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    बिहार नियोजित शिक्षिकों को केवल समान वेतन की लड़ाई से नहीं चलेगा काम, यह भी करना होगा

    बिहार नियोजित शिक्षिकों को केवल समान वेतन की लड़ाई से नहीं चलेगा काम, यह भी करना होगा

    बिहार में नियोजित शिक्षिकों के "समान काम का सामान वेतन" की लड़ाई चरम पर है. इसी बीच शिक्षक चौपाल के संयोजक सदस्य श्री संजीव समीर ने शिक्षकों से एक और लड़ाई शुरू करने की अपील है. इसके बारे में जानकार आपको अपने साथी पर गर्व नहीं होगा बल्कि उनके लिए सम्मान में सिर स्वतः ही झुक जायेगा. अब इतना पढने के बाद आपकी उत्सुकता बढ़ गई होगी. उन्होंने सबसे पहले लिखा है कि, "आप सभी शिक्षको से नम्र अनुरोध है कि मेरे पोस्ट को पूरी तरह से ध्यानपूर्वक पढ़ने का कष्ट करें".

    बिहार नियोजित शिक्षिकों को केवल समान वेतन की लड़ाई से नहीं चलेगा काम

    उन्होंने आगे सभी शिक्षकों को संबोधित करते हुए लिखा है कि हम सब केवल अपने सम्मान की लड़ाई "समान काम समान वेतन" को आम "शिक्षक चौपाल" के वाल पर न रखकर, हमारे विद्यालयों में पढ़ रहे उन मासूम बच्चों के "शिक्षा के गुणोत्तर विकास" पर भी काम करना होगा. 

    आगे के जानकारी से पहले थोड़ा "शिक्षक चौपाल" के बारे में जानकारी दे दूं. यह कुछ नियोजित शिक्षकों के द्वारा पुरे बिहार प्रदेश के शिक्षकों को एक मंच पर लाने की कोशिश हैं. जिसमें लोग कुछ हद तक सफल भी हो गए थे. मगर कुछ कारणवश अड़चन आई है, जो कि छनिक है. आगे प्रयास जारी है. शिक्षक चौपाल नाम का फेसबुक का ग्रुप बना हुआ है. जिसमें करीब 52 हजार सक्रिय सदस्य हैं. संजीव समीर, मुकेश गुप्ता, नन्द किशोर सिंह, माला त्रिपाठी मलानशी, उदय शंकर, फ़तेह बहादुर सिंह, संतोष कुमार शर्मा, प्रमोद कुशवाहा, ओम  प्रकाश ओम, आदि सैंकड़ों लोग इसके लिए प्रयासरत हैं.
     

    बिहार नियोजित शिक्षक को, यह भी करना होगा 

    अब पुनः अपने विषय वस्तु पर आते हैं. हां तो कह रहा था कि संजीव भाई ने कहा है कि कल कोई यह अंगुली नही उठा सकते कि शिक्षक सिर्फ अपने वेतन के लिए लड़ते हैं और बच्चों की पढ़ाई नदारद है. अब वह समय अब दूर नही जब हम सभी समान वेतन की लड़ाई जीतेंगे और हम अपने सम्मान को कागजी रूप में ले लेंगे, किन्तु असल सम्मान तो हमें उन  बच्चों और उनके अभिभावक और उस समाज से ही मिलना है. जहां स्कूल अवस्थित है.

    उन्होंने आगे घोषणा करते हुए कहा कि अब चौपाल एक नई मुहिम की ओर अग्रसर होगा और वह है, "बच्चों की शिक्षा". अपने लिए तो हर कोई  जीता है...लड़ता है.. किन्तु, कभी दूसरों के लिए भी लड़ना और जीना सीख लें तो जीवन का असल उद्देश्य की प्राप्ति हो जाएगी. इसके बाद आप आपको सम्मान मांगने की जरुरत नहीं पड़ेगी, वह खुद ही वापस मिल जायेगा.

    संजीव समीर ने कहा कि हो सकता है, मेरी बातें कुछ लोगों को अजीब लगे, क्योंकि चौपाल तो एक स्वतंत्र विचारधारा है. जो शिक्षक की हितों की रक्षा हेतु सभी संघो को एक मंच से सरकार से लड़ने को कहता रहा है फिर आज ये बच्चों की शिक्षा पर ध्यान कैसे चला गया. आगे उनकी भाषा में पढ़ें.

    तो दोस्तों. आपको बताना चाहता हूं कि आम शिक्षक चौपाल सिर्फ शिक्षकों के लिए ही नही बल्कि शिक्षार्थी  और सभ्य समाज के लिए भी आवाज़ उठाने के लिए कृतसंकल्पित है. साथ ही साथ सामाजिक कुरीतियों और सामाजिक सरोकार का काम भी उनके विचारधारा में सम्मिलित है. आपने देखा होगा कि विगत बाढ़ राहत जैसे सामाजिक सरोकारों का कार्य में भी आम शिक्षक चौपाल भागीदार रहा है. आम शिक्षक चौपाल के साथियों से जितना हो सका बखुबी अंजाम दिया. साथ ही साथ भाई उपेंद्र राय जी के न्यायिक लड़ाई में भी कदम से कदम मिलाकर चलने का काम किया है.

    "चौपाल सूरज न बन सकता न सही.
    एक उम्मीद की दीया तो बन ही सकता है.”

    मैं जानता हूं कि आम शिक्षक चौपाल में ऐसे सभी साथी हैं. जो प्रतिभा के धनी है. बस उनको उचित माहौल नही मिल पाया है. चौपाल आपको एक मंच उपलब्ध करा रहा है. आप अपनी बातों को सहर्ष इस मंच पर रख सकते हैं, ताकि इस ग्रुप के सभी नियोजित शिक्षक एक दूसरे को अपना ज्ञान सांझा कर सके. वैसे भी ज्ञान बांटने से बढ़ता है न कि घटता है. यह हो सकता है मेरी ये बातें अटपटा लग रही हो, मगर यह शिक्षक समाज के लिए ही नही बल्कि पूरा समाज, राज्य और और इस देश के लिए एक अच्छा संदेश होगा. 

    इसलिए हम सभी शिक्षक जो अपने विद्यालय में सप्ताह भर में जो कुछ भी पाठ्यक्रम से पढ़ाते हैं. उसमे से सर्वोत्तम Lesson_Plan या ज्ञानवर्धक सामग्री जो स्वयं के द्वारा निर्मित हो. उसमें से कम से कम एक या एक से अधिक सामग्री भी, चाहे वे किसी भी वर्ग के पाठ्यपुस्तक (Class:- I–XII) से हो उसे इस ग्रुप के माध्यम से सभी शिक्षकों से शेयर करें. लेकिन ध्यान रहे खुद से पढ़ाये गए सामग्रियों को ही शेयर करें न कि किसी की कॉपी. 

    इससे होगा यह कि शिक्षक एक दूसरे से ज्ञान का आदान प्रदान कर सकेंगे और जहां कहीं भी कमी महसूस होगी. उसमें सुधार की गुंजाइश होगी और जो अच्छा लगेगा उसे अपने में समाहित करने की कोशिस होगी. इस प्रकार से शिक्षकों में पढ़ने और पढ़ाने की रुचि पैदा होगी. इससे बच्चों में गुणोत्तर विकास होगा और इस तरह से शिक्षक की गरिमा बनी रहेगी और उनके सम्मान पुनः वापस होंगे. आप सभी शिक्षकों की राय अपेक्षित है.
    धन्यवाद,
    आपका
    संजीव समीर

    (यह लेख पूर्णतः संजीव समीर जी के निजी विचार हैं. अगर आप बिहार नियोजित शिक्षक है तो AAM SHIKSHAK CHAUPAL आम शिक्षक चौपाल(ASC) से यहां क्लिक कर जुड़ सकते हैं. 

    6 comments:

    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

      ReplyDelete
    2. बहुत बहुत धन्यवाद।

      ReplyDelete
      Replies
      1. Sanjeev Sameer jee स्वागतम

        Delete
    3. Surjeet Shyamal भैया
      नमस्कार..!
      सर्वप्रथम तो आपको बहुत बहुत आभार और साधुवाद! आम शिक्षक चौपाल के विचारधारा को आपने अपने पेज पर जो जगह दिया है उसके लिए आपको जितना धन्यवाद दूँ,,,, वह कम है और उसे अपने साइट पर प्रकाशित करने के लिए आम शिक्षक चौपाल आपका सदा आभार व्यक्त करता है।
      धन्यवाद
      आपका
      शि. संजीव समीर

      ****************************************

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      Replies
      1. संजीव भाई, अरे सर धन्यबाद तो आपका जो कि आप कम से कम गरीबों के लिए सोचते हैं. जबकि कुछ लोगों तो गरीबों के लिए सरकार के द्वारा दिए हक़ के पैसों से अपना घर चलाते देखा है. आपका काम बहुत ही सराहनीय है. उम्मीद करूँगा कि इसी तरह देश की अखंडता और गरीबो के शिक्षा के लिए काम करते रहिये. यह हो सकता है कि शुरू में लोग पागल कहें, मगर आपके प्रयास से अगर एक आदमी का भी सोच बदलता है तो यह आपकी जीत होगी.

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