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    अपने मोबाईल नंबर को आधार से लिंक कर लें, वरना बंद हो जायेगा

    Blog: अभी के समय में बिना मोबाईल और इंटरनेट के जीवन की कल्पना भी नही कर सकते हैं. मोबाईल ने हमारे जीवन को सुगम बना दिया है. पहले के जमाने में एक जगह से दूसरे जगह, एक शहर से दूसरे शहर, एक राज्य से दूसरे राज्य, एक देश से दूसरे देश तक खबर पहुंचाने के लिए पैदल या घोड़े से संवादवाहक भेजकर या कबूतर, बाज से लेकर तार, डाक आदि का इस्तेमाल किया जाता था. जिसमें की कई कई दिनों से लेकर महीनों तक लग जाया करते थे. मोबाईल से पहले पेजर आया जिसके माध्यम से केवल मैसेज का आदान प्रदान होने लगा, मगर मोबाईल ने तो पूरी दुनिया ही बदल दी. आज जिसको देखो उसके पास ही मोबाईल है. खरीदारी से लेकर शिक्षा सम्बंधी व् अन्य लगभग ज्यादातर काम सभी को आसान सा बना दिया है. मगर अगर कोई चीज फायदेमन्द है तो उसका नुकसान भी है. जी हां आये दिनों मोबाईल का दुरूपयोग की खबर पढ़ने को मिल ही जाती है.

    इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अख्तियार किया है. अगर आप भी मोबाईल का उपयोग कर रहे हैं तो इस आदेश का पालन आवश्यक है नही तो कल हो सकता है कि आपका नंबर बंद हो जाये. माननीय कोर्ट ने कहा है कि सत्यापन के लिए यूजर्स के सिम कार्ड को उनके आधार से लिंक कर दिया जाए.

    लोकनीति एनजीओ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उक्त आदेश दिए हैं. जिसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार और ट्राई को ये निर्देश दिए जाएं कि मोबाईल सिम धारकों की पहचान, पता और डिटेल उपलब्ध् हो. कोई भी मोबाईल सिम बिना वेरिफिकेशन के न दिया जाए. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर जबाब मांगा था. अटार्नी जनरल ने कहा था कि इसके लिए सहमत हैं मगर मोबाईल यूजर्स की संख्या लगभग 105 करोड़ है, इस प्रक्रिया में समय लग सकता है. इसके आलावा, 90 प्रतिशत से ज्यादा यूजर प्रीपेड कनेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अब ऐसा तकनीक लाया जा रहा है जिससे इस सभी मोबाईल सिम को भी आधार से जोड़ा जा सकता है.

    अब तो यूजर्स को मोबाईल को आधार से लिंक करने का मैसेज भी आने शुरू हो गया है. जिसकी अंतिम तारीख 28 फ़रवरी 2018 है. आप अभी से अपना मोबाईल को लिंक कर लीजिये, नही तो उक्त तिथि के बाद आपका नंबर बंद हो जायेगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश केवल फर्जीवाड़ा रोकने के लिए लिया है.

    आप सोचिये न बैंक के एटीएम का फर्जी नंबर से कार्ड नंबर और पिन नंबर पूछकर खाते से पैसा उड़ा लेना आम बात है. इसके बाद शायद इस तरह के धोखाधड़ी में कमी आ सके और यदि कोई करता भी है तो आधार कार्ड में उपलब्ध जानकारी के अनुसार तुरंत ही आरोपी को पकड़ा जा सकता है.

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