राँची राजधानी एक्सप्रेस में खाना सर्व नहीं हुआ तो हंगामा, मगर कल से भूखा सोयेगा

नई दिल्ली: पिछले 2-3 दिन से एक खबर आपको पढ़ने को मिली होगी कि भारतीय रेलवे भारतीय रेलवे की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है. जहां पर राजधानी एक्सप्रेस में करीब 16 घंटों तक लोगों को पानी तक नसीब नहीं हुआ. राजधानी एक्सप्रेस अपनी अच्छी व्यवस्था के लिए ही जानी जाती है लेकिन इस घटना के सामने आने के बाद इसकी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं.

जिसके बाद ट्रेन सुबह के 9:30 बजे कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंची तो 16 घंटे से भूखे प्यासे लोग गुस्साए यात्री पेंट्री से जाकर खाना उठा लाए और कुछ यात्रियों ने स्टेशन पर मौजूद विक्रेताओं से खाने का सामान खरीदा. नवभारत टाइम्स ने यहाँ तक लिखा कि राजधानी एक्सप्रेस में घंटों तक नहीं मिला खाना, यात्रियों ने लूटी पैंट्री.

प्राप्त जानकारी के अनुसार दिल्ली से रांची जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस में सैंकड़ों की संख्या में लोग सफर कर रहे थे. जनसत्ता ने लिखा है की  इस एक्सप्रेस में आधे से ज्यादा अटेंडेंट अपनी ड्यूटी पर नहीं आए थे और कॉन्ट्रेक्ट पर नियुक्ट कैटरिंग स्टाफ भी सफर के बीच में ही उतर गए. इस अव्यवस्था के कारण ही यात्रिओं को ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ा.
आगे जनसत्ता ने यह भी लिखा है कि इसके बाद यात्रियों ने जाकर साउथ ईस्टर्न रेलवे के रांची डिवीज़न के वरिष्ठ अधिकारी से इस मामले की शिकायत की. इस पर बात करते हुए अधिकारी ने कहा कि हम इस मामले की पूरी जांच करेंगे. उन्होंने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है की आगे भविष्य में फिर कभी इस प्रकार की गलती न हो. अधिकारी ने कहा कि राजधानी में कैटरिंग का काम नॉर्थ रेलवे देखता है. हम इस बारे में उनसे भी बात करेंगे. अधिकारी ने कहा कि इस ट्रेन में 17 कोच हैं और प्रत्येक कोच में दो अटेंडेंट होने चाहिए लेकिन 17 अटेंडेंट अपनी ड्यूटी से नदारद थें.
अब थोड़ा इस घटना के बारीकियों से समझने कि कोशिस करते है. हम लगातार उस ट्रेन में काम करने वाले कर्मचारियों से संपर्क बनाने का प्रयास कर रहें है. मगर अभी तक सफल नहीं हो पाएं है, मगर उम्मीद है कि जल्द ही आपतक सही जानकारी उपलब्ध करवा पाएंगे. मगर इस घटना कि तहकीकात करने पर यह पता चला है कि सुरेश प्रभु जी के रेल बजट में आईआरसीटीसी को रेलवे का कैटरिंग सौपने कि बात कही गई थी.
जिसके तहत धीरे-2 रेलवे अपने प्राइवेट ठेकेदार से काम वापस लेकर आईआरसीटीसी कि ट्रेन हैण्ड ओवर कर रहा है, जिससे कि उक्त ठेकेदार के अंडर काम करने वाले ठेका वर्कर कि नौकरी ही नहीं छीनीं जा रही है. जिसके के कारण ही वर्कर ने विरोध में ड्यूटी छोड़ कर चले गए, यह प्रक्रिया कोई नई नहीं है बल्कि हर रोज धीरे-धीरे ट्रेन आईआरसीटीसी कि ट्रेन हैण्ड ओवर किया जा रहा है. वैसे-वैसे आईआरसीटीसी उस ट्रेन कि नए ठेकेदार को देता जा रहा है और सैंकड़ो कि संख्या में युवा बेरोजगारी कि दलदल में धकेले जा रहे है. पहले 11-15 हजार में काम कर रहे वर्कर को वापस नौकरी पर तभी रखा जाता है जब वह 8 हजार मासिक में काम करने में तैयार हो जाता है.
आज अगर कुछ यात्रियों को कुछ घंटों का खाना सर्व नहीं हुआ तो पुरे देश में हंगामा मच गया, मगर कल से नौकरी से निकले गए परिवार भूखा सोयेगा उनकी परवाह किसको है? साहब देश बदला रहा है. कभी नोटबंदी तो कभी निजीकरण के नाम पर आम जनता मजदूर को ही क्यों सहना पड़ रहा है. शायद किसी के पास इसका जबाब न हो.

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