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    हरियाणा सरकार के समान काम समान वेतन के वायरल नोटिफिकेशन का सच


    कल से हरियाणा सरकार के चीफ सेक्रेटरी द्वारा जारी दिनांक 3 नवम्बर 2017 का सर्कुलर व्हाट्सप्प और फेसबुक पर बहुत तेजी से सर्कुलेट किया जा रहा है. इसके द्वारा यह भी मैसेज प्रेषित किया जा रहा है कि देखो हरियाणा सरकार ने "समान काम का समान वेतन" लागू कर दिया है. सुनकर थोड़ा हास्पद लगता है. लोग उस सर्कुलर को पढ़ने का कष्ट भी नहीं उठाना चाहते है. जबकि उस सर्कुलर को पढ़ेंगे तो मामला स्पष्ट हो जायेगा. इससे पहले ही इस तरह के इनफार्मेशन हमारे पास आते रहे हैं.जिसकी छानबीन करके आपतक जानकारी पहुंचते रहे हैं. अगर आपके पास समय नहीं भी हो तो अपना समय निकाल कर जरूर पढ़ेंगे. कुछ मित्र इस तरह के सर्कुलर को भेज कर पूछ भी बैठते हैं कि क्या यह सही है?



     

    इसके बारे में बताने से पहले अपना कुछ पीछे का अनुभव शेयर करना चाहूंगा. कुछ ऐसा ही सर्कुलर मेरे हाथ भी लगा था. शायद अप्रैल 2013 का महीना था. उस समय मुझे अच्छे से याद है कि शोसल मिडिया में कुछ इस तरह की जानकारी शेयर करने का चलन नहीं था. मुझे वह सर्कुलर इंटरनेट में गूगल में सर्च करने के दौरान मिला था. मारुति कार मेकर कम्पनी, गुडगॉवा में एचआर एक्जकयुटिव की मौत के बाद पार्लियामेंट में हंगामे के बाद उस समय के सरकार ने फैसला लिया. जिसके बाद चीफ लेबर कमीश्नर (सेन्ट्रल)  ने सरकुलर Office Memorandum fnukad 23.1.2013, file No.14(113) Misc RLC (Cood)/2012 (इस सर्कुलर के लिए यहां क्लिक करें) सभी मिनिस्ट्री को कड़ाई से लागू करने का आदेश जारी किया. जिसके तहत-


    "अगर कोई ठेका वर्कर ठेकेदार द्वारा न्युक्त अपने प्रधान नियोक्ता के वर्कर के बराबर कार्य करता है, तो ठेकेदार के द्वारा काम करने वाले ठेका वर्कर का वेतन, छुटटी और सेवा शर्ते उस संस्था के प्रधान नियोक्ता के वर्कर के बराबर होगा".




    इस सर्कुलर  में ठेका मजदूर (संचालन एवं उन्मूलन) कानून 1970, और उसके केन्द्रिय नियम 1971 के तहत उल्लंघन करने वाले पर कानूनी कारवाई करने की बात विशेषता से कही गयी है.

    यह सर्कुलर सभी केंद्रीय मंत्रालय के विभागों के साथ ही साथ चेयरमैन, रेलवे बोर्ड को भी भेजा गया. रेलवे बोर्ड ने भी अपने एक सर्कुलर  के माध्यम से चीफ लेबर कमीश्नर (सेंट्रल) के सरकुलर को एम. डी., इंडियन रेलवे कैटरिंग एण्ड टूरिज्म कॉपोरेशन ( आई.आर.सी.टी.सी.) सहीत अपने सभी विभागों को भेज कर इस सर्कुलर को कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया था.




    जब आईआरसीटीसी से इस सर्कुलर को लागू करने की मांग की तो उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगा. इसके साथ ही सर्कुलर जारी करने वाले अधिकारी से लेकर श्रम मंत्री से लेकर रेलमंत्री तक से गुहार लगाई मगर किसी ने सुनवाई नहीं किया. अंत में दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर इसी मांग को पुरे देश के सेन्ट्रल गवर्नमेंट में काम करने वाले वर्करों के लिए लागू करने की मांग की.

    जानकर आश्चर्ज होगा कि करीब 3 साल बाद जब केस की सुनवाई हुई तो भारत सरकार और श्रम मंत्रालय ने उस सर्कुलर के बारे में सीधा झूठ ही नहीं बोला बल्कि खुद के सर्कुलर को गलत बताते हुए कहा कि कहा कि वो तो advisory यानि सलाह दिया गया था.




    अब हरियाणा गवर्नमंट के इस सर्कुलर 3 नवम्बर 2017 की बात करते है. इसमें तो स्पष्ट रूप से advised का इस्तेमाल किया गया है.  इसके अलावा इसको खुद पढ़े तो स्पष्ट होता है कि हरियाणा सरकार केवल अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर लगे वर्कर को आउटसोर्सिंग पालिसी पार्ट-टू यानि इनके खुद के डारेक्ट कॉन्ट्रैक्ट पर रखे कर्मचारी को ही लाभ देने की बात कर रहे हैं. अब अगर इस advise यानि सरकार के सलाह हो अगर सभी विभाग मान लें तो जानकारी के अनुसार डायरेक्ट कॉन्ट्रैक्ट वालों यानि आउटसोर्सिंग पालिसी पार्ट-टू वालों कर्मचारियों की सैलरी 5,000/- मासिक की बढ़ोतरी होगी.




    जानकारी के अनुसार बोर्ड एवं निगमों में कार्यरत कर्मचारियों पर भी यह व्यवस्था लागू करने के लिए सलाह देने की बात हुई है. अगर संबंधित विभाग इस सलाह को मान लेता है तो लगभग डायरेक्ट कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले साढ़े सात हजार कमचारियों को फायदा मिलेगा. मगर दूसरी तरफ ठेकेदार या मैन पावर एजेंसी के माध्यम से लगे वर्करों को आउटसोर्सिंग पालिसी पार्ट-वन के तहत समान काम के लिए समान वेतन देने से वंचित रख दिया गया है. जबकि ऐसे कर्मचारियों की संख्या 60 हजार है.


    जबकि अभी हरियाणा का न्यूनतम वेतन अकुशल मजदूरों को रोजाना 318.46, अर्द्धकुशल (ए) श्रमिकों को 334.39, अर्द्धकुशल (बी) श्रमिकों को 351.11 रुपये है. जबकि कुशल श्रमिकों (ए) को 368.66 रुपये, जबकि कुशल (बी) को दैनिक वेतन 368.10 रुपये  है. उच्च कुशल श्रमिकों का दैनिक वेतन 406.51 रुपये है.




    जबकि अभी मेरे जनहित याचिका के फैसले के बाद सेंट्रल गवर्नमेंट के कॉन्ट्रैक्ट वर्कर हो या आउटसोर्स वर्कर न्यूनतम वेतन 14,000/- से 18460/- मासिक लागू हो चूका है.

    लेखक: सुरजीत श्यामल

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    4 comments:

    1. हरियाणा सरकार के झूठ का पर्दाफाश करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सुरजीत जी।

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      1. प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत-बहुत धन्यबाद दोस्त. इससे लिखने वाले को प्रोत्साहन मिलता है. उम्मीद है आगे भी इसी तरह उत्साहवर्धन करेंगे.

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    2. सर् उत्तराखंड का भी यही हाल है 22000 युवाओं को आउटसोर्सिंग के जरियेसरकारी विभागों मे 6000 , 8000 रुपया मे काम करवाया जा रहा है लेकिन कोई सुनने वाला नही क्या हमें समान काम समान वेतन नही मिल सकता क्या । आप मेरी मदद करे 8126251916

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      1. सॉरी दोस्त. कल ही आपका मैसेज देखा था मगर व्यस्तता के करना आपसे संपर्क नहीं कर सका. आज आपसे बात करूँगा.

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