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    गेस्ट टीचर्स: सदन में बिल पास कर दिया तो अब बीजेपी वाले क्यों बिदक गये?


    दिल्ली सरकार के उपमुख्यमंत्री ने वादा किया था कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में गेस्ट टीचर्स को रेगुलर करने का बिल सदन में पास करवायेंगे. अपना वादा पूरा करते हुए बुधवार को सदन में बिल पास कर दिया गया है. जबकि इसके ठीक विपरीत लेफ्टिनेंट गवर्नर यानी एलजी साहब ने फिर से रोड़ा अटका दिया है. जिसके खिलाफ केजरीवाल कल सदन में ही भड़क गए. उन्होंने सीधे लेफ्टिनेंट गवर्नर और बीजेपी को निशाना पर लेते हुए कहा कि "देश ब्यूरोक्रेसी से देश नहीं चलता बल्कि डेमोक्रेसी से देश चलता है. दिल्ली के मालिक हम है, जनता ने हमें और आपको चुना है. अगर लीगल सेक्रेटरी ही अगर देश चला लेते तो हमारी क्या जरुरत थी". आगे उन्होंने कहा कि "मैं चुना हुआ मुख्यमंत्री हूं, कोई आतंकवादी नहीं". बता दें कि दिल्ली सरकार इन गेस्ट टीचर्स को स्थायी यानी रेगुलर करना चाहती है लेकिन, एलजी का कहना है कि दिल्ली सरकार के पास इसका अधिकार नहीं है.




    सदन में गेस्ट टीचर के परमानेंट के मामले में LG  के अड़चन के बाद  केजरीवाल आग बबूला, खुद सुने 



    दिल्ली के एजुकेशन मिनिस्टर और डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया ने कहा कि कानूनी सलाह के बाद ही ये बिल तैयार किया गया है. आखिर इस मामले में एलजी को क्या दिक्कत है? सिसौदिया ने कहा- हम एलजी से सहमत नहीं हैं कि ये बिल सर्विसेज के अंडर आता है. एजुकेशन का मतलब सिर्फ स्कूल बनाना नहीं है. बहस के दौरान अपोजिशन लीडर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का मकसद गेस्ट टीचर्स को रेगुलर करना नहीं है, वो सिर्फ इस मुद्दे पर सियासत करना चाहती है. उसने बिल पेश करने से पहले प्रोसीजर को फॉलो नहीं किया.


    इससे पहले दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर कहा था कि वह गेस्ट टीचर को पक्का करने के लिए लाए जा रहे बिल पर पुनर्विचार करें, क्योंकि ये मामला उनके या दिल्ली विधानसभा के दायरे में नहीं आता. बैजल ने कहा था कि ये 'सर्विसेज' का मामला है और ये विषय दिल्ली विधानसभा के दायरे में नहीं आता, इसलिए ये संवैधानिक नहीं है.

    जानकारी के अनुसार दिल्ली की कैबिनेट ने 27 सितंबर को सर्व शिक्षा विधेयक 2017 को मंजूरी दे दी थी. जिससे सरकारी स्कूलों में 15,000 अतिथि शिक्षकों को स्थायी बनाया जाएगा. केजरीवाल कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, कुल 17,000 अतिथि शिक्षक में से 15,000 शिक्षक जोकि विधेयक के प्रावधानों के अनुसार स्थायी बनाए जाएंगे, केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा को पास कर चुके हैं और बाकी बचे 2,000 अतिथि शिक्षक के रूप में काम करते रहेंगे.

    बीजेपी दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने 18 अगस्त को गेस्ट टीचर के मामले में क्या कहा, खुद सुने 



    अब थोड़ा पीछे अगस्त महीने में चलते हैं. जब खुद बीजेपी दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा था कि केजरीवाल सरकार गेस्ट टीचर को परमानेंट ही नहीं करना चाहती है. उन्होंने खुद ही वीडियो जारी कर केजरीवाल से तब आग्रह किया था कि वो सदन में बिल पास करें. उसके बाद एलजी से साइन करवाना उनकी जिम्मेवारी होगी. यह वीडियो क्लिप उन्होंने तब जारी किया था जब लगभग 4-5 हजार गेस्ट टीचर उनके आवास पर प्रदर्शन करके उनसे मुलाकात की थी. अब जब उनके कहे अनुसार केजरीवाल ने सदन में बिल पास कर दिया तो आखिर अब बीजेपी वाले क्यों बिदक गये? आखिर इनके कथनी और करनी में फर्क क्यों? अब बैजल जी यानि माननीय एलजी महोदय यह कह रहे है कि "ये 'सर्विसेज' का मामला है और ये विषय दिल्ली विधानसभा के दायरे में नहीं आता, इसलिए ये संवैधानिक नहीं है", तो फिर मनोज तिवारी किस मुंह से केजरीवाल को बिल पास करने का चैलेंज दिया था. ऐसा लगता है मानो हर कोई दूसरे को नीचा दिखने में लगा हो, कोई परमानेंट हो न हो उससे कोई मतलब नहीं.

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