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    क्या लालू मोदी सरकार के खिलाफ बोलने की जुर्म में जेल गए? CBI ने यह क्या कह डाला

    क्या लालू मोदी सरकार के खिलाफ बोलने की जुर्म में जेल गए, CBI ने यह क्या कह डाला

    बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री लालू यादव चारा घोटाला के केस में झारखण्ड जेल में बंद हैं. सीबीआई कोर्ट ने उनको दोषी करार देते हुए चारा घोटाला के विभिन्न मामलों में सजा दी है. आये दिन उनके बारे में अजीबो-गरीब बाते पढ़ने को मिलती है. हमारे देश का कानून ऐसा है कि किसी भी बेगुनाह को सजा नहीं मिलनी चाहिए चाहे सौ गुनाहगार छूट जाए. अभी तक पता था कि कानून अंधा है और जो तथ्य उनके सामने पेश किये जाते हैं उसी के आधार पर कोर्ट फैसला देता है. मगर इस मामले में यहां कुछ और ही दिख रहा है.
     

    आज ही लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से कहा कि लालू प्रसाद गम्भीर बीमारियों से जूझ रहे है अगर उनके स्वास्थ्य का उचित ख़्याल नहीं रखा गया तो गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है. बीजेपी शासित झारखंड के सरकारी अस्पताल के सुझाव और रिपोर्ट के अनुसार लालू जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है. जैसे की वो Diabetic है. शरीर में पानी रखने की क्षमता नहीं है जो किड्नी को नुक़सान पहुँचा रही है. उन्हें बेहतर ईलाज के लिए AIIMS, दिल्ली भेजा जाना चाहिए.
     

    उन्होंने आरोप लगाया कि जज साहब ने सीबीआई के वक़ील की दलील को प्राथमिकता दी जो कहती है कि लालू स्वस्थ है. वो केंद्र सरकार के विरुद्द विपक्ष की लामबंदी की अगुवाई कर रहे है और तो और उन्होंने विगत अगस्त महीने में देश की 20 पार्टियों को बुलाकर पटना में बड़ी रैली आयोजित की. वो केंद्र और राज्य सरकार के ख़िलाफ़ लगातार आक्रामक रहते है. 

    CBI ने यह क्या कह डाला LALOO

    उन्होंने कोर्ट के आर्डर का कॉपी का कटिंग को शेयर करते हुए बताया कि जज साहब ने अपने फ़ैसले में लिखा है कि कैसे एक ग़रीब घर में पैदा होने के बावजूद दोषी लालू प्रसाद राजनीति में आया ही नहीं बल्कि अपनी एक राजनीतिक पार्टी भी बना ली. उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष है और तो और समय आने पर अपनी पत्नी को भी मुख्यमंत्री बना दिया. कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलता था. 

    उन्होंने आगे कहा कि इन सब remarks का केस से कोई लेना-देना नहीं फिर भी फ़ैसले में है. हम तो यही सुनते और पढ़ते आए है कि कोर्ट सबूतों पर चलता है धारणाओं पर नहीं. इसके आगे उन्होंने लिखा है कि "आपको बता दूँ  कि लालू जी पर पैसों के लेन-देन (भ्रष्टाचार) का आरोप नहीं है. उन पर साज़िश (120B) करने का आरोप है.

    रोहिणी जी के अनुसार न्यायालय का अब शायद यही मानना है कि किसी ज़िलाधिकारी, विभागीय सचिव, वित सचिव, निगरानी विभाग, ऑडिट विभाग, विभागीय मंत्री का कहीं कोई दोष नहीं है. मुख्यमंत्री लालू प्रसाद खुद अकेले जिले के ख़ज़ाने में गए और पैसा निकाल कर ले लाए. कोर्ट के फैसले में कहा गया कि लालू प्रसाद ने तो सिर्फ़ साज़िश की. तो बड़ा सवाल यह है कि पैसा कौन खाया? कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया और सीधे मुख्यमंत्री को फंसा दिया. लालू यादव भ्रष्टाचार के मामले में नहीं भाजपा और मोदी सरकार के खिलाफ बोलने की जुर्म में जेल गए हैं.

    हम तो इतना ही कहेंगे कि कोर्ट में अभी भी केवल गरीब बेसहारों का विश्वास कायम है, मगर पैसे वाले को तो कानून से खेलते हुए देखा है. अब भले ही हजारों माल्या, नीरव, साह आदि छूट जाए मगर लालू यादव को मत छोड़ना. उसने मोदी के खिलाफ सिर उठाने की जुर्रत की है.

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