झारखण्ड आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं ने किया काम ठप्प, क्या हैं उनकी मांगे

कल से झारखण्ड सरकार की मुश्किल बढ़ गई है. अपनी नौ सूत्री मांगों के लिए झारखण्ड आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं ने आंदोलन फिर से शुरू कर दिया है. मिडिया के खबर के अनुसार आंगनवाड़ी सेविकाएं राज्यभवन के सामने धरना पर बैठ गई हैं. उन्होंने कहा कि विगत 23 जनवरी को विभाग ने आश्वाशन दिया था कि 6 महीने के उनकी ,मांगों को पूरा किया जायेगा. जबकि इसके लिए अभी तक कोई करवाई नहीं की गई है.

झारखण्ड आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं ने काम ठप्प किया

इसके पहले हजारों की संख्या में झारखण्ड प्रदेश आंगनवाड़ी यूनियन के बैनर तले सेविकाओं और सहायकों ने भरी दोपहर में रैली निकाली. इनकी रैली मोहबादी से शुरू होकर स्टेडियम रोड होते हुए राज्यभवन के जाकिर हुसैन पार्क पर समाप्त हो गई. जानकारी के लिए बता दें कि पुरे राज्य भर में 75,000 आंगवाड़ी सेविका और सहायिकाएं कार्यरत हैं. जो कि कल से हड़ताल पर चले गए हैं.
इसी 23 जनवरी को महिला वाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव और आंगनवाड़ी सेविका और सहायिका के संगठन के बीच मीटिंग के माध्यम से 14 मांगों पर सहमति बनी थी. इसमें आंगनवाड़ी सेविका और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी, यात्रा भत्ता देने, चिकित्सा भत्ता देने, महिला परवेक्षिका के चयन में आंगनवाड़ी सेविका की अधिकतम उम्र सीमा बढ़ाने, चयन मुक्त आंगनवाड़ी सेविका व सहायिका को वापस करने पर परामर्श, आकस्मिक अवकाश देने, 15-15 दिन की गर्मी छुट्टी देने, मिनी आंगनवाड़ी केंद्र की सेविका  को सामान्य  आंगनवाड़ी केंद्र के बराबर मानदेय निर्धारित करने की मांग शामिल थी.
झारखण्ड में अभी आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को 10 वर्ष तक 4,400 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता है. इसके बाद वेतन में महज 63 रुपये की बढ़ोत्तरी की जाती है. अब यह तो सोचने की ही बात है कि सरकार अपने सभी योजनाओं-कार्यक्रमों का क्रियान्वयन हमसे कराती है, लेकिन सुविधा के नाम पर पीछे हट जाती है.
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