Human Rights in India in Hindi, मानवाधिकार क्या होता है? पूरी जानकारी

हम आजाद भारत के नागरिक है और हमारे देश के संविधान ने हमें कुछ Human Rights प्रदान किये हैं। इसकी जानकारी हर देश के नागरिक को होना चाहिए। ऐसा कम ही लोग होंगे जिन्होंने Human Rights का नाम नहीं सुना होगा, मगर इसके बारे में Details में जानकारी कम ही लोगों के पास होगी। आज हम आपको मानवाधिकार क्या होता है (Human Rights in India in Hindi) की जानकारी शेयर कर रहा हूँ। उम्मीद करूंगा कि इस लेखा को पूरा पढ़ेंगे और अपनी प्रतिक्रिया नीचे के कमेंट बॉक्स में लिखेंगे।

Human Rights in India in Hindi

Human Rights (मानव अधिकारों) से अभिप्राय “मौलिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता से है जिसके सभी मानव प्राणी हकदार है। अधिकारों एवं स्वतंत्रताओं के उदाहरण के रूप में जिनकी गणना की जाती है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि Human Rights सभी अधिकारों का एक समूह है। जो हर व्यक्ति को जन्म के साथ ही उसके लिंग, जाति, पंथ, धर्म, राष्ट्र, स्थान या आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना दिया जाता है। यह कानून द्वारा संरक्षित ये अधिकार हर जगह और हर समय लागू होते हैं।

मानवाधिकार क्या हैं Human Rights Kya hai Full Details in Hindi

मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 2 के अनुसार ”मानव अधिकारों” का अर्थ है संविधान के अंतर्गत गांरटित अथवा अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सम्मिलित तथा भारत में न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय जीवन, स्वतंत्रता, समानता तथा व्यक्ति की गरिमा से संबंधित अधिकार. ”अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं” का अर्थ है 16 दिसम्बर 1966 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंगीकृत सिविल एवं राजनैतिक अधिकारों संबंधी अंतराष्ट्रीय प्रसंविदा तथा आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों संबंधी अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदा। दूसरे साफ़ शब्दों में Human Rights किसी भी इंसान की जिंदगी, आजादी, बराबरी और सम्मान का अधिकार है। भारतीय संविधान इस अधिकार की न सिर्फ गारंटी देता है, बल्कि इसे तोड़ने वाले को अदालत सजा देती है।

सबसे पहले कुछ प्रमुख मानवाधिकारों के बारे में जान लें

ऐसे बुनियादी मानवाधिकारों में जीवन का अधिकार, निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार, सक्षम न्यायाधिकरण, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सुरक्षा का अधिकार, संपत्ति का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, शांतिपूर्ण विधानसभा और संघ का अधिकार, विवाह और परिवार का अधिकार, राष्ट्रीयता और इसे बदलने की स्वतंत्रता, भाषण की स्वतंत्रता, भेदभाव से स्वतंत्रता, दासता से स्वतंत्रता, विचारधारा की स्वतंत्रता, अंतरात्मा और धर्म, आंदोलन की स्वतंत्रता, राय और सूचना का अधिकार, पर्याप्त जीवन स्तर के अधिकार और गोपनीयता के साथ हस्तक्षेप से स्वतंत्रता आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। मगर यह हमें पता कैसे चलेगा कि हमारे कौन से अधिकार का उलंघन हुआ है. इसके लिए क्या करना चाहिए।

सबसे पहले हम अपने कुछ बुनियादी Human Rights पर एक नजर डालते हैं-

  • जीवन जीने का अधिकार (Right to live) – हमारे देश के कानून ने प्रत्येक व्यक्ति को अपना स्वतन्त्र जीवन जीने का जन्मसिद्ध अधिकार प्रदान किया है। इसके तहत किसी भी इंसान को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा नहीं मारे जाने का भी अधिकार प्राप्त है।
  • उचित परीक्षण का अधिकार (Right to fair trial) – इस अधिकार के तहत हर व्यक्ति को निष्पक्ष अदालत द्वारा निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार, प्राप्त हैं। उसका मुद्दा उचित समय के भीतर सुनना, वकील के अधिकार, जन सुनवाई के अधिकार और व्याख्या के अधिकार हैं।
  • बोलने की स्वतंत्रता का अधिकार (Right to freedom of speech) – इस देश के हरेक इंसान को स्वतंत्र रूप से बोलने का और जनता में अपनी राय स्वतंत्र रूप से रखने और अपने खिलाफ हो रहे भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है। हालांकि इस अधिकार में कुछ सीमा निर्धारित की गई है, जैसे अश्लीलता, गड़बड़ी और दंगा भड़काना आदि निषेद हैं।
  • शिक्षा का अधिकार (Right to Education) – हरेक व्यक्ति को शिक्षा का अधिकार है। जिसको देश के प्रत्येक नागरिक को शिक्षा मुहैया कराना सरकार का कर्तव्य हैं।
  • सोच, विवेक व धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (Right to freedom of thought, conscience and religion) – हमारे देश के हरेक नागरिकों को स्वतंत्र रूप से सोचने और ईमानदार विश्वासों का निर्माण करने का अधिकार है। हर व्यक्ति को अपनी पसंद के किसी भी धर्म का पालन करने का अधिकार है और समय-समय पर किसी भी समय अपनी स्वतंत्र इच्छा के अनुसार इसे बदलने के लिए स्वतंत्र है। इसके ऊपर क़ानूनी रूप से किसी तरह का कोई दबाव नहीं डाला जा सकता हैं।
  • स्वतंत्रता और बराबर का अधिकार (Freedom and equal rights)- भारत के संविधान के अनुसार देश के सभी लोग गरिमा के मामले में स्वतंत्र और बराबर हैं। कानून के अनुसार यह अधिकार मनुष्य जन्मजात स्वतंत्रता और समानता प्राप्त हैं। इसलिए सभी को अपने बुद्धि और अंतरात्मा की देन के अनुसार आपस में भाईचारे के भाव से बर्ताव करना चाहिए।
  • गुलामी से स्वतंत्रता का अधिकार (Right to freedom from slavery) – किसी भी व्यक्ति को गुलामी या दासता से आजादी का अधिकार है अर्थात किसी भी व्यक्ति को गुलामी या दासता की हालत में नहीं रखा जा सकता, गुलामी-प्रथा और व्यापार पूरी तरह से निषिद्ध होगा।
  • यातना, प्रताड़ना या क्रूरता से आजादी का अधिकार (Right to freedom from torture, torture or cruelty) – किसी को भी शारीरिक यातना नहीं दी जा सकती और न किसी के भी प्रति निर्दय, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार किया जा सकता है।
  • कानून के सामने समानता का अधिकार (Right to Equality before the Law) – हरेक व्यक्ति को हर जगह कानून की निगाह में व्यक्ति के रूप में स्वीकृति-प्राप्ति का अधिकार है।
  • कानून के सामने सभी को समान संरक्षण का अधिकार (Right to equal protection to everyone in law) – देश के कानून की निगाह में सभी समान हैं और सभी बिना भेदभाव के समान कानूनी सुरक्षा के अधिकारी हैं।
  • मनमाने ढंग से की गई गिरफ्तारी, हिरासत में रखने या निर्वासन से आजादी का अधिकार (Arbitrary arrest, detention or freedom from exile) – देश का कानून किसी को भी मनमाने ढंग से गिरफ्तार, नजरबंद, या देश-निष्कासित करने का इजाजत नहीं देता है। ऐसा करना मानवाधिकार का खुला उलंघन हैं।
  • अपराध सिद्ध न होने तक निर्दोष माने जाने का अधिकार – (Right to be innocent until the crime is proved)।
  • उचित सार्वजनिक सुनवाई का अधिकार (Right to Fair Public Hearing)।
  • आंदोलन की स्वतंत्रता (Freedom of movement)।
  • गोपनीयता, परिवार, गृह और पत्राचार में हस्तक्षेप से स्वतंत्रता का अधिकार (Right to freedom from interference in privacy, family, home and correspondence)।
  • अन्य देशों में शरण का अधिकार (Right to refuge in other countries)।
  • राष्ट्रीयता को बदलने की स्वतंत्रता का अधिकार (Right to freedom of change nationality)।
  • विवाह और परिवार के अधिकार (Marriage and family rights)।
  • खुद की संपत्ति रखने का अधिकार (The right to own property)।
  • शांतिपूर्ण सभा और एसोशिएशन (संगठन) बनाने का अधिकार (Right to create peaceful meetings and association (organization)।
  • सरकार में और नि:शुल्क चुनावों में भाग लेने का अधिकार (The right to participate in government and free elections)।
  • विश्वास और धर्म की स्वतंत्रता (Faith and freedom of religion)।
  • सही तरीके से रहने/जीने का अधिकार (Right to live / live right)।
  • समुदाय के सांस्कृतिक जीवन में भाग लेने का अधिकार (Right to Participate in Community Cultural Life)।
  • सामाजिक सुरक्षा का अधिकार (Right to Social Security)।
  • वांछनीय कार्य और ट्रेड यूनियनों में शामिल होने का अधिकार (Desirable work and right to join trade unions।
  • अवकाश और विश्राम का अधिकार (Right to Leisure and Relaxation) Etc।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत कैसे करें?

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ऐसे देखें तो मानवाधिकारों को कानून के द्वारा संरक्षित किया गया है मगर कई बार होता है कि दुरूपयोग किया जाता है। कभी-कभी तो खुद सरकार ही इसका दुरूपयोग करती है। इसके लिए हर केंद्र में National Human Rights Commission और हर प्रत्येक राज्यों में State Human Commission बने हैं। जहां आप शिकायत कर सकते हैं। इसके बारे में आगे बताया जायेगा। उम्मीद करूंगा कि इस जानकारी का लाभ उठायेगें। इसके साथ ही कोई भी सवाल हो तो कमेंट बॉक्स में अवश्य पूछें।

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2 thoughts on “Human Rights in India in Hindi, मानवाधिकार क्या होता है? पूरी जानकारी”

  1. मै गणेश कुमार , विकलांग व्यक्तियों हू , मगध विश्वविद्यालय बोधगया, मे कार्यरत हूं 20 सालों से लेकिन आरक्षण बैकलॉग कोटा के तहत आज तक सेवा नियमित किया गया है। मेरे सामने जो भी कुलपति आते है अपने चहेते को वेतनमान पर नियूकतियां करते रहते हैं हमें संविधान का नियम बताते हुए दरकिनार करते आ रहे हैं मेरे साथ कई बार मानवाधिकार का हनन भी हुआ । मानदेय राशि भी कम दी जाती हैं शोषण भी किया जाता हैं।
    मुझे कानून सहायता किया जाए इसके साथ ही सेवा नियमित करवाने मे सहयोग की जाए।
    विश्वविद्यालय मे रिक्त पदों की संख्या भी पुस्तकालय सहायक आदि समेत है।
    20वषों से शारीरक, मांसिक तौर शोषण का शिकार होते आ रहा हूँ
    अनुरोध
    हर संस्थानों में मानवधिकार से संबंधित आदेश का पालन करने दिया जाए नही करनेवाले अधिकारी पर आथिर्क दंड दिया जाए

    Reply
    • आपने यह नहीं लिखा की आपकी न्युक्ति कैसे की गई है? अगर आपको रेगुलर नहीं कर रहे तो इसके लिए काफी लम्बी लड़ाई की प्रक्रिया है। जिसका फायदा आपके सेवा के टर्म एंड कंडीशन के हिसाब से ही मिल पायेगा। आजकल प्रबंधन चालाकी करके मजदूरों का शोषण करते हैं। इस सम्बन्ध में बहुत सी जानकारी हमारे ब्लॉग और यूट्यूब चैनल पर है। उसको पढ़िए काफी जानकारी मिलेगी।

      Reply

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