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    Labour Court में Reference का Process क्या है, जब Settlement Fail हो जाए


    जब आपको नौकरी से Termination या किसी अन्य मैटर में आईडी एक्ट के अंडर “Labour Court में Reference का Process क्या है, जब Settlement Fail हो जाए". इसमें कितना टाइम लगता हैं, आप कैसे अपने केस को जल्दी Reference करा सकते हैं. इसके आलावा भी बहुत सारे सवालों का जवाब आपको हमारे इस पोस्ट के माध्यम से मिलेगा.

    लेबर कोर्ट कैसे जाएं| Labour Court Kaise jayen?

    किसी भी कर्मचारी के लिए जॉब का बड़ा ही महत्व होता हैं. अब भले ही चाहे तो किसी सरकार विभाग में ठेका, आउटसोर्स आदि के तहत काम करते या फिर किसी प्राइवेट कंपनी आदि में काम करते हों . इसका एकमात्र कारण हैं, पैसा. आज हर किसी को जीवन जीने, बच्चों को पढ़ाने और लाइफ में कुछ भी करने के लिए पैसे की जरुरत होती हैं. जो कि पैसे से संभव हैं. जो पैसा जॉब या व्यवसाय से ही कमाया जा सकता हैं. मगर किसी को जॉब से निकाल दिया जाता हैं तो यह उसके लिए काफी तकलीफ दायक पल होता हैं. ऐसे समय में कुछ कमजोर लोग तो डेप्रेशन में चले जाते हैं, कई तो कुछ गलत कदम भी उठा लेते. जिसके बारे में पहले से ही बोलते आया कि यह गलत हैं. कोई भी ऐसा न करें. मगर उसी में से कुछ लोग उसको चुनौती देने लेबर कोर्ट पहुंच जाते हैं.

    Labour Court Me Shikayat Kaise Karen | कंपनी अगर आपको नौकरी से निकाले तो

    इसके बारे में पहले भी हमने कई आर्टिकल के माध्यम से जानकारी दी हैं. जिसमें से कि "Labour Court Me Shikayat Kaise Karen | कंपनी अगर आपको नौकरी से निकाले तो" में बहुत ही उपयोगी जानकारी दी गई हैं. अगर आपने इसको नहीं पढ़ा तो हमारे इस पोस्ट को पढ़ने से पहले उसको जरूर पढ़ें. हम दाबे के साथ कह सकते हैं कि वर्कर के मामले में आपको इतना डिटेल में कहीं और पढ़ने को नहीं मिलेगा. अब जैसा कि हमने बताया कि अगर लेबर कमिश्नर ऑफिस में आपके केस में सेटमेंट फेल हो जाए तो उसके बाद का प्रोसेस क्या हैं. इसको स्टेप बाई स्टेप जानते हैं.

    Labour Court में Reference Process Step by Step in Hindi

    आप जैसे ही लेबर कमिश्नर ऑफिस में शिकायत लगाते हैं वैसे ही वह आपके कंपनी को नोटिस कर बुलाता हैं. जिसकी जानकारी आपको भी एक पत्र के माध्यम से दी जाती हैं.  इस मैटर में ALC समझौता करने की भरपूर कोशिश करता हैं. अगर जब मामले में समझौता नहीं हो पता तो इसी प्रक्रिया को सेटलमेंट फेल (Settlement Fail) कहते हैं. जिसके बाद आपको आपके अनुरोध पर वही एक सर्टिफिकेट दे दिया जाता हैं या फिर मामले के Labour Court में Reference के लिए लेबर मिनिस्ट्री भेज दिया जाता हैं.

    जब लेबर मिनिस्ट्री में जो रिपोर्ट भेजा जाता हैं. वह दो पार्ट में होता हैं. जिसका पार्ट -1 का कॉपी आपको भी भेजा जाता हैं. जिसको "FOC" (Failure of Cancellation) कहते हैं. इस FOC रिपोर्ट में वो आपके विवाद (Dispute) के बारे में लिखते हुआ आगे के करवाई का अनुरोध करते हैं. इस FOC को सम्बंधित हेल्प डेस्क, लेबर मिनिस्ट्री को भेजा जाता हैं. आपको इसका कॉपी ऐसे तो डाक से भेजा जाता हैं मगर कभी-कभी कुछ समय बाद आकर ले जाने के लिए भी बोलते हैं.


    अगर आप किसी राज्य सरकार के अंडर किसी विभाग में या फिर किसी प्राइवेट कंपनी, फैक्ट्री आदि में कार्यरत है तो आपका मामला राज्य के लेबर कमिश्नर ऑफिस ले लगाया जायेगा और अगर सेन्ट्रल गवर्नमेंट के लिए रीजिनल लेबर कमिश्नर (सेन्ट्रल) ऑफिस में चलेगा. मगर आईडी एक्ट के अनुसार प्रोसेस एक ही होगा. इसमें घबराने की कोई बात नहीं हैं. अगर हमें सही Process पता हो तो काफी भागदौड़ की बचत हो जाती हैं.

    अब जैसे ही आपका FOC लेबर मिनिस्ट्री में सम्बंधित अधिकारी को पहुँचता हैं. वैसे ही वो उसके बारे में आपके एम्प्लायर के बारे में सम्बंधित मंत्रालय को नोटिस कर दुबारा से आपके मैटर पर कमेंट मांगते हैं. इस मामले में 30 दिन का समय दिया जाता हैं. जिसको नोटिस पीरियड बोला जाता हैं. इस दौरान जवाब आये तो और जबाव नहीं आये तो आगे का Process चलाया जाता हैं.

    अब वह विभाग यह देखता है कि आपका लेबर कोर्ट में रेफेरस के लिए भेजा जाए या नहीं. ऐसे कई बार तो वो कई केस में मना कर देते हैं. मगर जयादातर मामले में सम्बंधित लेबर कोर्ट में रेफेर कर दिया जाता हैं. ऐसे ही कुछ यूपी के नावार्ड के ठेका वर्करों के साथ हुआ था. उनको सेन्ट्रल गवर्नमेंट के अंतर्गत लेबर मिनिस्ट्री ने गैरकानूनी टर्मिनेशन के मामले में रेफेरेंस से मना कर दिया था. जिसको उनलोगों ने हार नहीं मानते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दिया. ऐसे समय तो काफी लगा मगर उन वर्करों की जीत हुई. माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेफेरेंस का आर्डर देते हुए कहा कि "आपको केवल Administrative Right हैं Judicial नहीं". उसके बाद उनलोगो का केस अभी CGIT में चल रहा हैं.


    अब आपका सवाल होगा कि Labour Court में Reference होने में कम से कम कितना दिन लगता हैं? ऐसे तो पहले 10-10 साल लग जाया करता था. मगर अब लगभग 6-7 महीने में हो जाता है. ऐसे ऊपरी समय सीमा कुछ भी निर्धारित नहीं हैं. अगर आप भागदौड़ करने के लिए तैयार हैं तो आपको जब FOC मिलता है तो  उसके लगभग एक महीने यानी नोटिस पीरियड के बाद सम्बंधित अधिकारी से मिल सकते है. उनसे अपनी मज़बूरी और प्रॉब्लम का हवाला देकर थोड़ा जल्दी रेफरन्स का Request कर सकते हैं. अगर वो अधिकारी मान गए तो हो सकता हैं कि आपका काम 6 महीने के बदले 4 महीने में हो जाए. इससे कुछ समय की बचत हो जायेगा.

    अब आपका सवाल होगा कि संबधित अधिकारी का पता कहां से मिलेगा. इसके लिए आप अपने FOC में उस अधिकारी का पता देख सकते हैं. आपका FOC उन्ही के पास भेजा जाता हैं.

    Labour Court में Reference का Process क्या है, जब Settlement Fail हो जाए



    इसके बाद जब आपका मैटर Labour Court में Reference होगा तो आपको पत्र के द्वारा सुचना दी जाती हैं कि आपका मैटर फलाना Labour Court में Reference कर दिया गया हैं. आप अपना क्लेम 15 दिन के अंदर वहां लगायें. इस तरह आपका मैटर लेबर कोर्ट रेफरन्स हो जाता हैं.

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    1 comment:

    1. Sir,
      Mein Jharkhand ka rahne wala hun aur mein ne Bulandshahr, U.P me ek private company me 5 month tak job kiye. Actually company central govt. ka project kar rahi hai. But mein ne two month before hi without resignation job quit kar diya. Abhi mujhe company ne absconding letter by post bheja hai. Mein ne reply kar diya us letter ka sath hi resignation mail bhi. Aur by mail handover documents bhi send kar diya hun. Lekin ab company full & final Settlement nahi de raha hai. Aur 5 month tak job karne ke baad bhi mujhe appointment letter nahi diya. Lekin mere pass offer letter, salary slip aur bank account ka statement hai. Company ke against legal action kaise lein aur mein abhi jharkhand me hun. Kya mein yahan legal action le sakta hu.

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