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    उत्तराखंड उपनल कर्मचारियों के वेतन से पीएफ व जीएसटी के नाम पर महाघोटाला

    Uttarakhand dynasty employees pay tributes to PF and GST

    Blog: उपनल कर्मचारी महासंघ ने अपनी मांगों के पूरा नहीं होने पर आगामी 8 जनवरी 2018 से प्रदेशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है. मांग को गौर करें तो बड़ी कोई भी मांग बहुत बड़ी या मंहंगी नहीं है. दीपक चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, उपनल कर्मचारी महासंघ के अनुसार भूतपूर्व सैनिकों के लिए कल्याण के लिए बने विभाग के आड़ में लेकर सरकार राज्य के हजारों युवाओं का शोषण कर रही है. आज राज्य के हर सरकारी विभाग में आउटसोर्सिंग के नाम पर 6000-8000 रुपया महीना में कर्मचारियों का दोहन हो रहा है. इसके बाद हर कर्मचारी के ऊपर नौकरी से निकालने का खतरा हमेशा बना रहता है. अगर आप उपनल के ठेका वर्कर या आउटसोर्स वर्कर हैं तो समय निकल कर पढ़ें ही नहीं बल्कि अपने सभी साथियों को पढ़ाये भी.

    upnal outsource worker demand for statewide strike


    उपनल ने खुद को सरकारी ठेकेदार मान रहा है

    इसके बाद हमने उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) के ऑफिसियल वेबसाइट पर विजिट किया. जिसमें वर्कर से सम्बंधित जानकारियां पढ़ना शुरू किया. इसके नीचे दाई तरफ एक लिंक मिला जिसमें नये क्रामिक हेतु व्यक्तिगत समझौता (Agreement) फार्म लिखा था. जिसको क्लिक करने के बाद पढ़ने पर पता चला कि किस तरह एक सरकारी विभाग खुद ही सरकार के कानून की धज्जी उडाता है. ऐसे तो इसमें कर्मचारियों को डराने के लिए 16 पॉइंट दिया हुआ है. मगर पॉइंट नंबर 2 को गौर करें तो वेतन और अवकाश की अवधि उत्तराखंड सरकार व लेबर कमिश्नर के साथ ही साथ मुख्य नियोक्ता के अनुबंध शर्त के अनुसार होगा. इसका मतलब एक तरह से उपनल ने खुद को सरकारी ठेकेदार मान रहा है.


    उपनल खुद ही वर्कर को ठेका वर्कर करार दे रहा है. मगर एक तरफ यह भी लिख रहा है कि आप न तो ठेकेदार यानी उपनल और न ही मुख्य नियोक्ता के स्थाई वर्कर होंगे. अरे भाई आज तक प्रबंधन से सुना था कि ठेका/ओउटसोस वर्कर ठेकेदार के वर्कर होते हैं. मगर यहां तो अजीब खेल है. हमारा तो मानना है कि ऐसे मामले को कोर्ट में जाना चहिए. ऐसे मामलों में जो वर्कर 240 दिन ज्यादा से काम कर रहें उनके दोनों हाथ में लड्डू है. कल कोर्ट को दोनों में किसी का वर्कर तो मानना होगा. अब समझने की बात यह है कि ठेकेदार और मुख्य नियोक्ता दोनों सरकारी ही है.

    सरकारी विभाग में काम करने वाले सरकारी कर्मचारी के बराबर काम करते हैं कि नहीं

    अब अपने इस पोस्ट के असली मकसद की ओर आते हैं. जैसे ही ठेकेदार और मुख्य नियोक्ता यानि अंग्रेजी में प्रिंसिपल एम्प्लायर की बात आती है. वैसे ही ठेका मज़दूर (नियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम 1970 के तहत न्यूनतम वेतन, समान काम का समान वेतन, पीएफ, ई एस आई, ग्रेचुटी, बोनस, महिला वर्करों को मेटरनिटी लिव, विशाखा गाइडलाइन्स के तहत आईसीसी, काम के घंटे, इत्यादि सभी प्रावधान लागू होने चाहिए. अब कर्मचारियों का हक बनता है कि वे देखें कि क्या वो सरकारी विभाग में काम करने वाले सरकारी कर्मचारी के बराबर काम करते हैं कि नहीं?
     

    चपराशी को चतुर्थकर्मी कर्मचारी के रूप में लगभग 25,000/- रुपया मासिक मिलता है

    ठेका मज़दूर (नियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम 1970 के तहत स्थाई प्रकृति के लगातार चलने वाले काम के लिये ठेका मज़दूर नहीं लगाया जा सकता है. बारहो महीना चलने वाला काम (स्थाई काम) (नियमित मज़दूर) से ही करवाया जाना चाहिए. इसी कानून से सम्बंधित नियम 1971- "समान काम के लिए समान वेतन" के अनुसार अगर किसी स्थाई प्रकृति के काम के लिए ठेका मज़दूर काम पर लगाया गया है तो जब तक उस मज़दूर को स्थाई (नियमित) नहीं कर दिया जाता, उस ठेका मज़दूर को वेतन और सभी सेवा सुविधायें, उस काम को करने वाले स्थाई मज़दूर के सामान ही मिलेंगी. (इसके बारे में डिटेल में जानकारी के लिए हमारे इस आर्टिकल को पढ़ें -> ठेका वर्कर रेगुलर वर्कर के बराबर काम ही नहीं, बल्कि रेगुलर वर्कर का ही काम कर रहे: हाईकोर्ट. हम तो इसका सीधा उदाहरण देंगे कि आज आठवीं पास चपराशी को चतुर्थकर्मी कर्मचारी के रूप में लगभग 25,000/- रुपया मासिक मिलता है. इसी से आप तय कीजिये कि आप किसके बराबर काम करते हैं. इसके बारे में हमारे जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने माना था कि आज ठेका या आउटसोर्स वर्कर परमानेंट के बराबर नहीं बल्कि परमानेंट वर्कर का ही काम कर रहें हैं. अब ऐसे में समान काम का समान वेतन आपका संवैधनिक ही नहीं बल्कि क़ानूनी हक़ भी है. अब कितने दिनों में आप इसको ले पाते हैं वो आपके यूनिटी और ताकत पर निर्भर करता है.


    उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री दीपक चौहान जी से वर्करों के मुद्दों पर आये दिन बात होती रहती हैं. हम इसी बातचीत के दौरान उन्होंने अपना सैलरी स्लिप और कुछ जानकारी शेयर की. जिसका अध्ययन करने के बाद तो पता चला, वह काफी चौंकाने वाला है. 

    उपनल विभाग पीएफ का अपना कॉंट्रिब्यूशन भी आपके ही सैलरी से काट रहा 

    अगर नीचे जो सैलरी स्लीप का फॉर्मेट आप सभी लोगों का है तो यह जान लीजिये कि उपनल विभाग आपके साथ धोखा ही नहीं कर रहा बल्कि यह एक बहुत बड़ा ही घोटाला है. इस सैलरी स्लिप को माने तो पता चलता है कि उपनल विभाग पीएफ का अपना कॉंट्रिब्यूशन भी आपके ही सैलरी से काट रहा है. अब इसको समझने के लिए उनके सैलरी स्लिप का कॉपी भी देख सकते हैं.

    UPNAL outsource worker salary slip
    Uttrakhand UPNAL outsource/contract worker salary slip format -1 

    जी हाँ उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) के कॉन्ट्रैक्ट वर्कर का सैलरी स्लिप है. जिसको आजकल नया नाम ऑउटसोस वर्कर भी कहा जाता है. इस सैलरी स्लिप को गौर करें तो इसमें बेसिक और डीए कितने दे रहे है. इसमें स्पष्ट नहीं है. मगर पीएफ का एम्प्लॉयर शेयर के स्थान पर 992/- और एम्प्लाइज शेयर 905/- रुपया लिखा है. वही दूसरी तरफ Gross wages payable (by employer)- 11,155/-. ग्रॉस सैलरी में से नियम के अनुसार केवल कर्मचारी के हिस्से का पीएफ, ईएसआई व् अन्य कटौती किया जा सकता है. जबकि एम्प्लॉयीर यानी उपनल ने अपने पीएफ का हिस्सा भी काट लिया है. अगर देखें तो यह करोड़ों का घोटाला है. इतना ही नहीं दूसरे स्लीप को देखने से उससे भी बड़ा तथ्य उजागर होता है. पुरे देश में पीएफ कानून के तहत 12% कटौती का प्रावधान है. जबकि उपनल ने 17% कटौती की है. पीएफ के बारे में पूरी जानकारी के लिए हमारे इस आर्टिकल को पढ़ें -> पीएफ क्या है? जरुरत पड़ने पर कब, कहां और कैसे शिकायत करें, पूरी डिटेल जानकारी.

    उपनल विभाग ने सैलरी में से GST  की भी कटौती कर ली है

    UPNAL outsource worker salary slip
    Uttrakhand UPNAL outsource/contract worker salary slip format -2 
    इतना ही नहीं बल्कि आगे देखे तो सैलरी में से GST  की भी कटौती कर ली है. आप अपने साथ काम करने वाले स्थाई कर्मचारियों का सैलरी स्लीप देखें (नीचे उसका फॉर्मेट दिया हुआ है) कि क्या उनका GST कट रहा है और अगर नहीं तो फिर आपका क्यों? इसके लिए आज ही अपने के जानकार CA से इस मुद्दे पर बात की तो उन्होंने कहा कि "यह कटौती गलत है". जबकि उपनल GST के नाम पर एक-दो रूपये नहीं बल्कि 1500/- से 2000/- प्रति कर्मचारी प्रति महीना कटौती कर रहा है. मतलब यह खुलेआम लूट है. जब हमने CA से पूछा कि इसकी शिकायत कहां कर सकते हैं तो उन्होंने कहा कि अभी तक GST  शिकायत के कोई तरीका तय नहीं किया गया है. मगर शिकायत कर सकते हैं. इसके लिए डायरेक्टली  पीएमओ ग्रीवांस वेबसाइट पर दर्ज करायें. जब हमने पीएमओ का वेवसाइट चेक किया तो वह फ़िलहाल बंद है. मगर हम तो सुझाव देंगे कि आप अपने विभाग व् ठेकेदार उपनल दोनों के नाम से शिकायत दर्ज करवायें. इसकी शिकायत सीधे फाइनेंस मिनिस्टर श्री अरुण जेटली और सेक्रेटरी को सीधे भेजें. उनके पता के लिए यहां क्लिक करें. या फिर आप ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाना चाहें तो यहां क्लिक करें.

    उत्तराखंड उपनल कर्मचारियों के वेतन से पीएफ व जीएसटी के नाम पर महाघोटाला



    Uttrakhand UPNAL outsource/contract worker salary slip format
    Uttrakhand Permanent worker Salary Slip Format

    अगर कर्मचारी संघ हमारे द्वारा ऊपर दिए गए सुझाव को मद्देनजर इन गैर क़ानूनी कटौतियों को हासिल कर लेता है तो हम दावे के साथ कह सकते हैं कि बिना मांगे ही प्रति कर्मचारी 2500/- रूपये से लेकर 3500/- रूपये की वृद्धि होगी. इसके साथ ही वर्षों से गलत काटे जा रहे पैसों को एरियर के रूप में भी पा सकते हैं.

    पीएफ में घपला साबित होने पर आपके अधिकारी को जेल भी हो सकती है.

    आप सोच रहे होंगे कि हम इतना विश्वास के साथ कैसे कह सकते की कम्प्लेन पर करवाई हो ही जायेगी. सही सवाल है. आप लोगों का मजबूत यूनियन है. हक़ पाने के लिए हमें आन्दोलनात्मक के साथ ही साथ क़ानूनी लड़ाई भी लड़नी चाहिए. जितने के लिए कभी-कभी प्रबंधन की कमजोर नस पर वार करना होता है. बस समझ लीजिये पीएफ कानून बहुत ही कड़ा है. इसमें घपला साबित होने पर आपके अधिकारी को जेल भी हो सकती है. बस आपकी शिकायत की देर है. हमने खुद ही आईआरसीटीसी (रेलवे का पीएसयू) का शिकायत किया ही नहीं बल्कि लगभग एक वर्ष के बाद कर्मचारियों को एरियर भी मिला. इतना ही नहीं बल्कि अपने संघर्ष के दम पर समान काम का समान वेतन का सर्कुलर बनाने पर मजबूर कर दिया. इसके लिए अधिक जानकारी के लिए पढ़ें- आईआरसीटीसी में "समान काम का समान वेतन" लागू, वर्करों की जीत(आईआरसीटीसी एम्प्लॉयीज यूनियन का फेसबुक पेज से जुड़ें).

    मगर उससे पहले जरुरत है कि एक-एक कर्मचारी इस हकीकत को जाने. उपनल कर्मचारियों से लेकर उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश के एक-एक जनता को पता चलना चाहिए कि जिस सरकार को आप वोट देकर कुर्सी पर बैठते हैं. वह सरकार आपके और आपके बाल-बच्चों का हक़ किस तरह से लूट रहा है. 

    खैर आप सभी पढ़ें लिखे हैं. यह बात समझने की जरुरत नहीं है. उम्मीद है आपलोग हमारे इस पोस्ट से लाभ उठायेंगे. अगर भी सवाल या सुझाव हो तो बेहिचक नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें. इसके साथ ही कोशिश करें कि प्रदेश में काम करने वाले एक-एक उपनल कमर्चारी तक विभाग की यह हकीकत पहुंचे. धन्यबाद.
    लेखक: सुरजीत श्यामल

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    4 comments:

    1. आपका उत्तराखंड के 22 हजार उपनल कर्मचारियों की आवाज को उठाया है और हमें हमारे अधिकारों से अवगत कराया, मैं प्रदेश अध्य्क्ष आपका सभी कर्मचारियों की ओर से धन्यवाद करता हूँ

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      1. यह तो दीपक जी आपका बड़प्पन है. अगर आर्टिकल के अनुसार आपलोगों को हक़ मिल जाता है तभी समझूंगा कि लिखना सफल हुआ. कलम के द्वारा ही समाज में क्रांति आ सकती है. हमारी कोशिश है कि धीरे-धीरे लोगों को इस ब्लॉग के माध्यम से हक़ की जानकारी उपलब्ध कराये. आप जैसे संघर्षशील लोगों का साथ मिलेगा तो हर लड़ाई जीती जा सकती है. धन्यबाद.

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    2. बहुत बढ़िया सुरजीत जी। पर सबसे जरूरी है कि ठेका कर्मचारी इसको समझे और अपने हक की लड़ाई के लिए एकजुट हो। अलग अलग उंगली बन कर काम नही चलेगा बल्कि मुठ्ठी बनना होगा।

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      1. धन्यबाद हरीश जी, बिलकुल सही कहा. एक होना बहुत आसान मगर बने रहना बहुत मुश्किल...

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