सांप्रदायिक हिंसा में जलने वाला रोसड़ा के यूथ बिना भेदभाव ऐसे करते परीक्षा की तैयारी

अभी कुछ दिन पहले ही रामनवमी के मौके पर निकाले गये जुलूस पर आपत्तिजनक कृत्य के बाद तोड़फोड़ और सौहार्द बिगाड़ने के मामले में समस्तीपुर जिले का रोसड़ा चर्चा में आया था. मगर इसी रोसड़ा के यूथ के एक दूसरे रूप को देखकर आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे.

रोसड़ा के यूथ ऐसे करते परीक्षा की तैयारी

हम बात कर रहे हैं जगह के अभाव में प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को जो अपने-अपने भविष्य को गढ़ने के लिए दरी पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने में लगे हैं. जानकारी के अनुसार बीएसएस क्लब के माध्यम से रोसड़ा, समस्तीपुर के युवाओं का एक ऊर्जावान और उत्साही टीम के द्वारा गरीब, वंचित, शोषित, शहीदों के बच्चे, विधवाओं के बच्चे, दिव्यांग बच्चे सहित बेटियों को विभिन्न सरकारी नौकरियों के तैयारी के लिए नि:शुल्क कोचिंग दिया जाता है. यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों में गजब का उत्साह देखा जा सकता है कि संसाधन और जगह के अभाव में भी नीचे बैठकर शिक्षा ग्रहण करने में पूरी तन्मयता से बच्चे लगे रहते हैं.
बीएसएस क्लब के संस्थापक राजेश कुमार सुमन ने बताया कि नीचे में बैठकर शिक्षा ग्रहण करने के बाबजूद भी इनका मनोबल अन्य प्रतियोगियों जो बड़े-बड़े बिल्डिंग व वातानुकूलित कक्षा में शिक्षा करते हैं, उनके तुलना में काफी ऊंचा है. बच्चों का मनोबल उंचा होने का मुख्य कारण यह है कि यहां अध्यापन कार्य का संपादन करने वाले युवाओं के टीम में अधिकतर विभिन्न सरकारी नौकरियों में सेवा दे रहें हैं.
यहां वही युवा सेवा दे रहें हैं जो कहीं न कहीं नौकरियों में चयनित होकर नौकरी कर रहें हैं या फिर अन्य बेहतर नौकरियों के तलाश में जो युवा हैं. यानि कि बच्चों को एक अनुभवी और एक्सपर्ट टीम के द्वारा मार्गदर्शन दिया जा रहा हो, जबकि अन्य संस्थानों में अमूमन ऐसे लोगों का वहां घोर अभाव होता है.यहां का शिक्षा व्यवस्था व संस्कार भी अन्य बड़े-बडे बिल्डिंग वाले संस्थानों से बिल्कुल अलग है. इसलिए नीचे बैठकर भी शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चे भी आज आपको केन्द्र सरकार व राज्य सरकार के विभिन्न संस्थानों में नौकरी करते हुए मिल जायेंगे. यहां बच्चों में पहले पढाई के प्रति भूख को जगाया जाता है. अगर बच्चों में पढाई के प्रति भूख जिस दिन जग जायेगा उस दिन से बच्चा पढना शुरू कर देगा. अगर बच्चों में पढाई के प्रति भूख नहीं हो और उसे खूब पढाया जाय तो वो बच्चा कभी नहीं पढ पायेगा.
पहले बच्चों में उनके अन्दर मौजूद अपार शक्ति का अहसास दिलाना होगा कि आप सब कुछ कर सकते हो. आज का युवा संगत और माहौल में बिगड़ जाते हैं अगर उन्हें उचित मार्गदर्शन और सौहार्दपूर्ण शैक्षणिक वातावरण दिया तो वह बेहतर प्रदर्शन कर सकता है. इसलिए इस क्षेत्र के उच्च शिक्षित युवाओं व विभिन्न जगहों पर सरकारी नौकरी करने वाले युवाओं के अलावे कुछ व्यवसायियो का एक वर्ग का एक ही मकसद है कि हम अपने छोटे भाई-बहनों अर्थात यहां के बच्चों को हम शिक्षा के माध्यम से ही हम आगे बढा सकते हैं.
इसलिए यहां के सभी लोगों के अथक और अनवरत प्रयास से शिक्षा से वंचित युवाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें शिक्षादान दिया जाता है. यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों में सबसे खास बात यह है कि सभी बच्चे व टीम के सदस्य अपने-अपने जन्मदिन पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के लिए “Selfie with tree” अभियान के तहत पौधारोपण करते हैं.
Share this

आपके पास वर्कर से सम्बंधित कोई जानकारी, लेख या प्रेरणादायक संघर्ष की कहानी है जो आप हम सभी के साथ share करना चाहते हैं तो हमें Email करें – [email protected]

WorkerVoice.in को सुचारु रूप से चलाने के लिए नीचे Pay बटन पर क्लिक कर आर्थिक मदद करें-

Leave a Comment