HSSC Scam – पैसे लेकर नौकरी में चयन करने वाले गिरोह का पर्दाफास

हरियाणा में पैसे लेकर नौकरी देने वाले एक गिरोह का पर्दाफास हुआ है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसका आरोप किसी और पर नहीं बल्कि कुछ अधिकारियों पर लगा है. जानकारी के अनुसार HSSC हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन में पैसे लेकर नौकरी के लिए चयनित कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है. विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए रिश्वत लेकर रिजल्ट (डाटा) में हेरफेर करने में संलिप्त आयोग की गोपनीय शाखा (सीक्रेट ब्रांच) के कर्मचारियों व अन्य समेत आठ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. सीएम उड़नदस्ते को इसकी शिकायतें मिल रही थीं.

HSSC Scam -पैसे लेकर नौकरी में चयन करने वाले गिरोह का पर्दाफास

इसके बारे में एनडीटीवी ने लिखा है कि ‘सरकारी नौकरी में चयन कराने के लिए वह उम्मीदवारों से धन लेते हैं. स्क्वायड ने कुछ गिरफ्तारियां भी की हैं’. जबकि अमर उजाला के खबर के अनुसार इस पूरे खेल में शामिल सुभाष पराशर अधीक्षक, रोहताश शर्मा सहायक, सुखविंद्र सिंह सहायक, अनिल शर्मा सहायक, पुनीत सैनी आईटी सैल में अनुबंध कर्मचारी के साथ ही कर्मचारी चयन आयोग को पूर्व में कंपनी के माध्यम से अनुबंध पर कंपनी के माध्यम से कर्मचारी उपलब्ध कराने वाले धर्मेंद्र सहित बलवान सिंह लिपिक हुडा व सुरेंद्र कुमार सहायक सिंचाई विभाग को गिरफ्तार किया है. पंचकूला पुलिस ने सेक्टर-पांच थाने में मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है.

आठ लोगों को हिरासत में

इन सभी आठ आरोपियों पर विभिन्न पदों पर नियुक्तियों के लिए दस्तावेजों में फेरबदल, कंप्यूटर डाटा में छेड़छाड़ और बिचौलियों की मदद से नौकरी दिलवाने के नाम पर रिश्वत लेने के भी आरोप हैं. सभी से पुलिस पूछताछ कर रही है. जांच टीम के अनुसार HSSC की सीक्रेट ब्रांच को लेकर पहले भी शिकायतें मिल चुकी हैं. मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे, जिसके तहत वीरवार को सर्च के बाद आठ लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है.
इसके बाद पंजाब केसरी के खबर के अनुसार कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता व विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एचएसएससी कार्यालय में नौकरियों के गोल-माल में मनोहर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सीएम के मनोनीत कर्मचारी ने प्रदेश के बेरोजगारों को नौकरी बेची हैं. सुरजेवाला ने कहा कि इस घोटाले में कर्मचारी आयोग के चेयरमैन और सदस्य भी शामिल हैं. प्रदेश के मुख्यमंत्री से सवाल करते हुए रणदीप ने कहा कि इस नोकरी घोटाले को एक साल तक रोकने की कोशिश क्यों नहीं की  आखिर 9 महीने तक मुख्यमंत्री ने क्यों चुप्पी साधे रखी.
उन्होंने यह तक कहा कि मुख्यमंत्री को स्पष्टीकरण देना चाहिए सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर केस दर्ज कर मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं. इस विषय पर हाइकोर्ट के दो सिटींग जजों से जांच करवाई जानी चाहिए. कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन और सदस्यों को तुरंत हटा दिया जाना चाहिए. उन्होंने मांग उठाई कि चेयरमैन और सदस्यों के नाम भी पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में शामिल किए जाए.

इसका हर्ष व्यापम घोटाले की तरह हो जायेगा?

इनलोगों ने विभिन्न पदों के लिए रेट तय कर रखे थे. जिसके अनुसार ड्राइवर- 3 लाख से 4 लाख, क्लर्क- 4 लाख से 5 लाख, क्लर्क (जनरल)- 10 लाख, ग्रिड ऑपरेटर- 6 लाख, टाइपिंग टेस्ट -7 लाख रुपए, कंडक्टर भर्ती- 3 लाख है. अब ऐसे में कल चाहे इसका अंजाम जो भी यो मगर यह सरासर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है. एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि इस गिरोह के मार्फ़त जिनकी नौकरी मिली, क्या उनतक भी जांच टीम पहुंच पायेगी या इसका हर्ष व्यापम घोटाले की तरह हो जायेगा.
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