केजरीवाल जी, गेस्ट टीचर्स का विभागीय परीक्षा लेकर नियमित क्यों नहीं करते?

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा ने शुक्रवार को सरकारी स्कूलों में आने वाले समय में स्थायी और अतिथि शिक्षकों की भर्ती में दिल्ली के विश्वविद्यालयों से पास होने वालों को 85 फीसद आरक्षण संबंधी प्रस्ताव पारित किया. हालांकि, प्रस्ताव पर जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह प्रावधान वर्तमान में 9500 पदों पर की जा रही गेस्ट टीचर्स की भर्ती में लागू नहीं हो पाएगा क्योंकि इसके लिए भर्ती नियमों में बदलाव की जरूरत है, जोकि एक लंबी प्रक्रिया है.

गेस्ट टीचर्स का विभागीय परीक्षा

कल विधानसभा की ओर से पारित संकल्प में कहा गया है, ‘आसपास के राज्यों के अभ्यर्थियों में दिल्ली में शिक्षक के पदों पर भर्ती को लेकर गहरी रुचि के कारण स्थानीय अभ्यर्थियों को काफी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है. साथ ही दिल्ली के विश्वविद्यालयों के अकादमिक मानक कड़े हैं जिससे दिल्ली से पास विद्यार्थियों का ग्रेड अन्य राज्यों की तुलना में कम होता है. इससे दिल्ली के लोगों को शिक्षा निदेशालय द्वारा की जाने वाली शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियों में घाटा होता है.
इन बातों को मध्यनजर रखते हुए, भविष्य में इन पदों पर नियुक्तियां खुले आवेदन और योग्यता के आधार पर हों और दिल्ली के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता मिले. सदन का संकल्प है कि शिक्षा निदेशालय दिल्ली से पास सभी अभ्यर्थियों को भविष्य में होने वाली स्थायी और अतिथि शिक्षकों की भर्तियों में 85 फीसद आरक्षण मिले’. उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए भर्ती नियमों में बदलाव लाने पड़ेंगे, चाहे स्थायी भर्ती की बात हो या अतिथि शिक्षकों की भर्ती की.
सिसोदिया के मुताबिक, सरकार यह बदलाव लाएगी लेकिन यह एक लंबी प्रक्रिया है, इसलिए इसे अभी की जा रही 9500 अतिथि शिक्षकों की भर्ती में लागू नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों की नियुक्ति को टाला भी नहीं जा सकता क्योंकि 9000 अतिरिक्त कक्षाएं बन चुकी हैं जिसके लिए शिक्षकों की जरूरत है.
सिसोदिया ने कहा कि 9500 अतिथि शिक्षकों के पदों के लिए लगभग डेढ़ लाख आवेदन आए हैं इनमें भारी संख्या में दिल्ली के बाहर के डिग्रीधारी हैं. टीजीटी के लिए लगभग 67 हजार आवेदनों में से 31 हजार दिल्ली के स्नातक हैं, वहीं पीजीटी के लिए लगभग 73 हजार आवेदनों में से 2500 आवेदन दिल्ली से स्नातकोत्तर करने वालों के हैं.

 क्या हुआ तेरा वादा ?

आपको याद दिला दें कि ठेका वर्कर को मुद्दा बनाकर सत्ता में आयी केजरीवाल सरकार ने अक्टूबर 2016 में दिल्ली में संविदा पर काम कर रहे हजारों कर्मचारियों को नियमित करने के लिए सभी विभागों से ऐसे कर्मचारियों को नियमित करने के लिए 15 नबंवर तक प्रस्ताव दाखिल करने को कहा था. दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों में करीब 50,000 कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा दिल्ली के सरकारी स्कूलों में करीब 16,000 अतिथि शिक्षक हैं. इसके आलावा संविदा पर काम कर रहे इन कर्मचारियों में नर्स से लेकर सफाई कर्मचारी तक शामिल हैं. जिनको परमानेंट करने कि बात चल रही थी.

अब अचानक उन्ही पदों के लिए भर्ती निकाला जाना क्या न्योचित होगा? जिनपर पहले से कर्मचारी ठेका पर काम कर रहे है. हाँ जो पहले से काम कर रहे है उनको उम्र सीमा में छूट और सेवा के आधार पर कुछ पॉइंट्स का प्रावधान रखा गया है. जिसका विरोध करने के करने के बजाए वर्करों ने और ज्यादा  पॉइंट्स दिए जाने कि मांग की. इससे सरकार को समझ आ गया कि उन्होंने वर्करों का ध्यान चुनावी वादों से हटाने में सफल हो गए. अब चाहे वेटेज की बात हो या स्थायी और अतिथि शिक्षकों की भर्ती में दिल्ली के विश्वविद्यालयों से पास होने वालों को 85 फीसद आरक्षण संबंधी प्रस्ताव, यह केवल केजरीवाल सरकार  द्वारा ठेका वर्कर को नियमित करने के वादों को ढंकने का प्रयास मात्र है.

इतना तो तय है कई अपना यह चुनावी वादा पूरा करने में अभी तक पूरी तरह नाकाम रहें है. मगर वर्कर कैसे भूल गए कि जैसे ही भर्ती कर इनके कर्मचारी आ जायेंगे वैसे ही उनको काम से बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा. यह 100% सत्य है कि यह भर्ती परीक्षा उनको नौकरी से बाहर का रास्ता दिखने के लिए ही आयोजित हो रही है.

अगर ऐसा नहीं तो आप ही सोचें कि पिछले 8-10 वर्षों से आप स्कुल में बच्चों को ABCD…. 1234… या उनको पाठ्य पुस्तक के पाठ्यकर्म पढ़ा रहे है. मगर आपसे पूछे जाने वाले सवाल इस का इस से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं होगा. इससे भी बड़ी बात कि आपका मुकाबला अभी के पासआउट स्टूडेंट्स के साथ होगा. जो कि आपसे ज्यादा अपटुडेट होंगे. जबकि आपके प्रतियोगिता परीक्षा का किताब छोड़े 8-10 वर्ष बीत चुकें. ऐसे में क्या आपको नहीं लगता कि आपकी मांग विभागीय परीक्षा लेकर आपको नियमित किया जाना होना चाहिए.? सोचियेगा….

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