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    मारुती यूनियन ने जेल में बंद वर्करों के परिजनों को साढ़े 71 लाख की आर्थिक मदद की


    ट्रेड यूनियन केवल मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई नहीं लड़ता बल्कि अपने साथी मजदूर पर आई मुसीबत में हर संभव मद्द्त करने को तत्पर रहता है. यह अभी तक शायद सुनने को ही मिला हो मगर कल इस बात को मारुती सुजुकी वर्कर यूनियन ने सच कर दिखाया. सन 2012 में मारुति मानेसर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में जेल में उम्रकैद की सज़ा भुगत रहे 13 श्रमिक के परिजन खासकर पत्नी व बच्चों का सहारा छीन लिया गया. जिसके बाद उनके सामने भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है. इस स्थिति को देखते हुए हुए मारुति सुजुकी वर्कर यूनियन मानेसर मदद के लिए आगे आकार शनिवार को 13 श्रमिक परिजनों को 5 लाख 50 हजार रुपए प्रति परिवार के रूप में कुल 71 लाख 50 हजार की बड़ी आर्थिक मदद की. बताया जा रहा है कि यूनियन ने यह पैसे मारुति में कार्यरत श्रमिकों से मदद को पांच-पांच हजार रुपए कर जमा किये. जिसको जेल में बंद वर्करों के परिजन को को वितरित किया गया.



     

    मारुती यूनियन के द्वारा यह कोई नई पहल नहीं है बल्कि इसके पहले भी 16 अप्रैल 2016 को मारुति उद्योग कामगार यूनियन ने उस समय जेल में बंद 36 श्रमिकों के परिजनों को 50-50 हजार की राशि दी गई थी. उसके बाद 18 जुलाई 2017 को सनबीम ऑटो कंपनी के श्रमिकों ने 75-75 हजार जेल में बंद 13 श्रमिकों के परिजनों को आर्थिक मदद के तौर पर राशि दी थी.




    इसके बारे में मारुती सुजुकी वर्कर यूनियन के एक साथी ने बताया कि इस आर्थिक सहायता द्वारा हम सभी मजदुर साथी और पुरे समाज को यह बताना चाहते हैं कि इस पूंजीवादी व्यवस्था में हमारे हकों के लिए लड़ने वाले हमारे अग्रणी पंक्ति के मजदुर अकेले नही हैं बल्कि उनके साथ उनके मजदुर भाई उनके साथ खड़े हैं. उन्होंने आगे कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि हर संघर्ष बलिदान मांगता है और इस संघर्ष में आज जो साथी जेल में हैं वो कहीं न कही हमसे आगे निकल गये हैं,  बेसक उन्हें इस बात का अंदाज़ा भी न हो. यह हम सब को महसूस करना होगा कि यदि इस बलिदान को हम यूं ही भूला दें तो आने वाले समय में गलत के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग इस तरह की पहल करने से पीछे हट जायेंगे.




    जेल में बंद मजदूरों के परिवारों के प्रति हमारी जिम्मेवारी बनती है, ताकि आगे आने वाले समय में कोई साथी संघर्ष की राह को अपने परिवार की स्थिति के बारे में सोचकर संघर्ष से पीछे न हाट जाये. उन्होंने आगे कहा कि मारुति के संघर्ष में आप सभी का योगदान रहा है और यह योगदान ही आने वाले समय में संघर्ष कि दिशा को तय करेगा क्योंकि भूखे पेट ज्यादा लम्बी लड़ाई लड़ना इतना आसान नहीं है कहीं न कहीं आदमी अपने परिवार कि हालातों से टूट ही जाता है लेकिन इस प्रकार से यदि हम सब मिलकर किसी परिवार कि जिम्म्मेदारी लेते हैं, तो हजारों संघर्षशील साथियों को प्रोत्साहन मिलेगा.
     

    इस तरस से देखें तो मारुती सुजुकी वर्कर यूनियन के साथी वर्करों ने इस समाज के सामने एक उदाहरण पेश किया है. इससे गलत के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को प्रेरणा मिले न मिले मगर मारुती कांड में जेल में बंद वर्करों को अपने इन साथियों पर गर्व महसूस जरूर होगा.

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