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    सुशासन की खुली पोल: बिहार में महिला शिक्षिका पर जानलेवा हमला

    बिहार में महिला शिक्षिका पर जानलेवा हमला

    आये दिन कुछ न कुछ खबर देखने और सुनने को मिल ही जाती है. जिसको सुनकर हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं. ऐसा ही कुछ वाकया बिहार के औरंगाबाद जिला के मुफ्सिल थाना क्षेत्र के खान गांव में हुआ. वहां के प्राथमिक विद्यालय में पदस्थापित प्रभारी नियोजित शिक्षिका शैल कुमारी को उस गांव के ही अभिमन्यु यादव पीट-पीटकर अधमरा कर दिया. जिसके बाद उनको उपचार के लिए सदर अस्पताल औरंगाबाद में भर्ती कराया गया.


    इस घटना कि जानकारी कि सुचना मिलते ही परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विजय कुमार सिंह, जिला सचिव शशि कुमार, औरंगाबाद प्रखंड अध्यक्ष मनोज कुमार एवं रफीगंज प्रभारी सुबोध कुमार ने औरंगाबाद सदर अस्पताल पहुंचे. जिसके बाद उक्त शिक्षक नेताओं ने अस्पताल से ही फोन करके उक्त घटना कि जानकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी औरंगाबाद को दी. जिसके बाद तुरंत ही डीईओ रामप्रवेश सिंह अस्पताल पहुंच गये.




    विजय कुमार सिंह ने कहा कि इस तरह की घटना काफी दु:खद है. समाज में ऐसी घटनाओं से शिक्षकों का मनोबल गिरता है और साफ शब्दों में कहा कि दोषियों पर कार्रवाई शीघ्र नहीं की गई तो संगठन आन्दोलन करने को बाध्य होगा. उन्होंने तत्काल पीड़ित शिक्षिका के इच्छानुसार स्थानांतर कि मांग भी रख दी. जिसपर डीईओ ने आश्वासन देते हुए कहा कि शीघ्र ही हर तरह के उचित कार्रवाई की जायेगी.
     

    पीड़ित शिक्षिका ने आरोप लगाया है कि कि अपने मामा के घर एक 4 साल के बच्ची आई हुई है. जो रोज स्कूल में आ जाती थी. मैने उसके परिजनों से आंगनबाड़ी केन्द्र में दाखिला कराने कि सलाह दी थी. बस इतने पर अभिमन्यु यादव आग- बबुला होकर लात-घुसे तथा लाठी से पीट दिया. सुनील कुमार बाॅबी, जिला मीडिया प्रभारी परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ, औरंगाबाद ने बताया कि आरोपी व्यक्ति पर एफआईआर दर्ज किया जा चूका है.


    यह तो केवल एक पक्ष कि जानकारी है. मगर फिर भी बात चाहे जो भी हो. क्या किसी महिला शिक्षिका पर इस तरह से मारपीट करना जायज है? क्या हमारा समाज और संस्कार हमें इसकी ईजाजत देता है? हम कहां जा रहे है? और भी बहुत से सवाल केवल मेरे ही नहीं बल्कि आपके मन में भी उठते होंगे. गुरु को भगवान से ऊपर का दर्जा दिया गया है. थोड़ा देर के लिए मान लें कि अगर महिला शिक्षक ने कुछ गलती की भी थी तो उनके ऊपर हाथ उठाने का अधिकार किसी का नहीं है. हमारा देश का कानून किसी को भी कानून हाथ में लेने का ईजाजत नहीं देता. इससे पता चलता है कि अपराधी को कानून का डर नहीं है. इस तरह की घटना ने बिहार सरकार के सुशासन की पोल खोल कर रख दी है.

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