दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में अवैध फैक्ट्री में जिंदा जले 4 मजदूर, क्या केजरीवाल

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर से मजदूरों का कब्रगाह बन गया है. दिल्ली के सुल्तान पूरी इलाके के एक जूता फैक्ट्री में आग लगने से मौके पर 4 मजदूर जल कर स्वाहा हो  गए. किसी तरह पड़ोस की एक महिला ने हिम्मत दिखाया नहीं तो और लोगों की जान जा सकती थी. इस भीषण हादसे में करीब चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. कई अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर है, जिन्हें पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है. यह जानकार हैरानी होगी कि इस फैक्टी को गैरकानूनी बताया जा रहा है और उस इलाके में पिछले 2 वर्षों से चल रहा था.

दिल्ली के अवैध फैक्ट्री में जिंदा जले 4 मजदूर

सोमवार सुबह के करीब छः बजे सुलतान के जूता फैक्ट्री में आग लग गई. देखते ही देखते पूरा मकान धू-धू  कर जल उठा. आग में फंसे मजदूरों की चीख-पुकार मच गई. इस अफरतफती के दौरान किसी ने फायर ब्रिगेड को फोन किया. तब तक पास के ही मकान की एक महिला ने करीब 10 लोगों की जान बचाई.  दरअसल, उनके घर में एक सीढ़ी थी, उन्होंने ये सीढ़ी फैक्ट्री की दीवार पर लगा दी जिससे कई लोग बाहर निकलने में कामयाब रहे. कुछ लोगों ने छत से कूदकर अपनी जान बचाई. जबकि 4 मजदूर जल कर स्वाहा हो  गए.

प्रशासन के बिना रजामंदी के इस तरह की फैक्ट्री चल रही हो

जिस समय आग लगी उस समय उस फैक्टी में करीब 25 मजदुर थें. अभी तक के जानकारी के मुताबिक शार्ट-सर्किट होने से आग लगना बताया जा रहा है. ऐसे जांच के बाद ही असली बात सामने आ सकती है. एक तरह से देखे तो बवाना के बाद यह दूसरी शर्मनाक घटना है. इसके बारे में हमारे मन में एक सवाल उठता है कि बिना हेलमेट के भले ही कोई दिल्ली में बाईक न चला पाये मगर इस तरह के अवैध फैक्टी हजारों की संख्यां में चल रही है. मालिक लोग घरों में सारे नियम कानून को धत्ता बताकर धरल्ले से इस तरह की मिनी फैक्टी चला रहे हैं. अगर आप आज सड़क पर एक रेहड़ी लगा दें तो पुलिस और निगमकर्मी तुरंत पंहुचा कर हिस्सा मांगने लगते हैं. ऐसा कैसे हो सकता है कि प्रशासन के बिना रजामंदी के इस तरह की फैक्ट्री चल रही हो.

क्या केजरीवाल केवल मुआवजा बांटकर

दिल्ली के बवाना फैक्ट्री हादसे के बाद न नगर निगम ने कोई सबक लिया न दूसरे विभागों ने. आखिर किसके सह पर रिहायशी घरों में खतरनाक फैक्ट्रियां बदस्तूर चल रही हैं. क्या केजरीवाल सरकार पिछली बार की तरह केवल मुआवजा बांटकर हादसे के जिम्मेदार अधिकारियों को बचा लेगी या उनकी गैर-जिम्मेदाराना हरकत पर आपराधिक मामला दर्ज कर जेल भेजेगी.
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