है?

    अब इसके बारे में थोड़ा गहराई से जानते है. EPF और EPS जिसे हम ईपीएफ कहते हैं, वह दरअसल ईपीएफ और ईपीएस दो आइटमों का मिक्सचर है. ईपीएस का मतलब है एम्प्लॉयी पेंशन स्कीम. ईपीएफ में हमारे सैलरी का 12 प्रतिशत कटता है, वह पूरा का पूरा ईपीएफ में जमा होता है. जबकि कम्पनी यानी एम्प्लायर का जो 12 प्रतिशत योगदान होता है. उसमें से 8.33 फीसदी रकम पेंशन स्कीम यानी ईपीएस में जमा होता है और बाकी 3.67 फीसदी रकम ईपीएफ में जमा हो जाता है. ऐसे में अगर किसी वर्कर यानि एम्प्लॉईज़ की सैलरी अगर 15 हजार रूपये मासिक या उससे ज्यादा है तो उसके पेंसन में जमा होने वाली रकम 15 हजार रुपये के 8.33 फीसदी यानी 1250 रुपये महीना से ज्यादा नहीं हो सकता है. अब इस तरह से हम कह सकते है कि किसी भी वर्कर का अधिकतम 1250 रुपये महीना ही पेंशन स्कीम में जमा हो सकता है. यह याद रखे कि पेंशन आपको रिटायरमेंट यानि जब आपकी उम्र 58 साल हो जाएगी तब मिलेगा. इस पेंशन को पाने के लिए आपको एक या अलग-अलग कम्पनी के माध्यम से कम से कम 10 वर्ष का कंट्रीब्यूशन अनिवार्य होता है.

    क्या ईपीएफ खाताधारको को इंश्योरेंस की भी सुविधा दी गई है?

    ईपीएफ खाताधारक के लिए इंश्योरेंस की भी सुविधा दी गई है. अगर कोई कंपनी अपने एम्प्लॉयी को ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस कवर मुहैया नहीं कर रही है, तो एम्प्लॉयी को ईपीएफ के जरिये छोटा सा लाइफ इंश्योरेंस दिया जाता है. इसके तहत कंपनी एम्प्लॉईजी डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस यानी ईडीएलआई के जरिये देती है. इसके लिए एंप्लॉयर को एम्प्लॉयी की मंथली बेसिक पे का 0.5 फीसदी जमा करना होता है. यह रकम केंद्र सरकार की ओर से दी जाती है. बेसिक पे की कैप 15 हजार रुपये है. इस तरीके से मैक्सिमम लाइफ कवर 3.60 लाख रुपये ही मिल पाता है.


    इसके बाद आपका सवाल यह होता है कि अगर आपकी सैलरी से पीएफ कट रहा तो इसका पता कैसे करेंगे कि कम्पनी उसको पीएफ ऑफिस में जमा कर रहा या नहीं? बिल्कुल सही और एकदम सटीक सवाल है. पहले तो कम्पनी के द्वारा हर 6 महीने पर कंट्रीब्यूशन जमा करने का प्रावधान था. जिसके बाद पता करना भी बहुत ही मुश्किल और जिसको देशी भाषा में जूते घिसने वाली बात कहते है वो थी. मगर अब पहले वाली बात नहीं रही. जब से यूएएन नंबर का प्रावधान हुआ है. यूएएन नंबर और इसके फायदे के बारे में जानने के लिए आप हमारा यह पोस्ट पढ़ सकते हैं -> EPF का UAN-यूनिवर्सल अकाउंट नंबर क्या है और इसके फायदे?आपका एम्प्लॉयर कहिये, मालिक कहिये, ठेकेदार या कम्पनी, वह हर महीने आपके खाते में आपका और अपना हिस्से का पैसा ऑनलाइन जमा करता है. जिसके बाद आपके रेजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मैसेज भी आ जाता है. इसके आलावा अपने पीएफ खाते का बैलेंस चेक कैसे करें इसके बार में जानने के लिए हमारा यह पोस्ट पढ़ें->अपने पीएफ खाते का बैलेंस कैसे चेक करें, जाने 7 तरीकाइसके साथ ही आप जान सकते है कि कितना पैसा कटा गया और कितना जमा किया गया. अगर आपका एम्प्लॉयर ज्यादा पैसा काट रहा और कम पैसे जमा कर रहा तो आप अपने सम्बंधित ईपीएफ कमिश्नर को सीधे शिकायत कर सकते है. इसके लिए कोई पैसा नहीं लगता है.


    पीएफ कमिश्नर के पास शिकायत कैसे करेंगे? उससे पहले यह जान लेते हैं कि पीएफ कमिश्नर के पास किस-किस मुद्दे पर तुरंत ही शिकायत करना चाहिए.

    • अगर हर महीने आपके सैलरी से पीएफ की कटौती हो मगर एम्प्लायर आपके खाते में जमा नहीं करे.
    • अगर एम्प्लायर आपके खाते में कम राशि जमा कर रहा हो.
    • अगर एम्प्लायर अपना योगदान भी आपके ग्रॉस सैलरी से ही काट रहा हो.
    • अगर हर माह पीएफ कट रहा मगर ठेकेदार यूएएन व पीएफ नंबर की जानकारी नहीं दे रहा है. 
    • इत्यादि अन्य सभी...

    दोस्तों, कई बार यह भी देखने को आना है कि कई कंपनियां या ठेकेदार अपने एम्प्लाइज के सैलरी से ही पीएफ का अपना योगदान काट कर पीएफ खाते में जमा करते रहते है. कर्मचारी को सैलरी स्ट्रक्चर या शिकायत कहां करें की जानकारी नहीं रहने के कारण चुप रहना पड़ता है. इस तरह के मामले के लिए जितनी जल्दी हो सके शिकायत करें. अब आप पूछियेगा कि यह कैसे पता चलेगा कि हमारे सैलरी से ही एम्पलॉईस और एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन की कटौती हो रही है. बहुत ही सिंपल है, आपकी सैलरी Net Salary (Gross Salary) = Basic + Additions (bonuses, allowances) – Deductions होती है. यहां डिडक्शन मतलब आपके हिस्से की कटौती से है. इसके लिए आपको सैलरी स्ट्रक्चर की जानकारी बहुत जरुरी है. कोशिश करूँगा कि जल्दी ही इसके बारे में जानकारी उपलब्ध कराऊँ.

    पीएफ का शिकायत करते समय किन-किन बातों का रखें ख्याल

    इस तरह के कोई भी असुविधा हो तो तुरंत ही सादा कागज़ पर सेवा में पीएफ कमिश्नर, पता- और अपनी कंपनी और ठेकेदार यानी मान लीजिये कि आप दिल्ली मेट्रो या आईआरसीटीसी या अन्य किसी भी संस्था में ठेका वर्कर या आउटसोर्स वर्कर के रूप में काम करते है तो उन दोनों के ऑफिस का पूरा पता लिखे. अगर आपकी यूनियन है तो कोशिश करें कि यूनियन के माध्यम से ही शकायत करें और साथ में सभी पीड़ित वर्करों का लिस्ट लगायें. अगर यूनियन नहीं है तो आप अकेले भी शिकायत कर सकते है. शिकायत करते समय अगर कटौती का मामला हो तो आप अपने शिकायत पत्र में यह जिक्र जरुरी करें कि कुल कितने रूपये की गलत कटौती की गई है. अगर हो सके तो मंथली चार्ट के माध्यम से दर्शाना न भूलें. अपने शिकायत पत्र के साथ शिकायतकर्ता का सैलरी स्लिप अवश्य संलग्न करें, ताकि सम्बंधित अधिकारी को समझने में आसानी हो. इसके बाद अपनी समस्या को लिखकर नीचे अपने अपना पूरा नाम, पद, ऑफिस का पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी आदि के साथ लिख कर स्पीड पोस्ट या रजिस्टर्ड पोस्ट से भेज दें. याद रखे कभी भी साधारण डाक से न भेजें. अगर आप अपने एरिया का पीएफ ऑफिस सर्च करना चाहते है तो यहां क्लिक करें. इसके आलावा आप यहां क्लिक करके ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करा सकते है. अगर इस सम्बन्ध में कोई भी शिकायत या सुझाव हो तो तुरंत ही कमेंट बॉक्स में लिखें. कोशिश करूंगा कि जल्द से जल्द आपकी सहायता कर सकूं.

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    लेखक: सुरजीत श्यामल

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