सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली न्यूनतम वेतन (Delhi Minimum Wages) के आदेश में क्या कहा

माननीय सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली के मजदूरों के न्यूनतम वेतन के आर्डर का कॉपी जारी कर दिया हैं. जिसका इन्तजार हम सभी को पिछले तीन दिन से था. इसके बारे में हम आपको बहुत ही सरल भाषा में बताने जा रहे हैं ताकि आप सभी तमाम वर्कर साथी इस आर्डर को पढ़कर जान सकें कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली न्यूनतम वेतन (Delhi Minimum Wages) के आदेश में क्या कहा?

Delhi Minimum Wages SC Order in Hindi

सबसे पहले आपके लिए आपके लिए यह जानना बहुत जरुरी हैं कि आखिर Minimum Wages Delhi में  क्या आर्डर किया गया? इसलिए हम आपके सामने इसका मतलब साधारण तरीके से हिंदी में बताने की कोशिश करेंगे.

यह आपको जानना इसलिए जरुरी है ताकि आपको कोई गुमराह नहीं कर सके और यह मजदुर वर्ग के लिए ऐतिहासिक फैसला हैं. हर मजदुर को इसकी जानकारी होनी चाहिए. अब भले आप दिल्ली में काम कर रहे या देश के किसी भी कोने में, देश का लेबर लॉ लगभग बराबर ही हैं और आपको बराबर अधिकार मिले हुए हैं. तो आइये इस आर्डर को सॉर्ट कट में जानते हैं-

इस न्यायालय द्वारा 31.10.2018 को निम्नलिखित निर्देश जारी किए गए थे

SLP की पेंडेंसी के दौरान, दिनांक 03.03.2017 के अनुसार तय की गई न्यूनतम मजदूरी देय होगी. हम यह स्पष्ट करते हैं कि, इस स्तर पर, किसी भी बकाया राशि की भुगतान की आवश्यकता नहीं है और लेकिन वर्तमान मजदूरी उक्त दिनांक 03.03.2017 अधिसूचना के अनुसार होगी.
संबंधित पक्षों के अधिकारों के पक्षपात के बिना, हम याचिकाकर्ता को फिर से अनुसूचित रोजगार के लिए न्यूनतम मजदूरी कवायद को फिक्सिंग की करने का निर्देश देते हैं, न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के  धारा 5 (1) (ए) या 5 (1) (बी) के तहत याचिकाकर्ता अपनाने का विकल्प चुन सकता है.

श्री दुष्यंत दवे, याचिकाकर्ता (दिल्ली सरकार) के लिए वरिष्ठ वकील, कोर्ट के सामने कहा है कि उक्त कवायद दो महीने की अवधि के भीतर पूरा किया जायेगा. बहरहाल, न्यायालय को पूरा Exercise पूरा करने के लिए लिए अतिरिक्त एक और चार सप्ताह का समय दिया जाना चाहिए. जिससे वो आज से तीन महीने के अंत में उसके परिणाम यानी अधिसूचना का प्रस्ताव तीन महीने के अंत में कोर्ट के सामने रख सकें.हम यह भी स्पष्ट करते हैं कि दिनांक 03.03.2017 की अधिसूचना के तहत एरियर का प्रश्न इस तरह के वेतन को नए सिरे से किए Re-fixed किये जाने के बाद निर्धारित किया जा सकता है.

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हम यह भी स्पष्ट करते हैं कि भुगतान की गई राशि नियोक्ताओं द्वारा की कोई वसूली नहीं की जाएगी.

यह कहने की जरूरत नहीं है कि किए जाने के लिए किए गए डे नोवो एक्सरसाइज में सभी हितधारकों के लिए सभी मुद्दे उठाने के लिए खुला होगा जो प्रासंगिक हो सकते हैं.”

उक्त दिशा-निर्देशों के संदर्भ में, याचिकाकर्ता की ओर से दिनांक 26.08.2019 को हलफनामा दायर किया गया था:

5. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश 31.10.2018 के संदर्भ में, श्रम विभाग ने न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के यू / एस 5 (1) (बी) के अनुसार मजदूरी निर्धारण / संशोधन के लिए प्रक्रिया का विकल्प चुना.

6. खाद्य पदार्थों और कपड़ों के घटकों की औसत कीमतों और अन्य घटकों के अन्य निर्धारित प्रतिशत के आधार पर अर्थात आवास, प्रकाश और ईंधन और शिक्षा / सामाजिक दायित्व, जैसा कि ILC-1957 में निर्धारित किया गया है और माननीय सर्वोच्च न्यायालय में SLP नंबर 4336/1991 के शीर्षक के रूप में सचिव बनाम द्वारा प्रस्तुत किए गए कार्यकर्ता रेप्टाकोस बी 8 का प्रबंधन. विभिन्न ट्रेड यूनियनों और बाजार संघों / कारखाने के मालिकों संघों / नियोक्ता संघों को एक सदस्य के नाम की सिफारिश / सुझाव देने के लिए दिनांक 14.11.2018 को पत्र भेजा गया था.
जिसे दिल्ली न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में नामांकित किया जाएगा. न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948। इन संगठनों से नामांकन / नाम प्राप्त करने के बाद, न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड का गठन 09.01.2019 को माननीय उपराज्यपाल, दिल्ली के एनसीटी के अनुमोदन के बाद किया गया था. बोर्ड के पास 15 कर्मचारी प्रतिनिधि, 15 नियोक्ता प्रतिनिधि और दो स्वतंत्र सदस्य अर्थात् श्रीरेट एंड कंपनी लिमिटेड और एएनआर हैं. सभी श्रमिकों के संबंध में अलग-अलग कैगरीज, पर्यवेक्षी और लिपिक कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मजदूरी की प्रस्तावित दरों का पालन किया गया है. दिल्ली में नियोजित रोजगार, जो हैं:
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली न्यूनतम वेतन के आदेश में क्या कहा Full Details in Hindi
7. उक्त प्रस्तावित न्यूनतम मजदूरी दरों को सभी हितधारकों से सुझाव / विचार / आदानों / टिप्पणियों को आमंत्रित करने के लिए 12.11.2018 को श्रम विभाग की वेबसाइट यानी www.labour.delhigovt.nic.in पर अपलोड किया गया है. न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 की धारा 5 (1) (बी) के अनुसार, जनता से विभिन्न श्रेणियों के लिए मजदूरी की प्रस्तावित न्यूनतम दरों पर सुझाव / विचार / इनपुट / टिप्पणियां आमंत्रित की जाती हैं. जिनमें श्रमिक, ट्रेड यूनियन, वाणिज्य के नियोक्ता, गैर सरकारी संगठन  सिविल सोसायटी के सदस्य शामिल हैं. 13.11.2018 और 14.11.2018 को विभिन्न समाचार पत्रों में मजदूरी की प्रस्तावित न्यूनतम दरें भी प्रकाशित की गईं.
8. विभिन्न ट्रेड यूनियनों और बाजार संघों / कारखाने के मालिकों संघों / नियोक्ता संघों को एक सदस्य के नाम की सिफारिश / सुझाव देने के लिए 14.11.2018 को पत्र पत्र का अनुरोध किया गया था, जिसे अनुभाग के तहत गठित होने के लिए दिल्ली न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में नामांकित किया जाएगा. न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 में से 7। इन संगठनों से नामांकन / नाम प्राप्त करने के बाद, न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड का गठन 09.01.2019 को माननीय उपराज्यपाल, दिल्ली के एनसीटी की स्वीकृति के बाद किया गया था. बोर्ड में 15 कर्मचारी प्रतिनिधि, 15 नियोक्ता प्रतिनिधि और दो स्वतंत्र सदस्य हैं जिसमे श्री संजय भट्ट, प्रोफेसर, दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क और डॉ. परमजीत, एसोसिएट प्रोफेसर, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स हैं.
9. न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड ने 21.01.2019, 28.01.2019, 08.02.2019 और 15.02.2019 को 4 बैठकें कीं, जिसमें सभी पक्षों / हितधारकों से प्राप्त सभी सुझावों को ध्यान में रखते हुए वेतन संशोधन के विषय पर विचार-विमर्श किया गया.
10. उपरोक्तानुसार अधिनियम की धारा 5 (1) (बी) के तहत याचिकाकर्ता द्वारा किए गए ताजा अभ्यास के लिए, याचिकाकर्ता ने प्रस्तावित अधिसूचना का मसौदा तैयार किया है, जैसा कि माननीय न्यायालय ने अपने आदेश दिनांक 31.10.2018 को निर्देशित किया है. “जिसका अर्थ है कि आज से तीन महीने के अंत में अभ्यास पूरा किया जाना चाहिए और इसके परिणाम अर्थात अधिसूचना जिसे आज से तीन महीने के अंत में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रस्ताव हो सकता है.” उक्त मसौदे की एक प्रति अधिसूचना को ANNEXURE A-1 के रूप में चिह्नित और संलग्न किया गया है.
11. वर्तमान हलफनामा इस माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में दायर किया जा रहा है.
हलफनामे के साथ, अधिसूचना की एक ड्राफ्ट प्रति भी संलग्न की गई है.
श्री दुष्यंत दवे, याचिकाकर्ता के तरफ से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता ने अधिनियम की धारा 5 (1) (बी) के तहत अभ्यास को प्रस्तुत किया गया है, याचिकाकर्ता ने मांग उठाई कि राज्य को कानून के बारे में ज्ञात तरीके से अधिसूचना को प्रभावी करने की अनुमति दी जाएगी.
श्री वी.गिरी ने, जो कि रेस्पोंडेंट (मालिक पक्ष) के कुछ प्रतिवादियों के समक्ष उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता को बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा उठाए गए दृष्टिकोण की शुद्धता के मुद्दे को अभी भी समाप्त करने की आवश्यकता होगी.
दिनांक 31.10.2019 के आदेश के संदर्भ में यह कहा कि न्यूनतम मजदूरी के निर्धारण के मामले की पेंडेंसी के दौरान दिनांक 03.03.2019 की अधिसूचना पर रोक लगाए जाने का निर्देश जारी किए जाए.
प्रतिद्वंद्वी प्रस्तुतियाँ पर विचार करने के बाद, हम याचिकाकर्ता राज्य (दिल्ली सरकार)को ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी करने की अनुमति देते हैं, जैसा कि ऊपर कहा गया है, तार्किक निष्कर्ष तक और यह निर्देश देता है कि जब तक अधिसूचना प्रभाव में नहीं आती है, तब तक समबधित 03.03.2017 के अधिसूचना और आर्डर 31.10.2018 के आदेश के अनुसार देय होगा. उक्त अधिसूचना जारी होने के बाद, उचित कानूनी परिणाम और अनुक्रम का पालन किया जाएगा. यदि कोई व्यक्ति अधिसूचना से पीड़ित है, तो वह कानून में उपलब्ध कानूनी उपायों के लिए सहारा लेने का हकदार होगा.
उच्च न्यायालय के निर्णय की शुद्धता, जो वर्तमान में अपील के अधीन है, पर विचार करने की आवश्यकता होगी.
इसलिए, हम अपील करने के लिए विशेष अवकाश देते हैं.
अपील की सुनवाई में तेजी लाई जाए.
 
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3 thoughts on “सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली न्यूनतम वेतन (Delhi Minimum Wages) के आदेश में क्या कहा”

  1. Sir हम लगभग ,10-18 साल से ज्यादा आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटर / कम्प्यूटर ऑपरेटर कार्यरत हैं CPWD के.लो.नी.वी. मैं पर अभी भी हमको ना तो वेतन पूरा मिलता है साथ प्रति वर्ष करार टेंडर बदलने पर जॉब जाने का दर लगा रहता है। बड़ी मुश्किल से 150 लोगो का एक ग्रुप बनाया है आप हमारी मदद करें आपकी मदद की प्रतीक्षा में

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    • सबसे पहले आपको बता दूँ कि जब तक आपके ग्रुप केअब लोगों को हक़ और अधिकार की जानकारी नहीं होगी तब तक आपका ग्रुप कब टूट जाए, कहना मुश्किल हैं. आप हमारे ब्लॉग को पढ़ें और सैलरी आदि के लिए लेबर कमिश्नर ऑफिस शिकायत करें.

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