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    What is RTI Act 2005 in hindi (सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005) और RTI Kaise Lagaye?

    What is RTI Act 2005 in hindi (सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005) और RTI Kaise Lagaye?

    अक्सर देखा गया है कि किसी भी सरकारी विभाग में कोई भी पंगा होता है तो लोग गुस्से में कहते हैं कि RTI लगा दूंगा. कुछ लोग लगाते भी हैं. यह बात सौ फीसदी सही है कि इस कानून को सरकारी विभाग में चल रहे गड़बड़ी को उजागर करने में हथियार के तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. उसकी लिए चंद जानकारी चाहिए और आपकी तेज दिमाग का कमाल, फिर देखिये कैसे नहीं हिलता है System.

    What is RTI Act 2005 in hindi (सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005) और RTI Kaise Lagaye?

    ऐसे तो हमसभी लोगों को Sarkari  विभाग से Record से सम्बन्धी Information के लिए RTI लगाने की जरुरत होती है मगर कुछ लोग जानकारी के आभाव में ऐसे कर नहीं पाते है. आपके विशेष अनुरोध पर RTI ACT 2005 (आरटीआईएक्ट 2005) के बारे में जो कि Aam Aadmi का हथियार हैं, उसके बारे में जानकारी उपलब्ध करायी जा रही हैं : सूचना का अधिकार अधिनियम (Right to Information Act) भारत के संसद द्वारा पारित एक कानून है जो 12 अक्तूबर, 2005 को लागू हुआ (15 जून, 2005 को इसके कानून बनने के 120 वें दिन). भारत में भ्रटाचार को रोकने और समाप्त करने के लिये इसे बहुत ही प्रभावी कदम बताया जाता है. इस नियम के द्वारा भारत के सभी नागरिकों को सरकारी Records और प्रपत्रों में दर्ज Information को देखने और उसे प्राप्त करने का Right प्रदान किया गया है. जम्मू एवं कश्मीर मे यह जम्मू एवं कश्मीर सूचना का अधिकार अधिनियम 2012 के अन्तर्गत लागू है.

    RTI Act 2005 : सूचना के अधिकार पर अक्सर पूछे जाने वाले कुछ प्रश्न-

    सूचना का अधिकार क्या है? (What is RTI Act in hindi)

    संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत सूचना का अधिकार मौलिक अधिकारों का एक भाग है. अनुच्छेद 19(1) के अनुसार प्रत्येक नागरिक को बोलने व अभिव्यक्ति का अधिकार है. 1976 में Supreme Court ने "राज नारायण विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकार" मामले में कहा है कि लोग कह और अभिव्यक्त नहीं कर सकते जब तक कि वो न जानें. इसी कारण सूचना का अधिकार अनुच्छेद 19 में छुपा है. इसी मामले में, Supreme Court  ने आगे कहा कि भारत एक लोकतंत्र है. लोग मालिक हैं. इसलिए लोगों को यह जानने का Rights  है कि Governments जो उनकी Service के लिए हैं, क्या कर रहीं हैं? व प्रत्येक नागरिक कर/ टैक्स देता है. यहाँ तक कि एक गली में भीख मांगने वाला भिखारी भी Tax देता है जब वो बाज़ार से साबुन खरीदता है.(बिक्री कर, उत्पाद शुल्क आदि के रूप में). नागरिकों के पास इस प्रकार यह जानने का Rights  है कि उनका Money  किस प्रकार खर्च हो रहा है. इन तीन सिद्धांतों को Supreme Court ने रखा कि सूचना का अधिकार हमारे Fundamental Rights का एक हिस्सा हैं.

    यदि RTI Act एक Fundamental Rights है, तो हमें यह Rights देने के लिए एक Law की आवश्यकता क्यों है?

    ऐसा इसलिए है क्योंकि यदि आप किसी Government Department में जाकर किसी Officer  से कहते हैं, "RTI मेरा Fundamental Right है, और मैं इस Country का मालिक हूँ. इसलिए मुझे आप कृपया अपनी File दिखाइए", तो हमें नहीं लगता कि वह ऐसा नहीं करेगा. व संभवतः वह आपको अपने कमरे से निकाल देगा. इसलिए हमें एक ऐसे तंत्र या प्रक्रिया की आवश्यकता है जिसके तहत हम अपने इस Rights का use कर सकें. RTI Act 2005, जो 13 अक्टूबर 2005 को लागू हुआ हमें वह तंत्र प्रदान करता है. इस प्रकार सूचना का अधिकार हमें कोई नया अधिकार नहीं देता. यह केवल उस प्रक्रिया का उल्लेख करता है कि हम कैसे सूचना मांगें, कहाँ से मांगे, कितना शुल्क दें आदि.


    RTI Act 2005 कब लागू हुआ?

    केंद्रीय सूचना का अधिकार 12 अक्टूबर 2005 को लागू हुआ. हालांकि 9 राज्य सरकारें जम्मू कश्मीर, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम और गोवा पहले ही कानून पारित कर चुकीं थीं.

    RTI Act 2005 के अर्न्तगत कौन से अधिकार आते हैं? in Hindi

    RTI Act 2005 ( (सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005) प्रत्येक नागरिक को शक्ति प्रदान करता है कि वो:

    • सरकार से कुछ भी पूछे या कोई भी सूचना मांगे.
    • किसी भी सरकारी निर्णय की प्रति ले.
    • किसी भी सरकारी दस्तावेज का निरीक्षण करे.
    • किसी भी सरकारी कार्य का निरीक्षण करे.
    • किसी भी सरकारी कार्य के पदार्थों के नमूने ले.
    • सूचना के अधिकार के अर्न्तगत कौन से अधिकार आते हैं?
    केन्द्रीय कानून जम्मू कश्मीर राज्य के अतिरिक्त पूरे देश पर लागू होता है. सभी इकाइयां जो संविधान, या अन्य कानून या किसी सरकारी अधिसूचना के अधीन बनी हैं या सभी इकाइयां जिनमें गैर सरकारी संगठन शामिल हैं जो सरकार के हों, सरकार द्वारा नियंत्रित या वित्त- पोषित किये जाते हों.

    "वित्त पोषित" क्या है?

    इसकी परिभाषा न ही सूचना का अधिकार कानून और न ही किसी अन्य कानून में दी गयी है. इसलिए यह मुद्दा समय के साथ शायद किसी न्यायालय के आदेश द्वारा ही सुलझ जायेगा.

    क्या निजी इकाइयां सूचना के अधिकार के अर्न्तगत आती हैं?


    सभी निजी इकाइयां, जोकि सरकार की हैं, सरकार द्वारा नियंत्रित या वित्त- पोषित की जाती हैं सीधे ही इसके अर्न्तगत आती हैं. अन्य अप्रत्यक्ष रूप से इसके अर्न्तगत आती हैं. अर्थात, यदि कोई सरकारी विभाग किसी निजी इकाई से किसी अन्य कानून के तहत सूचना ले सकता हो तो वह सूचना कोई नागरिक सूचना के अधिकार के अर्न्तगत उस सरकारी विभाग से ले सकता है.

    क्या सरकारी दस्तावेज गोपनीयता कानून 1923 सूचना के अधिकार में बाधा नहीं है?


    नहीं, RTI Act 2005 (सूचना का अधिकार अधिनियम 2005) के अनुच्छेद 22 के अनुसार सूचना का अधिकार कानून सभी मौजूदा कानूनों का स्थान ले लेगा.

    क्या PIO सूचना देने से मना कर सकता है?

    एक PIO सूचना देने से मना उन 11 विषयों के लिए कर सकता है जो सूचना का अधिकार अधिनियम के अनुच्छेद 8 में दिए गए हैं. इनमें विदेशी सरकारों से प्राप्त गोपनीय सूचना, देश की सुरक्षा, रणनीतिक, वैज्ञानिक या आर्थिक हितों की दृष्टि से हानिकारक सूचना, विधायिका के विशेषाधिकारों का उल्लंघन करने वाली सूचनाएं आदि. सूचना का अधिकार अधिनियम की दूसरी अनुसूची में उन 18 अभिकरणों की सूची दी गयी है जिन पर ये लागू नहीं होता. हालांकि उन्हें भी वो सूचनाएं देनी होंगी जो भ्रष्टाचार के आरोपों व मानवाधिकारों के उल्लंघन से सम्बंधित हों.

    क्या अधिनियम विभक्त सूचना के लिए कहता है?

    हाँ, सूचना का अधिकार अधिनियम के दसवें अनुभाग के अंतर्गत दस्तावेज के उस भाग तक पहुँच बनायीं जा सकती है जिनमें वे सूचनाएं नहीं होतीं जो इस अधिनियम के तहत भेद प्रकाशन से अलग रखी गयीं हैं.

    What is RTI Act 2005 in hindi (सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005) और RTI Kaise Lagaye?



    क्या फाइलों की टिप्पणियों तक पहुँच से मना किया जा सकता है?


    नहीं, फाइलों की टिप्पणियां सरकारी फाइल का अभिन्न अंग हैं व इस अधिनियम के तहत भेद प्रकाशन की विषय वस्तु हैं. ऐसा केंद्रीय सूचना आयोग ने 31 जनवरी 2006 के अपने एक आदेश में स्पष्ट कर दिया है.

    मुझे सूचना कौन देगा?

    एक या अधिक अधिकारियों को प्रत्येक सरकारी विभाग में जन सूचना अधिकारी (पीआईओ) का पद दिया गया है. ये जन सूचना अधिकारी प्रधान अधिकारियों के रूप में कार्य करते हैं. आपको अपनी अर्जी इनके पास दाखिल करनी होती है. यह उनका उत्तरदायित्व होता है कि वे उस विभाग के विभिन्न भागों से आपके द्वारा मांगी गयी जानकारी इकठ्ठा करें व आपको प्रदान करें. इसके अलावा, कई अधिकारियों को सहायक जन सूचना अधिकारी के पद पर सेवायोजित किया गया है. उनका कार्य केवल जनता से अर्जियां स्वीकारना व उचित पीआईओ के पास भेजना है.

    अपनी अर्जी मैं कहाँ जमा करुँ?

    आप ऐसा पीआईओ या एपीआईओ के पास कर सकते हैं. केंद्र सरकार के विभागों के मामलों में, 629 डाकघरों को एपीआईओ बनाया गया है. अर्थात् आप इन डाकघरों में से किसी एक में जाकर आरटीआई पटल पर अपनी अर्जी फीस जमा करा सकते हैं. वे आपको एक रसीद आभार जारी करेंगे और यह उस डाकघर का उत्तरदायित्व है कि वो उसे उचित पीआईओ के पास भेजे.

    क्या इसके लिए कोई फीस है? मैं इसे कैसे जमा करुँ?

    हाँ, एक अर्ज़ी फीस होती है. केंद्र सरकार के विभागों के लिए यह 10रु. है. हालांकि विभिन्न राज्यों ने भिन्न फीसें रखीं हैं. सूचना पाने के लिए, आपको 2रु. प्रति सूचना पृष्ठ केंद्र सरकार के विभागों के लिए देना होता है. यह विभिन्न राज्यों के लिए अलग- अलग है. इसी प्रकार दस्तावेजों के निरीक्षण के लिए भी फीस का प्रावधान है. निरीक्षण के पहले घंटे की कोई फीस नहीं है लेकिन उसके पश्चात् प्रत्येक घंटे या उसके भाग की 5रु. प्रतिघंटा फीस होगी. यह केन्द्रीय कानून के अनुसार है. प्रत्येक राज्य के लिए, सम्बंधित राज्य के नियम देखें. आप फीस नकद में, डीडी या बैंकर चैक या पोस्टल आर्डर जो उस जन प्राधिकरण के पक्ष में देय हो द्वारा जमा कर सकते हैं. कुछ राज्यों में, आप कोर्ट फीस टिकटें खरीद सकते हैं अपनी अर्ज़ी पर चिपका सकते हैं. ऐसा करने पर आपकी फीस जमा मानी जायेगी. आप तब अपनी अर्ज़ी स्वयं या डाक से जमा करा सकते हैं.

    मुझे क्या करना चाहिए यदि पीआईओ या सम्बंधित विभाग मेरी अर्ज़ी स्वीकार करे?

    आप इसे डाक द्वारा भेज सकते हैं. आप इसकी औपचारिक शिकायत सम्बंधित सूचना आयोग को भी अनुच्छेद 18 के तहत करें. सूचना आयुक्त को उस अधिकारी पर 25000रु. का दंड लगाने का अधिकार है जिसने आपकी अर्ज़ी स्वीकार करने से मना किया था.

    क्या सूचना पाने के लिए अर्ज़ी का कोई प्रारूप है?

    केंद्र सरकार के विभागों के लिए, कोई प्रारूप नहीं है. आपको एक सादा कागज़ पर एक सामान्य अर्ज़ी की तरह ही अर्ज़ी देनी चाहिए. हालांकि कुछ राज्यों और कुछ मंत्रालयों विभागों ने प्रारूप निर्धारित किये हैं. आपको इन प्रारूपों पर ही अर्ज़ी देनी चाहिए. कृपया जानने के लिए सम्बंधित राज्य के नियम पढें.

    मैं सूचना के लिए कैसे अर्ज़ी दूं?

    एक साधारण कागज़ पर अपनी अर्ज़ी बनाएं और इसे पीआईओ के पास स्वयं या डाक द्वारा जमा करें. (अपनी अर्ज़ी की एक प्रति अपने पास निजी सन्दर्भ के लिए अवश्य रखें)

    मैं अपनी अर्ज़ी की फीस कैसे दे सकता हूँ?

    प्रत्येक राज्य का अर्ज़ी फीस जमा करने का अलग तरीका है. साधारणतया, आप अपनी अर्ज़ी की फीस ऐसे दे सकते हैं:

    • स्वयं नकद भुगतान द्वारा (अपनी रसीद लेना न भूलें)
    • डाक द्वारा:
    • डिमांड ड्राफ्ट से
    • भारतीय पोस्टल आर्डर से
    • मनी आर्डर से [केवल कुछ राज्यों में]
    • कोर्ट फीस टिकट से [केवल कुछ राज्यों में]
    • बैंकर चैक से


    कुछ राज्य सरकारों ने कुछ खाते निर्धारित किये हैं. आपको अपनी फीस इन खातों में जमा करानी होती है. इसके लिए, आप एसबीआई की किसी शाखा में जा सकते हैं और राशि उस खाते में जमा करा सकते हैं और जमा रसीद अपनी आरटीआई अर्ज़ी के साथ लगा सकते हैं. या आप अपनी आरटीआई अर्ज़ी के साथ उस विभाग के पक्ष में देय डीडी या एक पोस्टल आर्डर भी लगा सकते हैं.

    क्या मैं अपनी अर्जी केवल पीआईओ के पास ही जमा कर सकता हूँ?


    नहीं, पीआईओ के उपलब्ध न होने की स्थिति में आप अपनी अर्जी एपीआईओ या अन्य किसी अर्जी लेने के लिए नियुक्त अधिकारी के पास अर्जी जमा कर सकते हैं.


    क्या करूँ यदि मैं अपने पीआईओ या एपीआईओ का पता न लगा पाऊँ?


    यदि आपको पीआईओ या एपीआईओ का पता लगाने में कठिनाई होती है तो आप अपनी अर्जी पीआईओ c/o विभागाध्यक्ष को प्रेषित कर उस सम्बंधित जन प्राधिकरण को भेज सकते हैं. विभागाध्यक्ष को वह अर्जी सम्बंधित पीआईओ के पास भेजनी होगी.


    क्या मुझे अर्जी देने स्वयं जाना होगा?


    आपके राज्य के फीस जमा करने के नियमानुसार आप अपनी अर्जी सम्बंधित राज्य के विभाग में अर्जी के साथ डीडी, मनी आर्डर, पोस्टल आर्डर या कोर्ट फीस टिकट संलग्न करके डाक द्वारा भेज सकते हैं. केंद्र सरकार के विभागों के मामलों में, 629 डाकघरों को एपीआईओ बनाया गया है. अर्थात् आप इन डाकघरों में से किसी एक में जाकर आरटीआई पटल पर अपनी अर्जी व फीस जमा करा सकते हैं. वे आपको एक रसीद व आभार जारी करेंगे और यह उस डाकघर का उत्तरदायित्व है कि वो उसे उचित पीआईओ के पास भेजे.


    क्या सूचना प्राप्ति की कोई समय सीमा है?


    हाँ, यदि आपने अपनी अर्जी पीआईओ को दी है, आपको 30 दिनों के भीतर सूचना मिल जानी चाहिए. यदि आपने अपनी अर्जी सहायक पीआईओ को दी है तो सूचना 35 दिनों के भीतर दी जानी चाहिए. उन मामलों में जहाँ सूचना किसी एकल के जीवन और स्वतंत्रता को प्रभावित करती हो, सूचना 48 घंटों के भीतर उपलब्ध हो जानी चाहिए.

    क्या मुझे कारण बताना होगा कि मुझे फलां सूचना क्यों चाहिए?

    बिलकुल नहीं, आपको कोई कारण या अन्य सूचना केवल अपने संपर्क विवरण (जो हैं नाम, पता, फोन न.) के अतिरिक्त देने की आवश्यकता नहीं है. अनुच्छेद 6(2) स्पष्टतः कहता है कि प्रार्थी से संपर्क विवरण के अतिरिक्त कुछ नहीं पूछा जायेगा.

    क्या पीआईओ मेरी आरटीआई अर्जी लेने से मना कर सकता है?

    नहीं, पीआईओ आपकी आरटीआई अर्जी लेने से किसी भी परिस्थिति में मना नहीं कर सकता. चाहें वह सूचना उसके विभाग/ कार्यक्षेत्र में न आती हो, उसे वह स्वीकार करनी होगी. यदि अर्जी उस पीआईओ से सम्बंधित न हो, उसे वह उपयुक्त पीआईओ के पास 5 दिनों के भीतर अनुच्छेद 6(2) के तहत भेजनी होगी.

    इस देश में कई अच्छे कानून हैं लेकिन उनमें से कोई कानून कुछ नहीं कर सका. आप कैसे सोचते हैं कि ये कानून करेगा?

    यह कानून पहले ही कर रहा है. ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार कोई कानून किसी अधिकारी की अकर्मण्यता के प्रति जवाबदेही निर्धारित करता है. यदि सम्बंधित अधिकारी समय पर सूचना उपलब्ध नहीं कराता है, उस पर 250रु. प्रतिदिन के हिसाब से सूचना आयुक्त द्वारा जुर्माना लगाया जा सकता है. यदि दी गयी सूचना गलत है तो अधिकतम 25000रु. तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. जुर्माना आपकी अर्जी गलत कारणों से नकारने या गलत सूचना देने पर भी लगाया जा सकता है. यह जुर्माना उस अधिकारी के निजी वेतन से काटा जाता है.

    क्या अब तक कोई जुमाना लगाया गया है?

    हाँ, कुछ अधिकारियों पर केन्द्रीय व राज्यीय सूचना आयुक्तों द्वारा जुर्माना लगाया गया है.

    क्या पीआईओ पर लगे जुर्माने की राशि प्रार्थी को दी जाती है?

    नहीं, जुर्माने की राशि सरकारी खजाने में जमा हो जाती है. हांलांकि अनुच्छेद 19 के तहत, प्रार्थी मुआवजा मांग सकता है.

    मैं क्या कर सकता हूँ यदि मुझे सूचना न मिले?

    यदि आपको सूचना न मिले या आप प्राप्त सूचना से संतुष्ट न हों, आप अपीलीय अधिकारी के पास सूचना का अधिकार अधिनियम के अनुच्छेद 19(1) के तहत एक अपील दायर कर सकते हैं.

    पहला अपीलीय अधिकारी कौन होता है?

    प्रत्येक जन प्राधिकरण को एक पहला अपीलीय अधिकारी बनाना होता है. यह बनाया गया अधिकारी पीआईओ से वरिष्ठ रैंक का होता है.

    क्या प्रथम अपील का कोई प्रारूप होता है?

    नहीं, प्रथम अपील का कोई प्रारूप नहीं होता (लेकिन कुछ राज्य सरकारों ने प्रारूप जारी किये हैं). एक सादा पन्ने पर प्रथम अपीली अधिकारी को संबोधित करते हुए अपनी अपीली अर्जी बनाएं. इस अर्जी के साथ अपनी मूल अर्जी व पीआईओ से प्राप्त जैसे भी उत्तर (यदि प्राप्त हुआ हो) की प्रतियाँ लगाना न भूलें.

    क्या मुझे प्रथम अपील की कोई फीस देनी होगी?

    नहीं, आपको प्रथम अपील की कोई फीस नहीं देनी होगी, कुछ राज्य सरकारों ने फीस का प्रावधान किया है.

    कितने दिनों में मैं अपनी प्रथम अपील दायर कर सकता हूँ?

    आप अपनी प्रथम अपील सूचना प्राप्ति के 30 दिनों व आरटीआई अर्जी दाखिल करने के 60 दिनों के भीतर दायर कर सकते हैं.

    क्या करें यदि प्रथम अपीली प्रक्रिया के बाद मुझे सूचना न मिले?

    यदि आपको प्रथम अपील के बाद भी सूचना न मिले तो आप द्वितीय अपीली चरण तक अपना मामला ले जा सकते हैं. आप प्रथम अपील सूचना मिलने के 30 दिनों के भीतर व आरटीआई अर्जी के 60 दिनों के भीतर (यदि कोई सूचना न मिली हो) दायर कर सकते हैं.

    द्वितीय अपील क्या है?

    द्वितीय अपील आरटीआई अधिनियम के तहत सूचना प्राप्त करने का अंतिम विकल्प है. आप द्वितीय अपील सूचना आयोग के पास दायर कर सकते हैं. केंद्र सरकार के विभागों के विरुद्ध आपके पास केद्रीय सूचना आयोग है. प्रत्येक राज्य सरकार के लिए, राज्य सूचना आयोग हैं.

    क्या द्वितीय अपील के लिए कोई प्रारूप है?

    नहीं, द्वितीय अपील के लिए कोई प्रारूप नहीं है (लेकिन राज्य सरकारों ने द्वितीय अपील के लिए भी प्रारूप निर्धारित किए हैं). एक सादा पन्ने पर केद्रीय या राज्य सूचना आयोग को संबोधित करते हुए अपनी अपीली अर्जी बनाएं. द्वितीय अपील दायर करने से पूर्व अपीली नियम ध्यानपूर्वक पढ लें. आपकी द्वितीय अपील निरस्त की जा सकती है यदि वह अपीली नियमों को पूरा नहीं करती है.

    क्या मुझे द्वितीय अपील के लिए फीस देनी होगी?

    नहीं, आपको द्वितीय अपील के लिए कोई फीस नहीं देनी होगी. हांलांकि कुछ राज्यों ने इसके लिए फीस निर्धारित की है.

    मैं कितने दिनों में द्वितीय अपील दायर कर सकता हूँ?

    आप प्रथम अपील के निष्पादन के 90 दिनों के भीतर या उस तारीख के 90 दिनों के भीतर कि जब तक आपकी प्रथम अपील निष्पादित होनी थी, द्वितीय अपील दायर कर सकते हैं.

    यह कानून कैसे मेरे कार्य पूरे होने में मेरी सहायता करता है?

    यह कानून कैसे रुके हुए कार्य पूरे होने में सहायता करता है अर्थात् वह अधिकारी क्यों अब वह आपका रुका कार्य करता है जो वह पहले नहीं कर रहा था?

    RTI कैसे लगायें इसका एक उदाहरण ( RTI Kaise Lagaye)-


    आइए सुरजीत श्यामल का का मामला लेते हैं. उसे राशन कार्ड नहीं दिया जा रहा था. लेकिन जब उसने आरटीआई के तहत अर्जी दी, उसे एक सप्ताह के भीतर राशन कार्ड दे दिया गया. अब यह जानना जरुरी हो गया है कि आखिर सुरजीत ने आरटीआई में ऐसा क्या पूछा? उसने निम्न प्रश्न पूछे:


    1. मैंने एक डुप्लीकेट राशन कार्ड के लिए 27 फरवरी 2004 को अर्जी दी. कृपया मुझे मेरी अर्जी पर हुई दैनिक उन्नति बताएं अर्थात् मेरी अर्जी किस अधिकारी पर कब पहुंची, उस अधिकारी पर यह कितने समय रही और उसने उतने समय क्या किया?

    2. नियमों के अनुसार, मेरा कार्ड 10 दिनों के भीतर बन जाना चाहिए था. हांलांकि अब तीन माह से अधिक का समय हो गया है. कृपया उन अधिकारियों के नाम व पद बताएं जिनसे आशा की जाती है कि वे मेरी अर्जी पर कार्रवाई करते व जिन्होंने ऐसा नहीं किया?

    3. इन अधिकारियों के विरुद्ध अपना कार्य न करने व जनता के शोषण के लिए क्या कार्रवाई की जायेगी? वह कार्रवाई कब तक की जायेगी?

    4. अब मुझे कब तक अपना कार्ड मिल जायेगा?

    साधारण परिस्थितियों में, ऐसी एक अर्जी कूड़ेदान में फेंक दी जाती. लेकिन यह कानून कहता है कि सरकार को 30 दिनों में जवाब देना होगा. यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, उनके वेतन में कटौती की जा सकती है. अब ऐसे प्रश्नों का उत्तर देना आसान नहीं होगा.

    पहला प्रश्न है- कृपया मुझे मेरी अर्जी पर हुई दैनिक उन्नति बताएं.

    कोई उन्नति हुई ही नहीं है. लेकिन सरकारी अधिकारी यह इन शब्दों में लिख ही नहीं सकते कि उन्होंने कई महीनों से कोई कार्रवाई नहीं की है. वरन यह कागज़ पर गलती स्वीकारने जैसा होगा.

    अगला प्रश्न है- कृपया उन अधिकारियों के नाम व पद बताएं जिनसे आशा की जाती है कि वे मेरी अर्जी पर कार्रवाई करते व जिन्होंने ऐसा नहीं किया.

    यदि सरकार उन अधिकारियों के नाम व पद बताती है, उनका उत्तरदायित्व निर्धारित हो जाता है. एक अधिकारी अपने विरुद्ध इस प्रकार कोई उत्तरदायित्व निर्धारित होने के प्रति काफी सतर्क होता है. इस प्रकार, जब कोई इस तरह अपनी अर्जी देता है, उसका रुका कार्य संपन्न हो जाता है.

    मुझे सूचना प्राप्ति के पश्चात् क्या करना चाहिए?
    इसके लिए कोई एक उत्तर नहीं है. यह आप पर निर्भर करता है कि आपने वह सूचना क्यों मांगी व यह किस प्रकार की सूचना है. प्राय: सूचना पूछने भर से ही कई वस्तुएं रास्ते में आने लगतीं हैं. उदाहरण के लिए, केवल अपनी अर्जी की स्थिति पूछने भर से आपको अपना पासपोर्ट या राशन कार्ड मिल जाता है. कई मामलों में, सड़कों की मरम्मत हो जाती है जैसे ही पिछली कुछ मरम्मतों पर खर्च हुई राशि के बारे में पूछा जाता है. इस तरह, सरकार से सूचना मांगना व प्रश्न पूछना एक महत्वपूर्ण चरण है, जो अपने आप में कई मामलों में पूर्ण है.

    लेकिन मानिये यदि आपने आरटीआई से किसी भ्रष्टाचार या गलत कार्य का पर्दाफ़ाश किया है, आप सतर्कता एजेंसियों, सीबीआई को शिकायत कर सकते हैं या एफ़आईआर भी करा सकते हैं. लेकिन देखा गया है कि सरकार दोषी के विरुद्ध बारम्बार शिकायतों के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं करती. यद्यपि कोई भी सतर्कता एजेंसियों पर शिकायत की स्थिति आरटीआई के तहत पूछकर दवाब अवश्य बना सकता है. हांलांकि गलत कार्यों का पर्दाफाश मीडिया के जरिए भी किया जा सकता है. हांलांकि दोषियों को दंड देने का अनुभव अधिक उत्साहजनक है. लेकिन एक बात पक्की है कि इस प्रकार सूचनाएं मांगना और गलत कामों का पर्दाफाश करना भविष्य को संवारता है. अधिकारियों को स्पष्ट सन्देश मिलता है कि उस क्षेत्र के लोग अधिक सावधान हो गए हैं और भविष्य में इस प्रकार की कोई गलती पूर्व की भांति छुपी नहीं रहेगी. इसलिए उनके पकडे जाने का जोखिम बढ जाता है.

    क्या लोगों को निशाना बनाया गया है जिन्होंने आरटीआई का प्रयोग किया व भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया?
    हाँ, ऐसे कुछ उदाहरण हैं जिनमें लोगों को शारीरिक हानि पहुंचाई गयी जब उन्होंने भ्रष्टाचार का बड़े पैमाने पर पर्दाफाश किया. लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि प्रार्थी को हमेशा ऐसा भय झेलना होगा. अपनी शिकायत की स्थिति या अन्य समरूपी मामलों की जानकारी लेने के लिए अर्जी लगाने का अर्थ प्रतिकार निमंत्रित करना नहीं है. ऐसा तभी होता है जब सूचना नौकरशाह- ठेकेदार गठजोड़ या किसी प्रकार के माफ़िया का पर्दाफाश कर सकती हो कि प्रतिकार की सम्भावना हो.

    तब मैं आरटीआई का प्रयोग क्यों करुँ?
    पूरा तंत्र इतना सड- गल चुका है कि यदि हम सभी अकेले या मिलकर अपना प्रयत्न नहीं करेंगे, यह कभी नहीं सुधरेगा. यदि हम ऐसा नहीं करेंगे, तो कौन करेगा? हमें करना है. लेकिन हमें ऐसा रणनीति से व जोखिम को कम करके करना होगा. व अनुभव से, कुछ रणनीतियां व सुरक्षाएं उपलब्ध हैं.

    ये रणनीतियां क्या हैं?
    कृपया आगे बढें और किसी भी मुद्दे के लिए आरटीआई अर्जी दाखिल करें. साधारणतया, कोई आपके ऊपर एकदम हमला नहीं करेगा. पहले वे आपकी खुशामद करेंगे या आपको जीतेंगे. तो आप जैसे ही कोई असुविधाजनक अर्जी दाखिल करते हैं, कोई आपके पास बड़ी विनम्रता के साथ उस अर्जी को वापिस लेने की विनती करने आएगा. आपको उस व्यक्ति की गंभीरता और स्थिति का अंदाजा लगा लेना चाहिए. यदि आप इसे काफी गंभीर मानते हैं, अपने 15 मित्रों को भी तुंरत उसी जन प्राधिकरण में उसी सुचना के लिए अर्जी देने के लिए कहें. बेहतर होगा यदि ये 15 मित्र भारत के विभिन्न भागों से हों. अब, आपके देश भर के 15 मित्रों को डराना किसी के लिए भी मुश्किल होगा. यदि वे 15 में से किसी एक को भी डराते हैं, तो और लोगों से भी अर्जियां दाखिल कराएं. आपके मित्र भारत के अन्य हिस्सों से अर्जियां डाक से भेज सकते हैं. इसे मीडिया में व्यापक प्रचार दिलाने की कोशिश करें. इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपको वांछित जानकारी मिलेगी व आप जोखिमों को कम कर सकेंगे.

    क्या लोग जन सेवकों का भयादोहन नहीं करेंगे?
    आईए हम स्वयं से पूछें- आरटीआई क्या करता है? यह केवल जनता में सच लेकर आता है. यह कोई सूचना उत्पन्न नहीं करता. यह केवल परदे हटाता है व सच जनता के सामने लाता है. क्या वह गलत है? इसका दुरूपयोग कब किया जा सकता है? केवल यदि किसी अधिकारी ने कुछ गलत किया हो और यदि यह सूचना जनता में बाहर आ जाये. क्या यह गलत है यदि सरकार में की जाने वाली गलतियाँ जनता में आ जाएं व कागजों में छिपाने की बजाय इनका पर्दाफाश हो सके. हाँ, एक बार ऐसी सूचना किसी को मिल जाए तो वह जा सकता है व अधिकारी को ब्लैकमेल कर सकता है. लेकिन हम गलत अधिकारियों को क्यों बचाना चाहते है? यदि किसी अन्य को ब्लैकमेल किया जाता है, उसके पास भारतीय दंड संहिता के तहत ब्लैकमेलर के विरुद्ध एफ़आईआर दर्ज करने के विकल्प मौजूद हैं. उस अधिकारी को वह करने दीजिये. हांलांकि हम किसी अधिकारी को किसी ब्लैकमेलर द्वारा ब्लैकमेल किये जाने की संभावनाओं को सभी मांगी गयी सूचनाओं को वेबसाइट पर डालकर कम कर सकते हैं. एक ब्लैकमेलर किसी अधिकारी को तभी ब्लैकमेल कर पायेगा जब केवल वही उस सूचना को ले पायेगा व उसे सार्वजनिक करने की धमकी देगा. लेकिन यदि उसके द्वारा मांगी गयी सूचना वेबसाइट पर डाल दी जाये तो ब्लैकमेल करने की सम्भावना कम हो जाती है.

    क्या सरकार के पास आरटीआई अर्जियों की बाढ नहीं आ जायेगी और यह सरकारी तंत्र को जाम नहीं कर देगी?
    ये डर काल्पनिक हैं. 65 से अधिक देशों में आरटीआई कानून हैं. संसद में पारित किए जाने से पूर्व भारत में भी 9 राज्यों में आरटीआई कानून थे. इन में से किसी सरकार में आरटीआई अर्जियों की बाढ नहीं आई. ऐसे डर इस कल्पना से बनते हैं कि लोगों के पास करने को कुछ नहीं है व वे बिलकुल खाली.

    "अगर आपको कभी भी आरटीआई लगाने की जरुरत हो और इसमें कोई परेशानी हो तो हमसे बेहिचक संपर्क कर सकते हैं. इसके लिए नीचे कमेंट बॉक्स में अपना नाम और नंबर पोस्ट करें". 

    आपके पास अगर कोई सवाल या सुझाव हो तो जरूर पूछे. आगे इसी  तरह की जानकारी पाने के लिए इस ब्लॉग के सबसे नीचे बॉक्स में अपने ईमेल आईडी submit करें. जिसके बाद आपके उसी ईमेल आईडी पर एक कन्फर्मेशन ईमेल जायेगा. जिसको आपको कन्फर्म करना होगा. यह बिलकुल मुफ्त है. उसके बाद हमारा हर पोस्ट आपको ईमेल के द्वारा मिल जाया करेगा.

    (उपरोक्त आर्टिकल और जानकारी विभिन्न माध्यम में लिए लिया गया है.)

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    10 comments:

    1. जनता के हित मे जागृति का एक सराहनीय कदम

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      Replies
      1. धन्यबाद सर...कृपया अपने साथियों से भी जानकारी साझा करें तभी इस पोस्ट का मकसद पूरा हो पायेगा..आते रहियेगा

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    2. बहुत बढ़िया सर..., सर मुझे आपके मार्गदर्शन की आवश्यकता है क्योंकि मुझे दो डिपार्टमेंट में आरटीआई लगाना है एक एमएलए ऑफिस पर और दूसरा एजुकेशन डिपार्टमेंट पर क्या आप इस बारे में मेरा मार्गदर्शन कर सकते हैं

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      1. जनप्रतिनिधि होते हैं. वो आरटीआई के दायरे में नहीं आते. हाँ आप उनके द्वारा किये गए कामों का ब्योरा बीडीए ऑफिस, एसडीओ ऑफिस में मांग सकते हैं. हाँ शिक्षा विभाग में आप बेहिचक आरटीआई लगा सकते हैं. एप्लीकेशन कैसे लिखें इसके लिए हमारे इस आर्टिकल को पढ़िए - https://www.workervoice.in/2018/02/rti-application-format-in-hindi.html

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    3. MUJE MERA UAN NUMBER OR PASSWORD CHAHEYE BUT ME RTI KARU TO KYA MARE OFFICE ME ENQURI HO SAKTE HAI

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    4. E mail: omganeshay18@gmail.com
      8383892691
      ashu kaushik 36 years age
      sir, Mi father age +80 years, delhi-110036. 2 brother 2 sister all married, mera papa ka pass currently 4 house hai (600 Guj property), phala 6 house tha 1 ghar big sister ko da diya propblem start, sir agriculture 2 begha jamen bacha papa na 72 lak in 2013 1 ghar bacha 13.5 lak 1 year., papa ka pasa kaha jata koi poochana wala nahi, ghar main jija aur bada sister ka interfair., aab 4 house hai (600 guj) muja 50 guj house papa na diya jija na apna name karwa liya muja 70,000 rs diya aur house girdawar jija na sister ka name karwa liya., mera hissa khaa gaya. jija patwari ka post pa tha bola mera pa galat work ho gaya manish sidodiya muja suspend kar daga, mera papa sa 8 lak lay gaya manish sisodiya ko diya aaj saket main girdawar post,
      ghar main jija aur sister ka chalta hai. mera hissa khaa gya, mera shade huwa tha 2008 main mera jija na ghar basna nahi diya mera, papa ko bola delhi universty area ka wife hai sahi nahi hai divorce kar do, sir muja IHBAS mental hospital main 19 month jija na dalwa diya, yaha sa doctor na bhaga diya jija ka pass gaya 2 bar muja IHBAS mental hospital main dal diya, jija powerful ghar main chalta hai, divorce case main 2.5 year tihar jail main dalva diya, mera badda sister and jija Girdawar ka niyat kharab hai property. main 4 years sa delhi main live alone 50 guj house, vo house be mera jija na mera sister ka name karwa liya dhoka se ?
      jija papa ko khata hai main chota sala ka govt. job lagwa dunga emotional pagal bana raha hai. jija aur sister na mera papa aur muja asa ulzaa diya jasa patang ka rasee ulaaz jata hai sulaz nahi sakhata rasee tutagaa tabe sulzagaa, rasee tutna matlab 1 ka death. sir family problem bahoot bhad gaya. mera age 36 years abi 36 years aur muja jena hai apna sapna pura karna hai...? insan azad hai for his dream., jija aur sister na papa ko asa ulzaa rakha hai ( yeh pagal property bach ka bhag jayaga property is ka name maat karo humara name ragester kar do bach nahi payaga). +80 years age father ko fobia dar ho gaya to jija ka sath, sir asa kuch be nahi hai.
      main kaha jayu mera father na muja mental hospital 19 month dal diya jija ka khana se, but mera papa ko Baham( shaak, fobia dar ) hai jija property kaa gaya mera. mera papa muja dushman manhata hai khata hai makan bach ka bhaag jayaga. 80 years ka age main Baham ( shakk) ka bimari, sir main kaha jayu ? police station cinior citizen ka suna jata, papa ko baham hai vo police stastion main roo padhata 50 gaj ka ghar bach ka bhaag jayaga police muja marhata 6 times police beaten me.sir kaha jayu jija Up ka Gujaar ( janam se dakaaat) sir papa aur beta ka relation asa ulzaa diya jasa rasee ulaaz jata hai. jija 100 gaj ghar free main papa na diya. 200 gaj plot apna bhai se dilwa (bikwa) diya use rate main jis main liya tha. 300 gaj papa ka big mistake jija ka ghar ka picha 100 gaj plot lay liya. jija (patwari se girdawar) UP ka gujaar kabja kar lay koi na sir mera 50 gaj to dilwa do. 4 house hai aaj 600gaj property muja 50 gaj he dilwa do. muja shade karna hai. koi apna jasa zindage se duki ladki tund lunga jis ka husband mar gaya ho divorce wale. sir mera papa na 18 years main 4 houuse bacha 72 lak agriculture land retirment main 6.5 lak sir 18 years main 1 crore 40 lak aya., 6 house tha aab 4 house hai muja 50 gaj property kasa mil sakhata hai, jija Up ka Gujjar( bodmas 3 bar suspend ho gaya patwari job se aab papa sa 8 lak lay ka manish sis ko diya aaj girdawar post, papa jija ka kaha sa chalta hai. village main kisi ka nahi manhata jija na bola chota sala ka govt job, papa marna sa phala mera bhai ko Govt job pa dakna chahata fobia , jija pagal bana raha hai govt job koi fruit hai ? main kuch pana chata hoo life main kuch dream hai mera har insan azad hai jab apno ka niyaat kharab ho jaya property paso se taab insaan ka echaa daba data insaan ko daba data insan ko daba data zinda insaan kabar main daba jasa hai?

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      1. Aap kisi advocate se miliye...they will help you..

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    5. ashu kaushik
      8383892691
      omganeshay18@gmail.com

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