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    अब नीतीश पुलिस ने दिनदहाड़े IGIMS महिलाकर्मियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

    Now Nitish police beat IGIMS women workers by day-by-day

    Blog: बीएचयू की छात्राओं पर रात के अंधेरे में पुलिस द्वारा लाठीचार्ज का मुद्दा अभी शांत भी नहीं हुआ था कि इधर आईजीआईएमएस- इंदिरा गाँधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, पटना में मंगलवार को बिहार पुलिस के द्वारा दिन-दहाड़े लाठीचार्ज ने कोहराम मचा दिया. जानकारी के अनुसार इस अस्पताल में लगभग 640 कर्मचारी- नर्स, वॉर्ड बॉय, टेक्निशंस, हॉस्पिटल अटेंडेंट्स और स्वीपर्स आदि के पद पर आउटसोर्सिंग यानि ठेके पर कार्यरत है. उनका आरोप है कि पिछले 3 महीने से उनको सैलरी नहीं मिली है. सैलरी न मिलने से लोगों का गुस्सा होना स्वभाविक सी बात है. प्रबंधन से कई बार बात करने के बाद जब बात नहीं बनी तो आक्रोशित कर्मचारियों ने अपने बकाये वेतन की मांग करते हुए मंगलवार को सुबह आईजीआईएमएस के गेट में तालाबंदी कर धरना पर बैठ गए. इसके बाद प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगें. तीन घंटे तक उन्होंने एक भी गाड़ी और एम्बुलेंस को गेट से अंदर नहीं जाने दिया.



     

    जिसके बाद प्रबंधन ने आईजीआईएमएस गेट खाली करवाने के लिए पुलिस बुला लिया. पुलिस ने गेट खाली कराने की कोशिश की मगर कर्मचारी अपनी वेतन भुगतान की मांग पर अड़े रहें. जिसके बाद पुलिस ने कर्मचारियों को खासकर महिला कर्मचारियों को दौरा-दौरा कर पीटा. इस लाठीचार्ज के कारण भगदड़ मचने से बहुत से आंदोलनकारी घायल हो गए. जिनको अस्पताल में ईलाज के लिए भर्ती करवाया गया है.

    खैर, अभी तक बकाया वेतन तो नहीं मिला मगर उलटे हाथ-पांव दुरुस्त हो गए सो अलग. अभी दुर्गा पूजा का महीना चल रहा है. ऐसे में प्रबंधन का रवैया बेहद ही चिंताजनक है. ऐसा नहीं यही कि ये लोग एडवांस में वेतन मांग रहे थे, बल्कि अपने खून-पसीने से कमाए हुए पैसे की मांग कर रहे थे. अब सोचने की बात है कि क्या वेतन लेने के लिए इतना मेहनत करने के बाद लाठी भी खानी पड़ेंगी? इस प्रदर्शन में महिला कर्मचारियों की संख्या ज्यादा थी और ठीक बीएचयू की तरह कानून को ताक पर रखकर कानून के रखवाले बिहार पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों को पीटा है. आखिर ये कैसा देश है जहां किसी का हक़ चोरी करने वाले को पुलिस का साथ और अपना हक़ मांगने वाले हो लाठी खानी पड़ती है.


    सीटू बिहार राज्य कमेटी ने इस घटना की निंदा की ही नहीं की बल्कि सरकार को चेतावनी दी है कि मजदूरों पर इस तरह का दमन नहीं चलेगा. इधर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव ने कहा कि महागठबंधन टूटने के बाद बिहार के स्वास्थ्य विभाग का हालत खराब हो गया. कर्मचारियों का शोसन हो रहा है. बीजेपी के पंजे में फंसे नीतीश कुमार उन्हीं के कदमों पर चलने को मजबूर हैं. मतलब साफ है कि आखिर सुशासन बाबू..धीरे-धीरे रंग में आ ही गए.

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