खट्टर सरकार से खफा, हरियाणा महिला गेस्ट टीचर ने मुंडन का ऐलान किया

नई दिल्ली: अभी हाल ही में मध्यप्रदेश के महिला अतिथि शिक्षिकाओं ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को अल्टीमेटम देकर मुंडन करवाकर सनसनी फैला दी थी. जिसके बाद चारों ओर सरकार की काफी निंदा हुई. अब इसके बाद  हरियाणा अतिथि अध्यापक संघ के शिक्षिकाओं (हरियाणा महिला गेस्ट टीचर) ने बीजेपी की खट्टर सरकार के वादा खिलाफी के खिलाफ आगामी 11 फरवरी की करनाल में आयोजित रैली में सिर मुंडवाने का ऐलान किया है.

हरियाणा महिला गेस्ट टीचर ने मुंडन का ऐलान किया

पुरे प्रदेश में पिछले 12 वर्षों से लगभग 15 हजार अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं. जिनको को मानदेय के रूप में लगभग 20 हजार रुपया प्रति माह दिया जाता है. मगर उनके बराबर काम करने वाले रेगुलर शिक्षक को 50 हजार मासिक से अधिक की राशि दी जाती है. इसके खिलाफ पिछले कई वर्षों से वो “समान वेतन” के साथ स्थाईकरण की मांग कर रहें हैं. जिसके बाद हरियाणा महिला गेस्ट टीचर को मुंडन का फैसला लेना पड़ा.

संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा शास्त्री ने बताया कि सन 2014 में हुड्डा सरकार के खिलाफ जंतर मंतर के हमारा आमरण अनसन स्थल पर खुद बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष श्री रामविलास शर्मा पधारे थे. उनके साथ में वर्तमान सरकार के कई केबिनेट व् सांसद भी साथ में मौजूद थें. उसी सभा में रामविलास शर्मा ने खुलेआम घोषणा की थी कि “हमने आपकी पॉलिसी को स्टडी करवा लिया है और अगर आपके सहयोग से हमारी सरकार बनेगी तो हम आपको पहली कलम से नियमित करेंगे”.

ऐसा उन्होंने केवल कहा ही नहीं बल्कि अपने पार्टी के लेटर पेड पर भी लिखकर दिया. इसके बाद चुनाव पूर्व तैयार किये गए घोषणा पत्र में भी अतिथि अध्यापकों को नियमित करने की बात लिखी थी.
आगे गेस्ट टीचर के नेता श्री राजेंद्र शर्मा ने बताया कि तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी इस तरफ कोई ठोस कदम नही उठाया गया है. यही नहीं बल्कि जो गलतियां पिछली सरकार ने कोर्ट में गलत एफेडेविट देकर की थी. उनको दुरुस्त करने की बजाय और इस सरकार के द्वारा और ज्यादा उलझाया जा रहा है. कभी सरकार द्वारा 3581 को झूठ बोलकर सरप्लस दिखाया जाता है.
कभी 1200 JBT को एडजस्टमेंट पॉलिसी के होते हुए जान बूझ कर लटकाया जाता है. आगे उन्होंने कहा कि उसके उपरांत माननीय मुख्यमंत्री महोदय बयान देकर यह तक कह देते हैं कि “अतिथि शिक्षक को हम चाहकर भी नियमित नही कर सकते”. वो कोर्ट का हवाला देकर अपना वादा पूरा करने से मुकर रहें हैं. जबकि पॉलिसी बनाना सरकार का काम हैं.
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