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    महाराष्ट्र किसान मार्च: मुंबई पहुंचते ही लोगों ने अपने अन्नदाता का जोरदार स्वागत किया

    Maharashtra Kisan protest Long March

    कृषि को भारत का रीढ़ माना जाता है. आज भी देश के 70% से अधिक लोग गांवों में बस्ते हैं. उनके बेवसाय का मुख्य जरिया खेती-बारी ही है. यह समझने की बात है कि प्रकृति से उत्पन्न हवा, पानी, आग के बाद अगर मनुष्य के लिए कुछ जरुरी है तो वह भोजन ही है. हर व्यक्ति अपने हैसियत के मुताबिक भोजन ग्रहण करता है. रोटी कपडा और मकान मनुष्य की पहली प्राथमिकता है. आज यही अन्नदाता किसान कर्जमाफी सहित विभिन्न मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव करने नासिक से चलकर मुंबई पहुंचे हैं. इसी 5 मार्च को किसानों ने पैदल नासिक से चलकर 11 मार्च को राज्य की राजधानी मुंबई पहुंचा है. किसानो ने एलान किया है कि वो आज यानि 12 मार्च को मुंबई में राज्य की विधानसभा का घेराव कर अपनी आवाज राजनेताओं तक पहुंचायेंगे.


    Maharashtra Kisan Long March (Watch Video)


    सीपीआईएम का किसान विंग ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) के बैनर तले किसानों का यह समूह कर्जमाफी की मांग को लेकर लंबे दिनों से आंदोलन पर है. सेंट्रल नासिक के सीबीएस चौक से किसानो ने एक हाथ में लाल झंडा और दूसरे हाथ में खाने की पोटली ली और विधान सभा पर चढ़ाई करने निकल पड़े. हर रोज ये 30 से 35 किलोमीटर पैदल चलकर आये हैं. जैसे- जैसे ये बढ़ते गए वैसे-वैसे रास्ते में लोग जुड़ते गए. कल ये लगातार सात दिन पैदल चलकर मुंबई पहुंचे हैं.

    इस किसान मार्च की अच्छी बात यह है कि हजारों किसान शांतिपूर्ण ढंग से बिना किसी को नुक्सान पहुंचाए अपने मंजिल तक पहुंचे हैं. इनमे महिलाओं के साथ ही साथ बुजुर्ग किसानो की संख्या भी अच्छी संख्या में देखी जा सकती है. जैसे ही यह किसान मार्च मुंबई के ईस्टर्न एक्सप्रेस वे पर पहुंची वैसे ही अपने अन्नदाता को मुंबई की जनता ने सर आंखों पर बिठा लिया. शोसल मिडिया और अन्य माध्यमों से मिली जानकारी के अनुसार लोगों ने किसानो का जोरदार स्वागत फूल बरसाकर किया. इसमें कोई अपने अन्नदाता किसानो के लिए पानी तो कोई पोहा तो कोई बिस्कुट बांटकर अपना स्वागत दर्ज करवाया. इसके आलावा कुछ सिख समुदाय के लोगों ने विक्रोली के पास इनके खाने के लिए लंगर लगा दिया तो कहीं मुसलमान समुदाय के लिए इनके लिए खाने-पीने का समान लेकर बाट जोहते दिखे. दूसरों शब्दों में कहें तो यही है सच्चा भारत, अनेकता में एकता.


    आखिर इन किसानों की क्या मांग है?

    देश के किसानों के मार्च की खबर को मिडिया शायद ही दिखाए. मगर देश के प्रमुख न्यूज बेवसाइट BBC ने प्रकाशित किया है. इस मार्च के पीछे किसानों की सबसे बड़ी मांग है कर्जमाफी. उनके द्वारा बैंकों से लिया कर्ज बोझ बन चूका है. मौसम के बदलने से हर साल फसलें तबाह हो रही है. ऐसे में किसान चाहते हैं कि उन्हें कर्ज से मुक्ति मिले. ऐसे भी किसान और मजदूर ही देश की रीढ़ है ऐसे में किसी भी प्रकार की तरक्की इनको अनदेखी कर संभव नहीं है. खबर के अनुसार विभिन्न संगठनों और राजनितिक पार्टियों ने किसानो के मांग का समर्थन किया है.
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