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    मोदी सरकार के खिलाफ पुरे देश के लाखों वर्कर संसद मार्ग पर महापड़ाव में शामिल

    मोदी सरकार के खिलाफ पुरे देश के लाखों वर्कर संसद मार्ग पर महापड़ाव में शामिल

    नई दिल्ली: देश की सभी केन्द्रीय ट्रेड़ यूनियनों और कर्मचारियों एवं मजदूरों के स्वतंत्र फैड़रेशनों द्वारा संयुक्त रुप से ताल कटोरा इनडोर स्टेडियम नई दिल्ली में 8 अगस्त, 2017 को आयोजित मजदूरों के विशाल राष्ट्रीय कन्वेंशन में तय किया गया कि आने वाले 9,10,11 नवम्बर, 2017 को लगातार 3 दिवसीय विशाल क्रमिक धरना दिया जाएगा.



    पुरे देश के लाखों वर्कर संसद मार्ग पर महापड़ाव में शामिल

    इसी फैसले के तहत  9 नवम्बर 2017 से पुरे देश के लगभग एक लाख वर्कर संसद मार्ग पर तीन दिवसीय धरना पर बैठे है. जानकारी के अनुसार, यह राष्ट्रीय महापड़ाव का आयोजन न्यूनतम् वेतन, सामाजिक सुरक्षा, योजना कर्मचारियों को मजदूर की मान्यता और भुगतान एवं सुविधाओं के और निजीकरण तथा बड़े पैमाने पर ठेकाकरण के खिलाफ सहित 12 सूत्रीय मांग पत्र की मांग को सरकार के द्वारा अनसुना करने के कारण किया गया है.




    राष्ट्रीय महापड़ाव में मजदूरों का जनसैलाब का वीडियों देखें 



    मजदूरों के राष्ट्रीय महापड़ाव की मुख्य मांगे क्या है?

    आज से लगभग 1 वर्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्णय के बावजूद ठेका मजदूरों को ‘‘समान काम के लिए समान वेतन ’’ सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रावधान करने को पूरी ढ़ीठता के साथ नकारा जा रहा है. सार्वजनिक उपयोगिता की सेवाओं जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, भारतीय रेल, वित्तीय सेवाओं, बिजली, पानी आदि के प्रत्येक हिस्से को सार्वजनिक-निजी-भागेदारी (पीपीपी) के माध्यम से अधिकाधिक आउटसोर्सिंग, निजीकरण और व्यावसायीकरण की ओर धकेला जा रहा है, ताकि आम जनता की कीमत पर निजी कंपनियों के लिए बड़े मुनाफों को सुनिश्चित किया जा सके. रक्षा उत्पादन, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा और सभी प्रकार के सार्वजनिक परिवहन, तेल, खनिज, बंदरगाह और डॉक, बिजली आदि के विनिवेश व स्ट्रेटेजिक सेल, और निजी क्षेत्र के पक्ष में आउटसोर्सिंग, 100 प्रतिशत एफडीआई को बढ़ावा देने सहित सभी सामरिक महत्व के सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण के मामले में दिन-प्रतिदिन वृद्धि हो रही है. इसके अलावा नकदी से सम्पन्न सभी सार्वजनिक उपक्रमों पर अपने आरक्षित नगद से निवेश करने पर बन्दिश लगा दी गयी है.


    पुरे देश के मजदूर जा सकते हैं अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

    इस राष्ट्रीय महापड़ाव के द्वारा मजदुर वर्ग सर्कार को आगाह करने आयी है कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं मानी तो आने वाले समय में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से उन्हें को रोक नहीं सकता है. जिसके नुकसान कि जिम्मेवारी पूरी की पूरी सरकार की ही होगी. एक और भी गौड़ करने की बात है कि आखिर दिल्ली में पिछले दो दिनों से डेरा डाले मजदूरों के इस जनसैलाब को नेशनल मिडिया इग्नोर क्यों कर रही? अब इसको सरकार का डर समझे या कॉरपोरेट्स परस्ती? 

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