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    त्रिपुरा के 5 बार सीएम रहे माणिक सरकार हुए और गरीब, सादगी की मिशाल

    Tripura has 5 times CM, Manik Sarkar  has become more poor, simplicity becomes milch

    एक बार फिर से त्रिपुरा में मुख्यमंत्री माणिक सरकार सुर्ख़ियों में हैं. पहले ही की तरह इस बात भी उनके सादगी को चारों ओर सराहा जा रहा है. जानकारी के लिए बता दें कि पिछले 5 बार मुख्यमंत्री रह चुके माणिक सरकार देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री के रेस में सबसे आगे नंबर वन पर हैं. अभी माणिक सरकार ने सोमवार (29 जनवरी) को फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए धानपुर विधानसभा क्षेत्र चुनाव लड़ने के लिए हलफनामा दाखिल किया है. इस हलफनामे के अनुसार उन्होंने हाथ में महज 1520 रुपये नकद होने की जानकारी दी है. इसके साथ ही श्री सरकार के बैंक खाते में 20 जनवरी तक 2410 रुपये थे.

    अभी के समय में देश में ग्राम पंचायत से लेकर ऊपर स्तर के चुनाव जीतते ही मुखिया सरपंच, विधायक संसद बनते ही लोग बेहिसाब संपत्ति के मालिक बन जाते हैं. ऐसे समय में माणिक सरकार की कहानी सबसे उलट है. सबसे हैरत की बात यह है कि वो लगातार 5 बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहने के वावजूद उनकी संपत्ति बढ़ने के वजय ओर घट गई है. जबकि बतौर मुख्यमंत्री उनको वेतन के तौर पर 26,315 रुपये मिलते हैं. वह पूरी राशि पार्टी फंड को दान कर देते हैं. इसके बदले में पार्टी की ओर से उन्हें जीवन-यापन के लिए 9,700 रुपये प्रति माह दिया जाता है. माणिक सरकार मुख्यमंत्री के तौर मिले सरकारी आवास में रहते हैं. उनकी पत्नी को अगरतला में अक्सर आमलोगों की तरह रिक्शे से आते-जाते देखा जाता है. माणिक सरकार के बारे में इतना तक कहा जाता है कि वो अपने कपड़ा तक खुद धोते हैं. उनके बारे में इतना कुछ जानकार उनकी सादगी का कायल हर कोई हो जाये.


    उनके हलफनामे के अनुसार, सीएम के पास 0.01 एकड़ जमीन है जो कृषि योग्य नहीं है. इस पर उनके भाई का भी हक है. इसके अलावा माकपा के वरिष्ठ नेता के बैंक खाते में 20 जनवरी तक 2410 रुपये थे. वर्ष 2013 में उनके पास 9,720 रुपये थे. इससे यह साबित होता है कि पिछले पांच वर्षों में उनकी संपत्ति में बहुत कमी आई है. आज के दौर में अभी भी वो मोबाइल नहीं रखते हैं. उनकी पत्नी पांचाली भाट्टाचार्य पूर्व सरकारी कर्मचारी रह चूंकि हैँ. इसके वाबजूद उनके खाते में कुल 12.15 लाख रुपये हैँ. इसके अलावा उनके हाथ में 20,140 रुपये नकद हैं. पांचाली सरकारी कर्मचारी रह चुकी हैं.




    दूसरी तरफ, त्रिपुरा में भाजपा पैर ज़माने की भरपूर कोशिश में लगी है. त्रिपुरा के 60 सीटों वाली विधानसभा में इस बार भाजपा की कोशिश 1988 से सत्ता में रहे मानिक सरकार के हाथ से कमान छीन कर कॉम्युनिस्ट राज को खत्म करने की है. हालांकि बीजेपी के लिए यह काम इतना आसान नहीं है. अगर आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 50 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से 49 सीटों पर भाजपा की जमानत जब्त हो गई थी. वहीं सीपीएम ने 55 सीटों पर चुनाव लड़कर 49 सीटें जीती थीं तो कांग्रेस ने 48 सीटों पर चुनाव लड़कर 10 सीटें जीती थीं.

    माणिक सरकार वर्ष 1998 से त्रिपुरा के मुख्यमंत्री हैं. उनकी संपत्ति का ब्यौरा ऐसे समय सामने आया है, जब जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में बेहिसाब वृद्धि एक मुद्दा बना हुआ है.संपत्ति को लेकर देश के कई जनप्रतिनिधि विवाद के केंद्र में हैं. जानकारी के अनुसार आगामी 18 फरवरी को त्रिपुरा के 60 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव होने हैँ. ऐसे में वाम मोर्चा माणिक सरकार के नेतृत्व में लगातार छठवीं बार सत्ता में आने को लेकर आश्वस्त है.

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