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    मोदी राज में भूख से तड़प-तड़प कर बच्ची की मौत, आधार कार्ड बना कारण


    मोदी राज में भूख से तड़प-तड़प कर बच्ची की मौत, आधार कार्ड बना कारण

    आईडी प्रूफ की तरह इस्तेमाल में लाया जाने के लिए बनाये कार्ड, किसी को क्या पता था कि अब सभी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में उपयोगी बन जायेगा. पहले देशभर में आम आदमी की पहचान का एकमात्र माध्यम बन चुके आधार कार्ड का स्लोगन अब बदलकर 'आम आदमी का अधिकार' के बजाए नया स्लोगन 'मेरा अधिकार, मेरी पहचान' बन गया है. मगर इसी आधार ने एक मासूम बच्चे की जान ले ली. यह कहीं और नहीं बल्कि झारखंड के सिमडेगा जिले में हुआ है.



     

    एक 11 वर्ष की बच्ची का 8 दिनों तक भूख से तड़प-तड़प कर मर जाना सचमुच चिंतनीय है. असल में हुआ यह कि बच्ची के परिवार का राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं होने के कारण 6 महीने पहले ही रद्द कर दिया गया. जिसके बाद से ही जनवितरण प्रणाली के दुकानदार ने यह कहते हुए पिछले 6 महीने से राशन नहीं दिया कि तुम्हारा राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं है. बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार पूर्णतः राशन प्रणाली द्वारा मिलने वाले राशन पर ही निर्भर था. राशन नहीं मिलने के कारण किसी तरह थोड़ा बहुत खाकर पानी पीकर काम चला रहा था. मगर उसकी छोटी बच्ची इस यातना को झेल नहीं पायी.





    मिडिया कि खबर के अनुसार मरने वाली बच्ची का नाम संतोषी बताया जा रहा है. संतोषी स्कुल के मिड डे मिल के खाना खाकर जैसे तैसे काम चला ले रही थी, मगर दुर्गा पूजा के छुट्टी होने से उसका खाने का वह सहारा भी छीन गया था. कई दिनों तक भूखे रहने के कारण 27 सितम्बर को पेट में तेज दर्द उठा और उनके मौत का कारण बन गया.




    अभी झारखंड में बीजेपी का शासन है. पहले बीजेपी आधार कार्ड को बेकार बताती थी मगर अब हर योजनाओं में आधार कार्ड को जरुरी बना रही है. जबकि 2013 में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है.
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