National Minimum Wage – केंद्र सरकार के द्वारा दिहाड़ी मजदूरों की सैलरी दोगुनी की जा सकती है। इसको लेकर सरकार विचार कर रही है। हाल ही में न्यूनतम वेतन बढ़ाने को लेकर हरियाणा और नोयडा में हिंसक प्रदर्शन हुए। अभी पुरे देश में लेबर कोड लागू किया गया है। जिसके बाद नेशनल न्यूनतम वेतन के तहत कितना न्यूनतम सैलरी पर विचार किया जा रहा है, आज हम आपको इस पोस्ट के माद्यम से बताने जा रहे हैं।
National Minimum Wage in India दोगुना
केंद्र सरकार के द्वारा न्यूनतम मजदूरी में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार जल्द ही नेशनल न्यूनतम मजदूरी तय होने जा रही है। जिसके बाद मजदूरों की मजदूरी दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है। जब उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में मजदूरों के विरोध के बाद वेतन बढ़ाने की मांग तेज हुई। श्रम मंत्रालय के द्वारा सभी श्रेणियों के कामगारों का न्यूनतम वेतन बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
फ्लोर वेज से कम न्यूनतम वेतन
आपको बता दें कि लेबर कोड के तहत नेशनल न्यूनतम वेतन यानी केंद्र सरकार के द्वारा एक फ्लोर वेज तय किया जाना है। जिसके बाद हर राज्य सरकार को तय फ्लोर वेज से कम न्यूनतम वेतन नहीं रखा जा सकता है। अब आपके मन में यह सवाल जरूर होगा कि आखिर सरकार के द्वारा कितना नेशनल न्यूनतम वेतन निर्धारित किया जायेगा।
आपको बता दें कि 2017 में डॉ. अनूप सतपथी कमेटी के अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन 17 जनवरी, 2017 को किया गया था। जिसके बाद उक्त कमेटी ने जुलाई 2018 में नेशनल फ्लोर वेज के रूप में 375 रुपया प्रतिदिन (या ₹9,750 प्रति माह) का सिफारिश किया था। जिसको मालिकों द्वारा यह कहते हुए विरोध किया गया कि यह बहुत है। जबकि पहले नेशनल न्यूनतम वेतन 176 रुपया था।
यह कमेटी ने सुझाव दिया था कि हर पांच साल में एनएसएसओ-सीईएस आंकड़ों के आधार पर खपत बास्केट की समीक्षा की जाए और हर 6 महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुसार बुनियादी न्यूनतम मजदूरी को दुरुस्त बनाया जाए, जो जीवन यापन के खर्च में होने वाले बदलावों के अनुरूप हो।
नेशनल न्यूनतम वेतन कितना होगा
देश के कॉर्पोरेट्स के द्वारा विरोध होने पर केंद्र की मोदी सरकार ने एक फिर से अजित मिश्रा कमेटी का गठन किया। जिसका अभी तक रिपोर्ट सबमिट करने की जानकारी नहीं है। जबकि मिडिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा अब नेशनल फ्लोर वेज के रूप में ₹176 से बढ़ाकर करीब ₹450 रुपया करने का विचार कर रही है।
अब ऐसे में आप ही सोचिए कि एक तरफ हरियाणा सरकार ने ग्रामीण सफाईकर्मियों को मासिक वेतन 18100 कर दी है। जिसके बाद दूसरी तरफ नेशनल न्यूनतम वेतन अगर एक दिन का 450 यानी मासिक 12600 रुपया तय किया जाता है। ऐसे में एक ही देश में एक ही राज्य में अलग-अलग विभाग में काम करने वाले सफाई कर्मियों के न्यूनतम वेतन दर में इतना अंतर हो जायेगा। जबकि दोनों का काम एक ही होगा जबकि विभाग अलग-अलग? यह तो एक उदाहरण है, जिस पर केंद्र सरकार को विचार करना चाहिए। आप भी अपनी राय कमेंट में लिखकर बतायेंगे।
FAQ – National Minimum Wage in India
क्या National Minimum Wage दोगुना होने जा रही है?
फिलहाल यह एक बड़ा प्रस्ताव और चर्चा का विषय है। यदि सरकार National Minimum Wage बढ़ाने का फैसला करती है, तो करोड़ों मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी में बड़ा इजाफा हो सकता है।
National Minimum Wage क्या होता है?
National Minimum Wage वह न्यूनतम वेतन है, जिसके नीचे किसी कर्मचारी को मजदूरी नहीं दी जानी चाहिए। इसका उद्देश्य सभी श्रमिकों के लिए एक न्यूनतम आय सुनिश्चित करना है।
अगर National Minimum Wage दोगुना हो गया तो किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा?
इसका सबसे अधिक लाभ असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों, निर्माण श्रमिकों, सुरक्षा गार्ड, हाउसकीपिंग स्टाफ और कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को मिलेगा।
क्या सभी राज्यों में मजदूरी एक जैसी हो जाएगी?
नहीं। National Minimum Wage एक आधार (Floor Wage) हो सकता है। राज्य सरकारें इससे अधिक न्यूनतम मजदूरी तय कर सकती हैं, लेकिन इससे कम नहीं।
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Surjeet Shyamal एक श्रमिक जागरूकता लेखक हैं, जो Private Employees को PF, वेतन, ग्रेच्युटी और लेबर कानून से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सरल हिंदी में प्रदान करते हैं। उनका लक्ष्य कर्मचारियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना और सही मार्गदर्शन देना है, ताकि वे सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य जीवन जी सकें। Read More