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    सुप्रीम कोर्ट में कर्मचारियों के PF कंट्रीब्यूशन के फैसले से किसको फायदा मिलेगा

    सुप्रीम कोर्ट में कर्मचारियों के PF कंट्रीब्यूशन के फैसले से किसको फायदा मिलेगा, Supreme Court order PF Contribution

    सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के PF कंट्रीब्यूशन के बारे में पिछले सप्ताह एक महत्वपूर्ण फैसला दिया हैं. इसके बाद सभी कर्मचारियों के बीच उत्सुकता हैं कि इसका उनको क्या फायदा मिलेगा. इसके आलावा उनके वेतन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, मतलब उनका इस फैसले के बाद वेतन बढ़ेगा या घटेगा? इसके साथ ही और भी बहुत सारी बातों को इस पोस्ट के माध्यम से बहुत ही सरल भाषा में समझेंगे.
        

    माननीय सुप्रीम कोर्ट ने दिनांक 28 फरवरी 2019 को फैसला देता हुए कहा कि "कंपनियां कर्मचारियों की बेसिक सैलरी से 'स्पेशल अलाउंस' को अलग नहीं कर सकती है". इसका सीधा मतलब है कि अब कर्मचारियों के PF डिडक्शन के कैलकुलेशन के लिए उन्हें उनकी बेसिक सैलरी में स्पेशल अलाउंस को भी शामिल करना होगा. जो कि अभी तक नहीं किया जा रहा था.


    अभी तक EPF कानून के अनुसार क्या नियम हैं?

    कानून के नियमानुसार 20 या उससे अधिक वर्कर के काम करने वाले कंपनी को इसके तहत EPFO (Employee Provident Fund Organization) में पंजीकरण अनिवार्य है. अगर आपकी बेसिक सैलरी 15 हजार रुपये मासिक या उससे कम है तो आपके लिए EPF खाता में रकम जमा करवाना अनिवार्य है. फ़िलहाल के नियम के अनुसार 15 हजार रुपये से अधिक बेसिक सैलरी वालों के लिए यह स्कीम Option है.

    सुप्रीम कोर्ट में कर्मचारियों के PF कंट्रीब्यूशन के फैसले से किसको फायदा मिलेगा


    PF आर्डर का असर किनके सैलरी के ऊपर होगा 

    इससे अब स्पष्ट हो गया होगा कि इस आर्डर का असर उन कर्मचारियों पर नहीं होगा. जिनकी बेसिक सैलरी और स्पेशल अलाउंस हर महीने 15,000 रुपए से ज्यादा हैं. यह 15 हजार रुपये तक की बेसिक सैलरी और अलाउंसेज वालों के लिए ही लागू होगा. जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि इससे ज्यादा वेतन वालों के लिए पीएफ में योगदान अनिवार्य नहीं है.
     

    इस फैसले के बाद नौकरीपेशा पीएफ धारियों को कंट्रीब्यूशन बढ़ने से फायदा होगा वहीं कंपनियों पर वित्‍तीय बोझ बढ़ सकता है. हाँ, इससे आप पीएफधारी जिनके सैलरी में बेसिक सैलरी और स्पेशल अलाउंस हर महीने 15,000 रुपए से ज्यादा हैं उनके खाते में पहले के मुकाबले ज्यादा पीएफ जमा हो सकेगा. मगर इस स्थिति में आपके Take Home Salary/ In Hand सैलरी कम हो सकती हैं.  

    अब मान लीजिए कि आपकी सैलरी 25,000 रुपये प्रति महीना है. अभी तक के इस सैलरी में आपकी बेसिक 8500 रुपये और बाकी 14, 000 रुपये का HRA समेत स्पेशल अलाउंस मिलता है. जिससे अभी तक आपका एम्प्लायर आपके बेसिक 8500 पर ही पीएफ की कटौती करता था. मगर अब सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के अनुसार आपका पीएफ 22,500 रुपये ( 14,000+8500 रुपये) पर कैलकुलेट होगा.
     

    सैलरी स्‍ट्रक्‍चर मुख्‍य रूप से दो तरह का होता है- पहला बेसिक सैलरी यानी मूल वेतन और दूसरा स्‍पेशल अलाउंस. बेसिक सैलरी एक निश्चित राशि होती है जबकि महंगाई भत्ता (डीआरए), परिवहन भत्ता, मकान किराया, गाड़ी भत्ता और टेलिफोन/मोबाइल फोन भत्ता स्‍पेशल अलाउंस की कैटेगरी में आती हैं. कई जगह तो आपको सैलरी स्लिप पर केवल बेसिक दिखाकर ही दिया जाता हैं. मगर कई जगह पीएफ की कम जमा करना पड़े इसके लिए कम्पनी बेसिक कम और इतर अलाउंस ज्यादा दिखा देता हैं.

    क्या उनका फायदा मिलेगा, जिनको सैलरी स्लिप नहीं मिलती?

    अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इसका फायदा उनको मिलेगा. जिनको सैलरी स्लिप ही नहीं दी जाती. इसके आलावा केवल न्यूनतम वेतन पर काम लिया जाता हैं? अभी देश में ज्यादातर वर्कर ठेका पर काम करते हैं. जिसमें बहुत ही कम ऐसी ईमानदार कंपनी होगी जो वर्कर के सभी क़ानूनी अधिकार बिना कोई चिक-चिक के दे देती होगी.


    एक तरह से देखे तो यह फैसला एक उन एम्प्लायर के ऊपर नकेल की तरह है जो कर्मचारी के सैलरी में बेसिक सैलरी कम दिखाकर पीएफ की कम कटौती करते हैं. इससे कर्मचारी का कम पीएफ तो कटता ही है और उनको भी कम पीएफ जमा करना पड़ता है. सुप्रीम कोर्ट के इस आर्डर का जितना असर किसी कर्मचारी पर होगा उससे ज्यादा असर एम्प्लायर पर होना है. अब देखते है कि यह आर्डर भी लागू हो पता है या समान वेतन वाले आर्डर की तरह कागज़ के ढेर में तब्दील होने का इन्तजार करता हैं.

    जल्द ही यहां आर्डर का कॉपी उपलोड किया जायेगा 

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    2 comments:

    1. Good blog you've got here.. It's difficult to find quality writing like yours nowadays.
      I honestly appreciate people like you! Take care!!

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      1. Thank you very much for your valuable feedback. comes again.

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