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    यूपी के डिप्टी सीएम पर दर्जनों एफआईआर, मगर इस्तीफा केवल तेजस्वी का


    Blog: आजकल बिहार मिडिया में काफी छाया रहता है. विपक्ष कम और मिडिया कुछ ज्यादा ही तेजस्वी के इस्तीफा पर जोर लगा रखा है. उसका कारण हाल ही में तेजस्वी पर दर्ज एफआईआर को मुदा बनाया गया है. जिधर भी तेजस्वी को मिडिया देखती है उधर ही घेर कर इस्तीफा मांगें लग जाती है. अब आइये बिहार के पास ही उत्तरप्रदेश का रुख करते है. जहां के उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्या के नाम से शायद आपलोग जरूर वाकिफ होंगे. उनके बारे में कहा जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह ही मौर्य भी बचपन में चाय बेचते थे. मगर अभी चुनाव में नामाकंन के साथ दिए गए शपथपत्र के मुताबिक उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की संपत्ति नौ करोड़ से ज्यादा की है. योगी मंत्रिमंडल के 45 फीसदी (20 मंत्री) मंत्रियों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. जिसमे केशव प्रसाद मौर्या सबसे टॉप पर है. किसी मिडिया के पास इतना फुर्सत है कि जाकर मौर्या जी को घेर कर पूछे कि इस्तीफा कब दे रहे है? नहीं न, क्यों? क्योकि यूपी में बीजेपी का शासन है.
     


    काम से काम तेजस्वी से इस्तीफा मांगने के बहाने ही सही मिडिया ने तेजस्वी यादव को पॉपुलर बना दिया है. आपलोगों को शायद याद होगा कि एक समय कन्हैया को भी सरकारी तंत्र और उसके मिडिया पिठ्ठू के द्वारा कुछ ऐसी तरफ घेरा गया था. मगर दांव उल्टा पड़ गया. जिसके बाद कन्हैया को मिडिया का पूरा अटेंशन मिला.
     

    ऐसे भी विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीआई ने केस में तेजस्वी का नाम देकर केस को कमजोर कर दिया है. कुछ प्रमुख अख़बारों ने तो यहाँ तक लिखा है कि आईआरसीटीसी के पास रिकॉर्ड ही नहीं है. जिसका आरोप में लालू प्रसाद के घर पर सीबीआई ने छापेमारी कर एफआईआर की है.

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