• Breaking News

    जनहित याचिका: मांगा समान काम का समान वेतन, मिला नया न्यूनतम वेतन


    नई दिल्ली: श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने अप्रैल 2016 में हैदराबाद में बताया कि केंद्र सरकार श्रम कानूनों में सुधार करने और न्यूनतम मजदूरी से समान मजदूरी की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार ठेका मजदूरी (नियमन और उन्मूलन) केंद्रीय कानून के 25वें कानून में संशोधन करने जा रही है. इस संशोधन से हर ठेका मजदूर को हर महीने 10 हजार रुपये मिल सकेंगे. इस संबंध में कानून भी मंजूरी के लिए कानून मंत्रालय के पास भेज दिया गया है. इसकी पुष्टी न्यूज 18Patrika News, Amar Ujala The Hindu  व् नवभारत टाइम्स ने की है.


    इसके बाद दिनांक 11 मई 2017 को दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि सभी कॉन्ट्रैक्ट वर्करों के लिए कम से कम न्यूनतम वेतन का प्रावधान है. माननीय कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के मंहगाई में न्यूनतम वेतन का 10 से 13 हजार में किसी परिवार का गुजरा कैसे हो सकता है. आज पुरे देश में निजीकरण का दौर में ठेका वर्कर रेगुलर वर्कर के बराबर काम नहीं बल्कि रेगुलर वर्कर का ही काम कर रहे है. इतने काम सैलरी में वर्करों से काम करवाना गुलामी करवाने जैसा ही है.

    इसको भी पढ़ें- ठेका वर्कर रेगुलर वर्कर के बराबर काम ही नहीं, बल्कि रेगुलर वर्कर का ही काम कर रहे: हाईकोर्ट

    माननीय कोर्ट ने याचिकाकर्ता श्री सुरजीत श्यामल के दलील को सही मानते हुए अपना राय देते हुए कहा कि अनुबंध के कर्मचारियों को धारा 21 के अनुच्छेद 14 तहत समानता के तहत समान काम का समान वेतन पाने का अधिकार है. उक्त आर्डर को उपलोड करने के लिए यहां क्लिक करें.

    हालाँकि याचिकाकर्ता ने देश के विभिन्न सरकारी संस्थानों में रेगुलर वर्कर के समान काम कर रहे ठेका/आउटसोर्स वर्कर के लिए समान काम का समान वेतन को लागु करवाने के लिए भारत सरकार को गाइडलाइन बनाने का निर्देश दें. मगर माननीय कोर्ट ने साफ इंकार करते हुए कहा कि इतने व्यापक पैमाने पर भारत सरकार के ऊपर समान काम का समान वेतन को लागु करने के लिए दबाब नहीं बनाया जा सकता है.


    मगर सूत्रों के मुताबिक इसके बाद माननीय कोर्ट कि टिप्पणी को आड़े हाथों लेते हुए, मोदी सरकार ने तुरंत ही अपने पिछले अप्रैल में लिए फैसला बदल दिया. जिसमे न्यूनतम वेतन 10 हजार करने का निर्णय लिया गया था. इसके बाद केंद्र सरकार के अंतर्गत कार्य कर कॉट्रैक्ट/ठेका वर्कर के लिए नया न्यूनतम वेतन लागु कर दिया. जिसके तहत दिनांक 28 मई 2017 अधिसूचना जारी किया गया. हालांकि इसका लाभ 20 अप्रैल 2017 मिलेगा. जिसके तहत अकुशल कर्मियों का न्यूनतम वेतन 13,936 अर्ध-कुशल कर्मियों के 15418 कुशल कर्मचारियों के लिये 16978 अत्यधिक कुशल यानि स्नातक 18460 हो गया है.


    इसको भी पढ़ें- ब्रेकिंग न्यूज़: केंद्र सरकार ने न्यूनतम वेतन में किया बढ़ोतरी, यहाँ से सर्कुलर डाउनलोड करें

    जानकारी के लिए बता दें कि यह जनहित याचिका में केंद्र सरकार के अंतर्गत सभी विभागों के कॉन्ट्रैक्ट/ठेका वर्कर के लिए समान काम का समान वेतन का मांग किया गया था. मगर केंद्र सरकार ने जो बढ़ोतरी की है, वह मात्र कुछ समय के लिए ही राहत देने वाला है. अगर यह भी पूर्वरूप से लागु हो जाये वह बहुत बड़ी बात है. इसके बाद मजदूर बर्ग में काफी उत्साह देखने को मिला है. अब कोर्ट आर्डर की कॉपी प्राप्त करने के बाद "समान काम का समान वेतन" को लागु कराने के लिए पुनरीक्षण याचिका फाईल करने के लिए विचार किया जा रहा है.

    10 comments:

    1. अगर कोई सरकारी संस्था मे स्थाई प्रकृति का कार्य ठेका प्रथा से लिया जा रहा। लेकिन उक्त ठेका श्रमिकों का सेवा शर्त,वेतन,भत्ता आदि का निर्धारण मूल नियोजक के द्वारा संबंधित श्रमिक संघो के साथ सीधा समझौते के माध्यम से समय समय पर किया जाता है। ठेकेदार किसी भी समझौता मे पक्षकार नही रहा है। तथा समझौता के माध्यम से मूल नियोजक के द्वारा उक्त सूचीबद्ध ठेका श्रमिकों का नियोजन 60 वर्ष की आयु तक सुनिश्चित किया गया है,इसलिए ठेकेदार के परिवर्तन पर भी श्रमिकों का परिवर्तन नही होता है । 60 वर्ष की आयु पूर्ण करनेवाले को सेवानिवृत्ति की सूचना ठेकेदार नही मूल नियोजक के द्वारा दिया जाता है। तो वैसे 30-35 वर्षों से लागातार कार्यरत ठेका श्रमिक सेवानिवृत्ति के उपरांत ग्रेच्युटी की राशि का भुगतान पाने के हकदार है या नही। अगर है तो भुगतान के लिये उत्तरदायी कौन होगा ठेकेदार या मूल नियोजक ।

      ReplyDelete
    2. अगर कोई सरकारी संस्था मे स्थाई प्रकृति का कार्य ठेका प्रथा से लिया जा रहा। लेकिन उक्त ठेका श्रमिकों का सेवा शर्त,वेतन,भत्ता आदि का निर्धारण मूल नियोजक के द्वारा संबंधित श्रमिक संघो के साथ सीधा समझौते के माध्यम से समय समय पर किया जाता है। ठेकेदार किसी भी समझौता मे पक्षकार नही रहा है। तथा समझौता के माध्यम से मूल नियोजक के द्वारा उक्त सूचीबद्ध ठेका श्रमिकों का नियोजन 60 वर्ष की आयु तक सुनिश्चित किया गया है,इसलिए ठेकेदार के परिवर्तन पर भी श्रमिकों का परिवर्तन नही होता है । 60 वर्ष की आयु पूर्ण करनेवाले को सेवानिवृत्ति की सूचना ठेकेदार नही मूल नियोजक के द्वारा दिया जाता है। तो वैसे 30-35 वर्षों से लागातार कार्यरत ठेका श्रमिक सेवानिवृत्ति के उपरांत ग्रेच्युटी की राशि का भुगतान पाने के हकदार है या नही। अगर है तो भुगतान के लिये उत्तरदायी कौन होगा ठेकेदार या मूल नियोजक ।

      ReplyDelete
    3. भरत यादव जी बहुत बढ़िया सवाल पूछा है आपने. सबसे पहले आपको हमारा ब्लॉग पढ़ने के लिए शुभकामनाएं. आपने बताया कि आपके यानी वर्कर के यूनियन और मुख्य नियोक्ता के बीच एग्रीमेंट (समझौता) हो रखा है. इसके लिए पहले आपको समझौता का शर्त जानते अतिआवश्यक है. ऐसे कांटेक्ट वर्कर के वेतन, भुगतान,शार्ट पेमेंट, छुट्टी, ग्रेच्युटी आदि के लिए ठेकेदार उत्तरदायी होता है मगर न देने के स्थिति में अभी तक के कानून के मुताबिक सीधे मुख्य नियोक्ता की जबाबदेही है कि वह भुगतान करें. इसके लिए अच्छा होगा कि आप अपने यूनियन पदाधिकारी से समझौता की शर्त जान लें और अगर सम्भव हो तो उनके माध्यम से ही अपनी बात नियोक्ता के पास रखें. आपके यहाँ कम से कम यूनियन और वर्कर के यूनिटी के कारण आपलोगों का जॉब सिक्योर है, नही तो ठेका वर्कर का हाल बहुत बुरा है. ऐसे ग्रेच्युटी कानून के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमारा यह लेख पढ़ सकते हैं - http://www.workervoice.in/2017/10/What-is-gratuity-its-calculation.html?m=1

      ReplyDelete
    4. उम्मीद करूंगा कि आप हमारी बात से सहमत होंगे और इसका लाभ उठायेगे.वर्कर से जुड़े सभी जानकारी और खबर को इस ब्लॉग पर अपडेट करते हैं. अपने आसपास के वर्कर साथियों को इसकी जानकारी देंगे. आते रहियेगा.

      ReplyDelete
    5. Replies
      1. Sir kya aao bta skta h ki private area jaisa Hotel,companys,shopping complex ma kaam krna bla karmchariyo k liya government kya kr rhi h sarkaari karmchariyo ko 7 the pay sa achi salary mil rhi h private balo ki kb bda ge salary abi to 5,000 rupees milta h uska saath gujara ne kr skte
        Please comment me answer

        Delete
    6. Aap logo ko state government ka minimum wages se kam nhi de sakte. Agar aapko nhi den rahen to aap labour commissioner ke office me complaint kar sakte hain.

      ReplyDelete
    7. मध्यप्रदेश के सीमेंट प्लांट में वर्क कर रहा हूं लेकिन यहां अकुशल का रेट ₹296 है इसके अलावा ना ही कोई allowns diya jata है आज दिनांक 27 जून 2019 है 1 April 2019 ko sirf 12.35 rs. mahangai Bhatta diya Gaya h

      ReplyDelete
      Replies
      1. मेरे जानकारी के हिसाब से सीमेंट फैक्ट्री अगर इस (https://www.cciltd.in/) के अंडर आता है तो आपको अलग वेज मिल सकता हैं. इसके लिए आपको थोड़ा सा मेहनत करना होगा. आप पता कर लें. अगर पता चले तो हमें भी बतायें.

        Delete

    अपना कमेंट लिखें

    loading...