रोजगार के नाम पर बेरोजगार युवाओं के लिए पकौड़ा बजट, CPIM ने प्रदर्शन किया

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के जन-विरोधी बजट के खिलाफ CPIM ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों को सीपीआई(एम) संसद सदस्य तथा पॉलिट ब्यूरो सदस्य मो. सलीम, एन.के. शुक्ल, सचिव अखिल भारतीय किसान सभा, के. एम. तिवारी, सचिव दिल्ली राज्य कमेटी ने संबोधित किया. वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार के चुनावी वादे की तरह यह बजट भी जुमलेबाज बजट है.

CPIM ने प्रदर्शन किया

CPIM वक्ताओं ने कहा इस बजट में जनता को राहत देने वाला कोई कदम नहीं है बल्कि बड़े -बड़े पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाला बजट है. सरकार के इस बजट ने सभी वर्गों को निराश किया है. आगे उन्होंने कहा कि आम जनता को महंगाई से राहत देने का कोई कदम इस बजट में दिखाई नहीं दे रहा है। उसके बावजूद इस बजट को खूब बढ़ा-चढ़ा कर बताया जा रहा है. गरीबों का बजट बताने के लिए जिस तरह की पैकेजिंग की गई है, उसकी सच्चाई कुछ और ही है. जिसके कारण CPIM ने प्रदर्शन किया.

बीमा कंपनियों को एक और बम्पर पुरस्कार दिया जा रहा

वक्ताओं के अनुसार सरकार के ही अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना सही तरीके से काम नहीं कर रहा है. इसमें 3.6 करोड़ परिवारों को 1 लाख प्रतिवर्ष के बीमा की योजना थी. परिवारों की संख्या में तो तीन गुना और बीमा राशि में पाँच गुना की बढ़ोतरी कर दी गयी है, जबकि बजट में निर्धारित रकम को सिर्फ दो गुना किया गया है. फसल बीमा का जो पुराना अनुभव है, उससे यह स्पष्ट है कि इसके जरिये बीमा कंपनियों को एक और बम्पर पुरस्कार दिया जा रहा है. इसका थोड़ा भी फायदा जन साधारण को नहीं मिल सकेगा.

रोजगार के नाम पर बेरोजगार युवाओं के लिए पकोड़ा बजट

खेती एवं ग्रामीण विकास में बजट को कम करते हुए सकल घरेलू उत्पाद(जीडीपी) के 1.15 से 1.08 प्रतिशत तो स्वास्थ्य में 0.32 से 0.29 प्रतिशत कर दिया गया है. इसी तरह शिक्षा पर केंद्रीय खर्चे में कटौती कर 0.49 से 0.45%,महिलाओं के कल्याण लिए 0.68 से 0.65%, अनुसूचित जनजातियों के लिए कुल बजट का मात्र 1.6 प्रतिशत और अनुसूचित जातियों के लिए 2.32% निर्धारित किया गया है.
चुनाव में मोदी सरकार ने युवाओं को 10 करोड़ रोजगार देने का वायदा किया था. जिसका इस बजट में कोई जिक्र नहीं है. बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के नाम पर यह पकोड़ा बजट है. सरकारी खर्चे में कटौती के कारण रोजगार की संभावनाओं एवं सामाजिक कल्याण की योजनाओं में भारी कमी तय है. इसका सीधा असर आम जनता के जीवन-यापन पर पड़ेगा. किसानों पर लगातार खेती के संकट के कारण आत्महत्या की घटनाओं के बाद भी कर्ज माफी का बजट में जिक्र भी नहीं है.

CPI(M) जन-विरोधी बजट के खिलाफ संसद में उठाएंगे

आगे नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार का यह बजट जुमलेबाजी के जरिये जनता को बेवकूफ बनाने वाला है. मध्यम वर्ग को इस बजट से कोई लाभ नहीं मिला है. पेट्रोल और डीजल में 2 रुपये की कमी को भी सेस 6 से बढ़कर 8 कर छीन लिया गया. नोटबन्दी और जीएसटी के बाद यह बजट जन साधारण के जीवन-यापन पर एक और हमला है. साथ ही संसद सदस्य मो. सलीम ने कहा कि सीपीआई(एम) जन-विरोधी बजट के खिलाफ सड़क कि इस आवाज को संसद में उठाएंगे.

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