इसके बाद भी रेल घाटा में तो प्रभु जी आप इस्तीफा दे दें, रेल आपके वश की नही

नई दिल्ली: सुरेश प्रभु ने संसद में नई कैटरिंग पॉलिसी की घोषणा करते हुए आईआरसीटीसी को दुबारा से कैटरीन की सेवा सौंप दी. आइये नजर डालते है कि उससे वर्कर और पैसेंजर पर क्या असर हुआ. क्या वर्कर और पैसेंजर खुश है? मगर इसके बाद भी कहा जा रहा कि रेल घाटा में है.

रेल घाटा में तो प्रभु जी आप इस्तीफा दे दें

इसको समझने के लिए आपको एक मुम्बई राजधानी के कैटरिंग कर्मचारी के बातचीत के अंश शेयर करना चाहूँगा. कल अचानक से मेरे मोबाईल पर फोन आता है कि आपसे मिलना है और आज मैं नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उस कर्मचारी से मिलने चला गया. बातचीत के दौरान पता चला कि पहले जीए डिजिटल (ठेकेदार) को रिकॉर्ड में दिखाकर रखा गया था. जिसके द्वारा पीएफ ईएसआई काटकर 11 से 12 हजार प्रति महीना मिल जाता था.जो कि यूनियन के द्वारा लड़ कर लिया गया था.

उस कर्मचारी ने बताया कि आईआरसीटीसी को कैटरिंग मिलते ही हमारे सभी साथियों को नौकरी से निकाल दिया. उस पुराने ठेकेदार के जगह नया ठेकेदार दीपक एंड को., पहाड़गंज, दिल्ली को लाया गया. आईआरसीटीसी द्वारा इस नये ठेकेदार के पास जोवाईन करने को कहा और अब जब जोवाईन कर लिया तो बोल रहा है कि 8 हजार रुपया महीना वेेतन ही देगा. अब बताईये की इतने कम पैसों में घर कैसे चलेगा और बच्चों की पढ़ाई कहाँ से हो पायेगी?

उस कर्मचारी ने यही नही बल्कि यह भी बताया कि ठेकेदार का मैनेजर हमें कम सामान जैसे कॉफी या अन्य कम देता और ट्रेन में सर्व करने को बोलता है. अब पैसेंजर को अगर फीकी कॉफी दें तो कम्प्लेन हमारी ही होती है. अगर इसका कोई विरोध करता है तो ठेकेदार का आदमी कर्मचारी की पिटाई तक कर देता है. अब सवाल यह उठता है कि इस स्थिति में क्या मुनाफाखोर ठेकेदारी के रहते, क्या पैसेंजर को सही सेवा मिलेगी या नही, इसका मालिक प्रभु ही जाने.
अब भले ही प्रभुजी के आते रेल को बेहतर बनाने के लिए यात्री भाड़ा दोगुना कर दिया गया हो. अब अगर आपकी ट्रेन छूट जाये तो आपको 1 रुपया भी रिफंड नही मिलेगा. पहले टीडीआर के द्वारा 50% रिफण्ड का प्रावधान था. वर्करों की सैलरी में कटौती कर दी, नौकरी में भी कटौती की सो अलग. एक तरफ आईआरसीटीसी में परमानेंट स्टाफ की न्यूनतम वेतन 25 हजार रुपया मासिक है तो वही उसी के बराबर काम कर रहे ठेका वर्कर को मात्र 8 हजार दिया जाता है.
अब तो टिकट में भी जुआ सिस्टम बना दिया गया है. जैसे-जैसे सीट काम होता जायेगा वैसे-वैसे टिकट का सर्विस चार्ज बढ़ता जायेगा. इसके अलावा आम आदमी के लिए स्लीपर क्लास का तत्काल 10 बजे से और एसी क्लास का 11 बजे से कर एजेंटों को खुली छूट दे दी है. सीबीआई की आईटी सेंटर पर रेड और टिकट का गोरखधंधा किसी से छुपा नही है. अभी हाल ही में रेलनीर घोटाला, कैटरिंग घोटाला और ई-टिकट घोटाला भीी किसी से छुपा नही है. पहले कम से कम मंत्रियों के समय कोई  भी घोटाला उजागर या आरोप लगता तो वो इज्जत के साथ इस्तीफा से देते थे. मगर अब तो साल भी दूसरा है और हाल भी कुछ और है.
आखिर इतना कुछ होने के बाद भी एक ऐसी चीज है जो अभी तक नही बदली गई और वो है रेलवे की पटरी, जिसके कारण आये दिन ट्रेन दुर्घटनाएं होती रहती है. अगर इसके बाद भी रेल घाटा में चल रहा तो प्रभु जी आप इस्तीफा दे दें. रेल आपके वश की नही है.
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