IRCTC रेलनीर दानापुर के कर्मचारी हड़ताल पर, बकाया मांगा तो नौकरी से निकाला

IRCTC रेलनीर दानापुर के कर्मचारी रेलवे कैटरिंग एण्ड टुरिज्म वर्कर्स यूनियन (सीटू) के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर कल से हड़ताल पर चले गए है. इससे पहले भी नौकरी से निकाले जाने के विरोध में पिछले वर्ष 3 दिसम्बर 2017 से पुरे एक महीने तक हड़ताल पर ही नहीं रहें बल्कि फैक्टी में काम भी बंद करवा दिया था. जिसके बाद कम्पनी प्रबंधन ने झुकते हुए सभी वर्करों की नौकरी बहाल कर काम शुरू करबाया था. उसी समय सभी कर्मचारियों ने अपनी एकता बनाते हुए, प्लांट में सीटू बिहार के नेतृत्व में यूनियन का गठन भी किया था.

IRCTC रेलनीर दानापुर के कर्मचारी हड़ताल पर

जानकारी के लिए बता दें कि रेल मंत्रालय के उपक्रम इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिजम कॉर्पोरेशन के बिहार की राजधानी पटना से सटे दानापुर में रेलनीर का प्लांट हैं. इस प्लांट की स्थापना सन 2014 में ट्रेनों और स्टेशनों पर शुद्ध पेय जल की आपूर्ति के लिए कई गई थी. रेलवे मिनीरत्न कंपनी आईआरसीटीसी के इस प्लांट में लगभग 80 आउटसोर्स कर्मचारी और 40 ऑपरेटर कार्यरत हैं. जिनके बदौलत ही कम्पनी रेलनीर का सप्लाई पुरे बिहार से लेकर हाबड़ा और सियालदह तक करती है. इसके वारे में कर्मचारी नेता सोनू कुमार ने बताया कि वैसे तो हमें परमानेंट के तरह नियुक्त किया था मगर बिना बताये आउटसोर्स वर्कर बना दिया.

गुड़िया देवी महिला होने के कारण नौकरी से निकाला

इस सन्दर्भ में रेलवे कैटरिंग एण्ड टुरिज्म वर्कर्स यूनियन ने क्षेत्रीय श्रमायुक्त, भारत सरकार, मौर्य काम्प्लेक्स, पटना को एक महीने के सैलरी भुगतान नहीं करने की शिकायत की गई है. ऑल इंडियन रेलवे कामगार यूनियन के अध्यक्ष निशिकांत ने बताया कि आईआरसीटीसी रेलनीर संयत्र प्रबंधक से सभी कर्मचारियों के लिखित बकाये राशि की मांग करने गए तो वो अभद्रता से पेश आते हुए, ब्यौरा साईट इंचार्ज के मार्फ़त देने को कहा.
इसके बाद उन्होंने ब्यौरा उनको और साइट इंचार्ज दोनों को ईमेल के द्वारा भेजा तो न केवल उनको काम करने से रोक दिया बल्कि साइट इंचार्ज के द्वारा उनके साथ गाली गलौज भी किया गया. इतना ही नहीं बल्कि एक महिला कर्मचारी गुड़िया देवी जो कि पिछले पांच साल से कार्यरत थी. उनको यह कहते हुए नौकरी से निकाल दिया कि यहां महिला का काम नहीं हैं. जिसके विरोध में सभी कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार किया है.

 अपने बकाया वेतन 9 लाख रुपया मांगा तो नौकरी से निकाला

इस सन्दर्भ में कर्मचारी सोनू कुमार ने बताया कि मैनजेमेंट हड़ताल के बाद हमारे नेता को वापस रखने के लिए राजी हो गया है. मगर हमने साफ़ कह दिया है कि हमें हमारा बकाया भुगतान लगभग 9 लाख रुपया है, वह दिया जाए तभी काम शुरू होगा. जिसपर प्रबंधन ने हमें बिल का डिटेल की मांग की है. उन्होंने कहा कि प्रबंधन जल्द से जल्द इन बातों का सज्ञान लेकर हमें भारत सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन, पीएफ, बोनस आदि कि सुविधा दे. नहीं तो काम ठप्प रहेगा, और फैक्टी के नुकसान का जिम्मेवारी कम्पनी प्रबंधन को होगी.

आईआरसीटीसी एम्प्लाइज यूनियन के महासचिव सुरजीत श्यामल ने कहा कि आईआरसीटी का यह पुराना रवैया है कि जब कर्मचारी यूनाइट होकर अपना हक मांगता है तो पहले लीडर को निशाना बनाया जाता है फिर अगर कमर्चारी चुप रह गया तो फिर एक-एक कर सबको निकाल देतें हैं. मगर बिहार के साथियों ने एकता के साथ मैनेजमेंट का मुंहतोड़ जबाब दिया है. हम शोषण के इस लड़ाई में सदैव उनके साथ है और मैनेजमेंट से मांग करते हैं कि जल्द-से-जल्द उनके जायज मांग को पूरा किया जाए.

उन्होंने आगे बताया कि आईआरसीटी सेंट्रल गोवेर्मेंट के अंतर्गत आता है. रेलनीर और पटना आईआरसीटी के अन्य कंपनियों का देखरेख ईस्ट जोन कलकत्ता से ही किया जाता है. इस अनुसार सभी बिहार में काम करने वाले आईआरसीटी कर्मचारियों को Central Government India के 1 अप्रैल 2018 ने नोटिफिकेशन के अनुसार अकुशल कर्मियों का न्यूनतम वेतन – 642/- अर्ध-कुशल कर्मियों के 494/- कुशल कर्मचारियों के लिये 520/- अत्यधिक कुशल यानि स्नातक 572/- मिलना चाहिए. जबकि आईआरसीटी मात्र 448 रुपया प्रति दिन के हिसाब से भुगतान कर धोखा कर रही है.

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1 thought on “IRCTC रेलनीर दानापुर के कर्मचारी हड़ताल पर, बकाया मांगा तो नौकरी से निकाला”

  1. यूनिटी ही इनकी असली ताकत है और जब तक ये एकजुट रहेंगे इनका बाल भी बाका न मोदी कर पायेगा और न ही कोई कॉर्पोरेट।

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