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    Wage Code Bill 2019 की हकीकत, क्या Modi Govt ने Minimum Wages में वृद्धि की

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    आखिर Wage Code Bill 2019 लोकसभा के बाद राज्य सभा में भी पास हो गया. अब भले ही मामला 50 करोड़ मजदूरों का बताया गया हो मगर नेशनल मीडिया ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. मगर कुछ वेव पोर्टल ने कुछ तो कुछ अन्य ने कुछ जानकारी देकर मजदूरों का अच्छा खासा गुमराह जरूर कर दिया. आज हम बहुत ही शार्ट कट में Wage Code Bill 2019 की हकीकत आपके सामने लाने की कोशिश करेंगे. जिससे आप खुद ही आकंलन कर पायेंगे कि यह कानून आपको लिए कितना फायदेमंद या कितना नुकसानदेह हैं.

    Wage Code Bill 2019 की हकीकत?

    केन्‍द्रीय श्रम और रोजगार राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री संतोष कुमार गंगवार ने वेतन और बोनस तथा इनसे जुड़े मामलों से संबंधित कानूनों में संशोधन और समेकन के लिए मंगलवार को लोकसभा में वेतन विधेयक, 2019 पर कोड पेश किया है. जिसके बारे में जानने के लिए आप लोग काफी इक्छुक हैं कि इससे एक कर्मचारी के सैलरी और सर्विस कंडीशन में क्या असर पड़ेगा. 

    लोकसभा में पहली बार 'कोड ऑन वेजेज' बिल को 10 अगस्त 2017 को पेश किया गया था. उसके बाद इसे संसदीय स्थायी समिति को भेजा गया. समिति ने अपनी रिपोर्ट 18 अगस्त 2018 को सौंपी. हालांकि 16वीं लोकसभा भंग करने के कारण यह विधेयक रद्द हो गया.

    इसके बाद पुनः मोदी सरकार के सत्ता पर काबिज होते ही उसी बिल को 'कोड ऑन वेजेज, 2019' के नाम से तैयार किया गया. इसमें संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के सुझावों को शामिल किया गया.

    केंद्र सरकार के तरफ से प्रेस रिलीज जारी कर कहा गया कि वेजेज कोड बिल के पास होते ही न्‍यूनतम वेतन अधिनियम 1948, वेतन भुगतान अधिनियम, 1936, बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 तथा समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 समाप्त हो जायेंगे. इस चारों कानूनों के प्रासंगिक प्रावधानों को वेजेज कोड बिल में शामिल किया गया है.

    न्‍यूनतम वेतन अधिनियम 1948 नियोजित इकाइयों के कामगारों को उनके काम के कैटेगरी के अनुसार न्यूनतम वेतन का अधिकार प्रदान करता हैं, वही वेतन भुगतान अधिनियम, 1936, कामगारों के वेतन भुगतान, वेतन का भुगतान का समय सीमा व् भुगतान का माध्यम जैसे चेक, बैंक खाता में भुगतान, कटौती, ओवरटाइम आदि सुनिश्चित करता हैं.

    बोनस भुगतान अधिनियम, 1965  निश्चित प्र‎तिष्ठानों में कर्मचारी  को Bonus भुगतान मुहैया कराता है जहां 20 या उससे अ‎धिक कर्मचारी काम करते हैं. समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 के तहत पुरुष के साथ महिला कामगारों का सामान वेतन पाने का अधिकार सुनिश्चित करता हैं. वेजेज कोड के लागू होते ही उपरोक्त चारों कानून समाप्त हो जायेंगे.

    इकनोमिक टाइम्स के मुताबिक विधेयक में प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार रेलवे और खनन समेत कुछ क्षेत्रों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करेगी, जबकि राज्य अन्य श्रेणी के रोजगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र होंगे. जबकि यह प्रावधान तो पहले से ही हैं.

    आपको याद होगा कि विभिन्न मिडिया के माध्यम से वेजेज कोड के द्वारा नेशनल न्यूनतम वेतन की बात कही गई थी. यही नहीं खुद लेबर विभाग ने 14 फरवरी 2019 को एक प्रेस रिलीज जारी कर इसकी पुष्टि भी की थी.

    इसके बारे में द क्विंट ने लिखा कि इस फार्मूला से न्यूनतम वेतन डबल हो जायेगा.  उनके अनुसार भारत में लाखों अनौपचारिक श्रमिकों को उनकी न्यूनतम मजदूरी जो कि अभी 173 है, जो कि बढ़कर 375 रुपया रोज और 9750 रुपया मासिक यानी की डबल हो जायेगी.

    जबकि सीटू के महासचिव श्री तपन सेन ने बताया कि श्रम मंत्री श्री गंगवार ने 10.07.2019 को प्रेस कांफ्रेंस में नेशनल न्यूनतम वेतन 178 रुपया प्रति दिन फिक्स किये जाने की जानकारी दी थी. इसके बारे में हालांकि अभी तक कोई नोटिफिकेशन नहीं जारी किया गया हैं. इसके बारे में हमने राजयसभा टीवी पर उनका वीडियों देखा. जिसमें माननीय मंत्री महोदय ने कहा उसकी चर्चा बाद में की जाएगी.

    मिनिस्ट्री ऑफ़ लेबर एंड एम्प्लॉयमेंन्ट के अनुसार "श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 1 एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) का गठन किया था, जिसने राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन के निर्धारण की कार्यप्रणाली की समीक्षा और सिफारिश की थी. विशेषज्ञ समिति ने 14-02-2019 को सचिव, श्रम और रोजगार मंत्रालय के माध्यम से भारत सरकार को "न्यूनतम राष्ट्रीय वेतन के निर्धारण के लिए कार्यप्रणाली का निर्धारण" पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है. इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए हमारे इस पोस्ट को पढ़िए -National Minimum Wages एक्सपर्ट कमेटी के अनुसार किस राज्य का कितना होगा.

    अगर 178 रुपया वाली बात सही होती है तो 178 रुपए प्रति दिन के हिसाब से तो न्यूनतम वेतन 4628 मिलेगा. जबकि खुद एक्सपर्ट कमिटी ने 375 रुपया रोज और 9750 रुपया मासिक का प्रस्ताव दिया था.

    अगर असल में देखें तो खुद श्रम मंत्री महोदय ने कहा कि वेजेज कोड बिल 2019, केंद्र सरकार श्रमिकों के जीवन स्तर को ध्यान में रखते हुए एक फ्लोर वेजेज तय करेगी. इसके अलावा, यह विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मंजिल मजदूरी निर्धारित कर सकता है.

    वेजेज कोड बिल 2019 के बारे में सरकार ने कहा है कि इस विधेयक से हर कामगार के लिए भरण-पोषण का अधिकार सुनिश्चित होगा और मौजूदा लगभग 40 से 100 प्रतिशत कार्यबल को न्‍यूनतम मजदूरी के विधायी संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा. इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि हर कामगार को न्‍यूनतम वेतन मिले, जिससे कामगार की क्रय शक्ति बढ़ेगी और अर्थव्‍यवस्‍था में प्रगति को बढ़ावा मिलेगा. न्‍यूनतम जीवन यापन की स्थितियों के आधार पर गणना किये जाने वाले वैधानिक स्‍तर वेतन की शुरूआत से देश में गुणवत्‍तापूर्ण जीवन स्‍तर को बढ़ावा मिलेगा और लगभग 50 करोड़ कामगार इससे लाभान्वित होंगे. इस विधेयक में राज्‍यों द्वारा कामगारों को डिजिटल मोड से वेतन के भुगतान को अधिसूचित करने की परिकल्‍पना की गई है.


    श्रम मंत्रालय के अनुसार विभिन्‍न श्रम कानूनों में वेतन की 12 परिभाषाएं हैं, जिन्‍हें लागू करने में कठिनाइयों के अलावा मुकदमेबाजी को भी बढ़ावा मिलता है. इस परिभाषा को सरल बनाया गया है, जिससे मुकदमेबाजी कम होने और एक नियोक्‍ता के लिए इसका अनुपालन सरलता करने की उम्‍मीद है. इससे प्रतिष्‍ठान भी लाभान्वित होंगे, क्‍योंकि रजिस्‍टरों की संख्‍या, रिटर्न और फॉर्म आदि न केवल इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से भरे जा सकेंगे और उनका रख-रखाव किया जा सकेगा, बल्कि यह भी कल्‍पना की गई है कि कानूनों के माध्‍यम से एक से अधिक नमूना निर्धारित नहीं किया जाएगा.

    वर्तमान में अधिकांश राज्‍यों में विविध न्‍यूनतम वेतन हैं. वेतन पर कोड के माध्‍यम से न्‍यूनतम वेतन निर्धारण की प्रणाली को सरल और युक्तिसंगत बनाया गया है. रोजगार के विभिन्‍न प्रकारों को अलग करके न्‍यूनतम वेतन के निर्धारण के लिए एक ही मानदंड बनाया गया है. न्‍यूनतम वेतन निर्धारण मुख्‍य रूप से स्‍थान और कौशल पर आधारित होगा. इससे देश में मौजूद 2000 न्‍यूनतम वेतन दरों में कटौती होगी और न्‍यूनतम वेतन की दरों की संख्‍या कम होगी.

    इंस्पेक्शन नियम में अनेक परिवर्तन किए गए हैं. इनमें वेब आधारित रेंडम कम्‍प्‍यूटरीकृत निरीक्षण योजना, अधिकार क्षेत्र मुक्‍त निरीक्षण, निरीक्षण के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से जानकारी मांगना और जुर्मानों का संयोजन आदि शामिल हैं. केंद्र सरकार का मानना हैं कि इन सभी परिवर्तनों से पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ श्रम कानूनों को लागू करने में सहायता मिलेगी.

    कामगारों द्वारा दाबे की समय सीमा अवधि को बढ़ाकर तीन वर्ष किया गया है और न्‍यूनतम वेतन, बोनस, समान वेतन आदि के दावे दाखिल करने को एक समान बनाया गया है. फिलहाल दावों की अवधि 6 महीने से 2 वर्ष के बीच है.

    इसलिए सरकार का मानना हैं कि न्‍यूनतम वेतन के वैधानिक संरक्षण करने को सुनिश्चित करने तथा देश के 50 करोड़ कामगारों को समय पर वेतन भुगतान मिलने के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम है. यह कदम जीवन सरल बनाने और आराम से व्‍यापार करने को बढ़ावा देने के लिए भी वेतन पर कोड के माध्‍यम से उठाया गया है.

    माननीय श्रम मंत्री महोदय ने सदन में वेज कोड के बारे में अपनी बात रखते हुए कहा कि 2017 में Modi Govt ने Minimum Wages में 42% वृद्धि की. इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए नीचे यूट्यूब के लिंक को क्लिक कर देखें.

    Wage Code Bill 2019 की हकीकत, क्या Modi Govt ने Minimum Wages में 42% वृद्धि की



    मगर सही से देखें तो मजदूरों के चार महत्वपूर्ण अधिकार के कानून समाप्त कर दिए गए. हम देखते रह गए. असल में देखें तो यह चारों कानून तो 2014 के बाद ही समाप्त हो चुके थे. केवल कानून के किताब से मिटाना भर रह गया था. जो कि केंद्र सरकार ने 2019 में पूरी कर दी.  चारों कानूनों को मिला कर जो वेज कोड बिल बनाया गया हैं. वह 50 करोड़ मजदूरों के लिए कैसे काम करेगा. इसकी चर्चा न तो की गई हैं और न ही लागू करवा पाने के बारे में कुछ भी बताया गया.


    श्रम कानून मजदूरों के प्रोटेक्शन के लिए बनाये जाते हैं ताकि उनके हकों की रक्षा की जा सके. आज उल्टा हो रहा हैं. दिनों दिन मंहगाई बढाती जा रही हैं. प्राइवेट विभाग कोई तो छोड़ दीजिये, अब तो सरकार विभाग में नियम की अनदेखी कर ठेका वर्कर डोनेशन लेकर रखें जा रहे हैं. बेरोजगारी का डर दिखाकर न्यूनतम वेतन का भुगतान भी नहीं किया जाता हैं. आज एक साफ़ सफाई का काम करने वाले से लेकर, ड्राइवर, इंजीनियर तक ठेके पर रखें जा रहे हैं. एक कम पढ़ा-लिखा दिहाड़ी मजदुर तो हक से अपना मजदूरों खुद से तय भी करता और सीना ठोक कर ले भी लेता, मगर पढ़े-लिखे लोग नौकरी खोने के डर से चुप रह जाते हैं और उचित मजदूरी भी नहीं मांग पाते. ऐसे में मजदुर हक़ का कानून समाप्त कर कैसे कर्मचारी का भला होगा, यह तो समय ही बतायेगा.

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    1 comment:

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