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    राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित गरीबों की मसीहा स्मिता तांडी के साथ ट्रेन में छेड़खानी

    राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित गरीबों की मसीहा स्मिता तांडी के साथ ट्रेन में छेड़खानी

    आज भले ही हम चांद और मंगल पर पहुंच गए हों मगर कुछ घटनाएं साबित करती है कि महिलाओं के प्रति समाज के कुछ लोगों की सोच वही की वही है. इसका जीता जागता उदाहरण आये दिन कहीं न कहीं देखने व् सुनने को मिल ही जाता है. कुछ ऐसा ही हुआ देश की हीरो और गरीबों की मसीहा कही जाने वाली छत्तीसगढ़ पुलिस की महिला कांस्टेबल स्मिता तांडी के साथ. 2016 में ही उनके बहादुरी और जज्बे को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. मगर ट्रेन में सफर के दौरान एक पढ़ें लिखे प्रोफ़ेसर ने उनके साथ छेड़-छाड़ कर समाज को शर्मिंदा ही नहीं किया बल्कि हम सबों का अपमानित भी कर दिया है. जिसके बाद स्मिता तांडी ने तुरंत ही ट्वीट कर मदद मांगी. जिसके फौरन बाद पहुंची. आरपीएफ टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया.
     

     स्मिता तांडी के साथ ट्रेन में छेड़खानी, ट्वीट कर मदद मांगी

    उनके बारे में बताया जा रहा है कि वो एक शादी समारोह से साउथ बिहार एक्सप्रेस ट्रेन से लौट रही थी. यह घटना बिलासपुर-भाटापारा के बीच घटी. उक्त शर्मनाक घटना को अंजाम देने वाला एक अस्टिटेंट प्रोफेसर है, जो ट्रेन के उसी जनरल बोगी में ही सवार था. मिली जानकारी के मुताबिक जैसे ही ट्रेन खुली प्रोफेसर ने महिला आरक्षक के साथ बदतमीजी शुरू की, पहले तो स्मिता ने इग्नोर करना शुरू किया. मगर प्रोफ़ेसर अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो फिर स्मिता तांडी ने ट्वीट कर मदद मांगी.


    स्मिता की शिकायत के बाद आरोपी अस्टिटेंट प्रोफेसर को हिरासत में ले लिया

    बैक टू बैक किए गए अपने कुछ ट्वीट के जरिए स्मिता ने ना सिर्फ घटना का अपडेट दिया बल्कि ये भी बताया कि उस वक्त ट्रेन कहां थी. मदद मांगने के लिए स्मिता ने भाटापारा आरपीएफ से संपर्क भी किया. स्मिता के ट्वीट को आरपीएफ ने बेहद ही गंभीरता से लिया. जैसे ही ट्रेन भाटापारा पहुंची आरपीएफ की टीम वहां पहले से मौजूद थी. स्मिता की शिकायत के बाद आरोपी अस्टिटेंट प्रोफेसर को हिरासत में ले लिया गया.  हालांकि उसके रोने गिड़गिड़ाने के बाद स्मिता ने एफआईआर दर्ज नहीं कराया.

    स्मिता तांडी ने ट्वीट कर मदद मांगी

    अब आइये जानते हैं कि आखिर कौन है ये स्मिता तांडी

    छत्तीसगढ़ राज्य की स्मिता तांडी गरीबों की मसीहा नाम से मशहूर हैं. उनके गरीबों के मदद करने के जज्बे ने उन्हें इतना पॉपुलर बना दिया कि उनके फेसबुक पर पोस्ट डालते ही लोग उनकी मदद करने को तैयार हो जाते है. उससे भी आश्चर्ज की बात यह है कि उनके फोलोवर्स की संख्या 8 लाख के करीब है. जो उनके पोस्ट पढ़कर उनके साथ गरीबों की मदद करने में सहायता करते हैं.

    अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा स्मिता तांडी नारी शक्ति पुरस्कार 2016 से सम्मानित भी किया गया.

    उनके जीवन में इस बदलाव के पीछे एक दुखद कहानी है. उनके बारे में बताया जाता है कि स्मिता के पिता भी पुलिस में थें. स्मिता एक मध्यमवर्गीय परिवार से है. बताया जाता है कि उनके पिता एक बार काफी बीमार पड़ गए. परिवार के के लोग आर्थिक तंगी के बजह से परेशान हो गए. स्मिता इसके लिए लगातार प्रयास करती रहे मगर उनके काफी प्रयास करने के बाद भी अपने पिता को बचा नहीं सकी. इस घटना ने स्मिता को अंदर से झकझोर कर रख दिया.
     

    बताते है कि इस दुखद घटना ने उनके जीवन पर काफी प्रभाव डाला. इसके बाद उन्होंने गरीबों और आशय लोगों को मदद करने को जीवन का लक्ष्य बना लिया. तभी से स्मिता का निरंतर प्रयास जारी है. वह लोगों को मदद करने के लिए फेसबुक का अकाउंट बनाया था. उसके बाद से वो निरंतर गरीबों और असहायों की मदद करती आई हैं. इसके लिए उनको कई बार सम्मानित भी किया जा चूका है.

    राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित है गरीबों की मसीहा स्मिता तांडी 

    स्मिता अभी मात्र 24 साल की है लेकिन उनका ये जज्बा उन्हें बाकी पुलिस वालो से अलग ला खड़ा करता है. उनके लगातार सामाजिक कार्यो और असहाय लोगो की मदद करने की वजह से धीरे-धीरे स्मिता तांडी प्रसिद्ध होती चली गयी. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार 2016 से सम्मानित भी किया गया. किसी भी व्यक्ति के लिए देश के सर्वोच्च व्यक्ति द्वारा सम्मानित होना वाकई गर्व की अनुभूति करने वाला क्षण होता है.
     

    स्मिता के फेसबुक पर 8 लाख से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं 

    जानकारी के लिए आपको बता दें कि स्मिता तांडी छत्तीसगढ़ पुलिस में कार्यरत हैं. वे जीवनदीप समूह बनाकर जरूरतमंदों को इलाज उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रही हैं. फेसबुक पर उनके आठ लाख से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं. हम "वर्कर वॉयस" के माध्य से स्मिता तांडी के इस जज्बे को सलाम करते हैं. अगर आप भी स्मिता तांडी के बनाये मेडिकल सहायता ग्रुप से जुड़ कर किसी जरूरतमंद की सहायता करना चाहते है तो जीवनदीप के फेसबुक ग्रुप में जुड़िये – JivandeepCGbilaspur

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