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    Gratuity Act क्या है और इसकी गणना कैसे करते हैं? Know Gratuity policy in india in Hindi


    Gratuity Act क्या है और इसकी गणना कैसे करते हैं? Know Gratuity policy in india in Hindi

    सभी लोग अपने Family को पालने के लिए Job करते हैं, मगर Job के दौरान हमें क्या-क्या Facility मिलनी चाहिए इसको जानकारी हर किसी को नहीं है. आज हम इस क्रम में Gratuity (ग्रेच्युटी) के बारे में बात करेंगे. जब आप किसी Company में काम करते है आकपे द्वारा दिए गए Service के बदले Gratuity आपके प्राप्त Salary का एक हिस्सा ही है. मतलब यह आपके Company द्वारा एक भाग के रुप में आपके Salary में से हर Month काटा जाता है. Gratuity सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र में काम करने वाले या संगठित क्षेत्र में काम करने वाले Employees को मिलती है. अभी हाल में ही Labour Ministry ने कर मुक्त ग्रेच्युटी (Tax Free Gratuity) की राशि को 10 लाख से बढाकर 20 लाख कर दिया है और इसे 1 जनवरी 2016 से Government  और Private दोनों क्षेत्रों के Employees के लिए लागू भी कर दिया गया है.

    Gratuity Act क्या है और इसकी गणना कैसे करते हैं? Know Gratuity policy in india in Hindi

    अगर एक Employee एक ही Employer के साथ 5 वर्ष की पूर्णकालिक Service पूरा कर लेता है तो वह Gratuity का हक़दार हो जाता है. आजकल सरकारी या गैर सरकारी कंपनी में Contract पर Employees रखे जाते हैं मगर हर साल, दो साल पर Principle Employer द्वारा Contractor बदल दिया जाता है. ऐसा करके वो Employee के Gratuity के पैसे हड़प जाते हैं. वो Employees के सेवा 5 वर्ष पूरा ही नहीं होने देते हैं.

    Gratuity Act क्या है ग्रेच्युटी क्या है? What is Gratuity Act in hindi 

    Gratuity वेतन का वह हिस्सा होता है, जो कर्मचारियों की सेवाओं के बदले एक निश्चित अवधि के बाद दिया जाता है. आय कर अधिनियम की धारा 10 (10) के मुताबिक, किसी भी निगम या Company में Minimum पांच वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने वाला हर Employee ग्रेच्युटी का हकदार होता है. Gratuity Act, 1972 के अनुसार, कर्मचारी को उसकी सेवा के प्रत्येक वर्ष में 15 दिनों का वेतन Gratuity के तौर पर दिया जाता है. इस Act में कर्मचारी वह हैं जिन्हें कंपनी वेतन (Pay Rolls) पर रखती है, प्रशिक्षुओं (Tranees) को Gratuity नहीं मिलती है. Gratuity के तहत मिली 20 लाख तक की राशि पर Tax नही देना पड़ता है. साथ ही यह कानून ऐसे प्रतिष्ठानों में लागू होता है, जहां कर्मचारियों की संख्या कम से कम 10 हो.

    कर्मचारी को ग्रेच्युटी कौन देता है? Who gives gratitude to the employee?


    Employer को अपने स्वयं के फंड से Gratuity भुगतान करना होता है. वही कोई कोई एक जीवन बीमा कंपनी की सहायता लेकर समूह Gratuity योजना खरीद लेते हैं. इस समूह Gratuity Scheme के मामले में, नियोक्ता को बीमाकर्ता को वार्षिक भुगतान करना पड़ता है और इस योजना में कर्मचारी चाहे तो अपने स्वेच्छा से Gratuity में योगदान दे सकता है. लेकिन यह अनिवार्य नहीं है.

    भारत में ग्रेच्युटी की गणना कैसे करते हैं? How do we calculate gratuity in India?


    Gratuity की गणना करना कठिन काम नहीं है. यह सभी Salary वाले वाले उन Employees पर लागू होगा. जो एक निजी या सरकारी क्षेत्र के लिए काम करता है वह कानूनन Gratuity प्राप्त करने का हकदार है. नियोक्ता (मालिक/कंपनी) जितना वे चाहते हैं उतना उपदान का भुगतान कर सकते हैं, लेकिन कम से कम Gratuity राशि यह है कि उन्हें Employee को भुगतान करना होगा. यदि Gratuity Act फॉर्मूला के अनुसार है तो Gratuity पर Tax रियायत उपलब्ध है और यह Formula से अधिक है, तो यह कर योग्य है. Gratuity भुगतान के लिए Formula  उन लोगों के लिए अलग है जो Gratuity Act के तहत शामिल हैं और जो नहीं हैं. दोनों श्रेणियों के लिए Gratuity भुगतान के लिए नीचे दिया गया Formula है.


    Gratuity Act के तहत Employees के लिए Gratuity भुगतान के लिए Formula?

    किसी भी Employee जो 10 से अधिक Employee वाले स्थान पर काम करता है, को Gratuity Act के तहत कवर किया जाएगा. आपका आखिरी वेतन और सेवा की अवधि दो सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं, जिस पर आपके Gratuity भुगतान के लिए फार्मूला की गणना की जाती है. Gratuity Act के तहत कवर किए गए लोगों के लिए Gratuity गणना के लिए नीचे दिया गया फार्मूला है. Gratuity की गणना में मूल वेतन और महंगाई भत्ता का योग शामिल होता है. मान की लीजिये की सुरेश किसी कंपनी में काम करता था. यदि सुरेश ने 10 वर्ष काम करने के बाद छोड़ दिया. अब उसको Gratuity Claim करना है. तो इसके लिए उनको यदि उसके Last Salary Slip पर Basic Salary 20,000 रु. है, DA=5000 रु. तो उसकी Gratuity Act का कैलकुलेशन कुछ इस प्रकार से करेंगे.

    फार्मूला - (Basic Salary + DA) x 15 दिन x 10 साल /26 (यहाँ पर 1 महीने में 26 दिन माने गए हैं)

    Gratuity = (20000 + 5000) x 15 x 10 /26


    तो सुरेश का Gratuity =1,44,230.76 रु. होगा.

    ग्रेच्युटी भुगतान के लिए सेवा की अवधि क्या है What is the service period for gratuity payments?


    Private Employees को जब Gratuity उनके Job करते समय (रिटायरमेंट के पहले तक) मिलती है, तो उनकी Gratuity पर Tax लगता है क्योंकि यह उनके Salary के अंतर्गत आता है लेकिन Government Employees को Gratuity उनकी सेवानिवृत्ति, मृत्यु या पेंशन के तौर मिलती है और उस पर Tax भी नहीं लगता है. Labour Ministry के नये Rules के अनुसार संगठित क्षेत्र के कर्मचारी 1 जनवरी 2016 से 20 लाख रुपए तक के कर मुक्त Gratuity के लिए पात्र होंगे. इससे पहले यह सीमा 10 लाख रुपये थी.


    Gratuity निकलने के लिए कौन सा Form भरकर Claim करना होगा?

    Company को Join करते वक़्त Employee को Form "F" भर कर उसमे अपने घर के किसी भी सदस्य को Nominee बनाना होता है. यहाँ पर यह बात बताना भी जरूरी है कि यदि Company घाटे में चल रही हो तो भी उसे Gratuity राशि का भुगतान करना होगा. अतः यदि आप अपनी कंपनी को 5 साल से पहले बदलने की सोच रहे हैं तो थोडा सोच समझ कर निर्णय लीजिये क्योंकि यदि आपने किसी कंपनी में 5 साल से पहले नौकरी छोड़ दी है तो वहां पर आप Gratuity का दावा नही कर सकते हैं.

    Gratuity निकालने का आवेदन कैसे करें?

    Gratuity निकालने का Application एक व्यक्ति खुद कर सकता है, या अपने किसी अधिकृत या परिचित व्यक्ति के माध्यम से Gratuity निकालने के आवेदन को अपनी पुरानी Company  को भेज सकता है. आवेदन के साथ आखिरी Salary Slip, Offer letter की कॉपी, त्यागपत्र देने के तारीख और Gratuity की राशि इत्यादि का ब्यौरा जरूर दें. आवेदन करने के बाद कंपनी को एक महीने का समय जरूर दें.


    यदि आपका कंपनी Gratuity देने से मना कर दे तो क्या करें?

    अगर Gratuity की राशि Employer या Company द्वारा रिटायरमेंट या Job छोड़ने के एक महीने के भीतर पूर्व Employee को नहीं दी जाती है, तो उसे उस क्षेत्र के भीतर, जहां कंपनी का ऑफिस स्थित है, के पास ग्रेच्युटी भुगतान प्राधिकरण या केंद्रीय श्रम आयुक्त के पास सभी जरूरी कागजात भेजकर शिकायत दर्ज करानी चाहिए. इसके अलावा  पीड़ित व्यक्ति न्याय पाने के लिए अपने वकील के माध्यम से पूर्व Office को नोटिस भेजे और श्रम न्यायालयों (Labour Courts)  में मुकदमा दर्ज कराये.

    जिस दिन Employee ग्रेच्युटी निकालने के लिए आवेदन करता है उस तारिख से 30 दिन के अन्दर उसे Payment मिल जाना चाहिए. यदि Company ऐसा नही करती है तो उसे Gratuity राशि पर साधारण ब्याज की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा. यदि Company ऐसा नही करती है तो उसे ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 (Payment of Gratuity Act,1972)  के उल्लंघन का दोषी माना जायेगा. जिसमे उसे अधिकतम 6 महीने सजा या 1000 रूपये तक फाइन या फिर दोनों का प्रावधान है. याद रखें, ग्रेच्युटी का गलत दाबा करने वाले पर भी यह सजा लागू होगा. बशर्ते कि जहां अपराध इस अधिनियम के तहत देय किसी भी Gratuity का भुगतान न करने से संबंधित है. Employer को उस अवधि के लिए कारावास के साथ दंडित किया जाएगा. जो कि न्यायालय द्वारा अपराध की कोशिश करने के तीन महीने से कम नहीं होगा, लिखित रूप में यह राय है कि कारावास की एक कम अवधि या जुर्माना की कारावास न्याय के समाप्त होने पर मिलती है.

    इस लेख के माध्यम से आपको हमने यह बताने का प्रयास किया है कि एक कर्मचारी किस तरह अपनी ग्रेच्युटी की गणना कर सकता है, किस तरह  ग्रेच्युटी की राशि को निकाल सकता है. यदि उसका नियोक्ता (मालिक/कंपनी) या ऑफिस उसको ग्रेच्युटी देने में मना कर देता है तो किस तरह की कानूनी कार्यवाही करनी है. उम्मीद है कि हमारा यह प्रयास आपके लिए मददगार साबित होगा. अगर कोई सवाल हो तो कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें.

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