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    3 महीने के दुधमुहें बच्ची से बलात्कार के दोषी को 23 दिन में फांसी की सजा, क्या कहा जज ने


    हम एक ऐसे समाज का हिस्सा, जहां मात्र 3 महीने के बच्चे के साथ भी बलात्कार की घटना को भी अंजाम दिया जाता है. उससे भी शर्म की बात यह है कि इस घटना को उसके परिवार का ही एक सदस्य अंजाम देता है. जानकारी के अनुसार इंदौर के राजबाड़ा के मुख्य गेट के पास ओटले पर माता-पिता के बीच सोई तीन माह की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले कोर्ट ने दोषी नवीन उर्फ अजय गड़के को फांसी की सजा सुनाई है. इस केस की सुनवाई जज वर्षा शर्मा ने मात्र 21 दिन में पूरी कर इतिहास रच दिया है. हम तो कहते हैं कि काश उनकी ही तरह ही बाकी जज और प्रशासन की सोच बन पाती तो शायद इस समाज से इस तरह का कुछ तो कचरा साफ होता.

    3 महीने के दुधमुहें बच्ची से बलात्कार के दोषी को 23 दिन में फांसी की सजा

    दैनिक भाष्कर के रिपोर्ट के अनुसार बच्ची के साथ 20 अप्रैल को दुष्कर्म किया गया था.  जज ने 7 दिन तक सात-सात घंटे इस केस को सुना और घटना के 21वें दिन सुनवाई पूरी होने के बाद 23वें दिन शनिवार को फैसला सुनाया. इस मामले में अदालत ने घटना को रेअर टू रेअरेस्ट मानते हुए आरोपी को दोहरी फांसी की सजा सुनाई. कोर्ट ने रेप के मामले में धारा 376 (क) के तहत फांसी की सजा, हत्या के मामले में धारा 302 के तहत फांसी की सजा और पांच हजार रुपए जुर्माना लगाया. अन्य धाराओं में पांच साल से उम्रकैद तक की सजा सुनाई गई.

    आखिर क्या है ये मामला 

    इस घटना के बारे में बताया जा रहा है कि बच्ची अपने माता-पिता के साथ सो रही थी. तभी उनके साथ सोया पीड़ित बच्ची का मौसा नवीन उर्फ अजय गड़के ने बच्ची को उठाकर श्रीनाथ पैलेस बिल्डिंग के बेसमेंट में ले गया था, जहां उसके साथ 15 मिनट तक दुष्कर्म किया. फिर बिल्डिंग की छत से फेंककर उसकी हत्या कर दी.

    केंद्र सरकार ने पॉस्को कानून 

    अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने पॉस्को कानून में संशोधन कर 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार करने वालों के खिलाफ मौत की सजा के कानून को मंजूरी दी थी. नए कानून के तहत अब यदि बलात्कार के मामले में लड़की की आयु 12 साल से कम होगी, तो बलात्कारी को मौत की सजा होगी. पुराने कानून के मुताबिक, पॉक्सो कानून के तहत जघन्य अपराध के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद थी. जबकि न्यूनतम सात साल की सजा का प्रावधान था. दिसंबर 2012 के निर्भया गैंगरेप मामले के बाद कानून में संशोधन किया गया था.

    क्या कहा जज ने 

    अपर सत्र न्यायाधीश वर्षा शर्मा ने कहा कि अभियुक्त ने जिस तरह जघन्य और क्रूरतापूर्वक जंगली पशुवत कृत्य किया, उसे देखते हुए अपराधी को अधिकतम दंड दिया जाना उचित है, ताकि समाज में ऐसे कृत्य की पुनरावृत्ति न हो. यह घटना एक व्यक्ति पर हमला नहीं है बल्कि पूरे समाज के विरुद्ध किया गया कृत्य है. कोर्ट ने माना कि ज्यादती और हत्या की घटनाओं में वृद्धि हो रही है. इस तरह के वातावरण में महिलाएं, बालिकाएं खुद को अत्यंत असुरक्षित महसूस कर रही हैं. इसके आगे जज साहिबा ने कहा, कि मात्र 3 माह की बच्ची जो केवल रोने मुस्कुराने के आलावा कुछ नहीं जानती थी. उसके साथ दुष्कर्म करने वाला समाज में गैंगरीन की तरह है. उसे समाज से अलग कर देना जरुरी है.

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