निजीकरण के फायदे और नुकसान क्या है, गरीब मजदूरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

Blog: मोदी सरकार सरकारी विभागों को निजीकरण करने जा रही है। जिसके बाद हर कोई जानना चाहता है कि “निजीकरण के फायदे और नुकसान क्या है? इसका गरीब मजदूरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? आज जब हर आदमी मंहगाई, बेरोजगारी से तंग आ गया है। ऐसे में सरकार द्वारा बताया जा रहा है कि निजीकरण होने से सबकी समस्या दूर हो जायेगी। आज हम आपको इसकी सच्चाई बताने जा रहे हैं।

निजीकरण के फायदे और नुकसान क्या है?

हमारे देश में प्रमुख रूप से दो तरह के कर्मचारी काम करते हैं एक स्थाई और दूसरे अस्थाई। जहाँ एक तरफ स्थाई कर्मचारी को सांतवा वेतन के अनुसार सैलरी देने के प्रावधान है तो दूसरी तरफ समान काम करने के वावजूद अस्थाई कर्मचारी (ठेका वर्कर/आउटसोर्स वर्कर आदि) को न्यूनतम वेतन से संतोष करना पड़ता है। अगर सही बात कहें तो सरकारी विभागों में ज्यादातर चतुर्थवर्गीय कर्मचारी को न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जाता है। ऐसे में इन अस्थाई कर्मचारियों के द्वारा समय-समय पर स्थाई करनी की मांग की जाती है। जिससे उनके और उनके परिवार की दशा में सुधार आ सके। अब अगर सरकारी विभाग ही निजी हाथों में चला गया तो वो इन अस्थाई कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन भी देंगे यह कहना मुश्किल ही है।

देश की आजादी के बाद आम लोगों के मेहनत से अर्थव्यवस्था को खड़ा किया गया है। जिसमें हमारे पूर्वजों के गाढ़ी कमाई के टैक्स के पैसे से एक-एक कंपनी, स्कुल, कॉलेज खड़ा किया गया। जिससे देश के सभी लोगों को समान रूप से मुफ्त/कम पैसे में अस्पताल, स्कुल, परिवहन आदि की सुविधा मुहैया कराई जा सके। मगर वर्त्तमान की मोदी सरकार सरकारी कंपनियों के निजीकरण करना चाहती है। अब सवाल यह उठता है कि अब आप अपने आप से पूछिए कि जब सरकारी कंपनियों को निजी हाथों में दे दिया जायेगा तो क्या इस तरह की सुविधा (मुफ्त/कम पैसों में) मिल पायेगी?

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सरकारी कंपनी में बहुत करप्शन है?

कल ही एक भाई ने शोसल मिडिया में लिखा कि सरकारी कंपनी में बहुत करप्शन है। निजीकरण से सब ठीक हो जायेगा। मगर हमारा मानना है कि सरकारी कंपनी में करप्शन के लिए सरकार दोषी है न कि सरकारी कंपनी। अगर आपसे सरकारी काम के लिए रिश्वत मांगा जाता है तो इसके लिए शिकायत की प्रणाली बनी हुई है। जिसको सरकारी तंत्र द्वारा सही से लागू नहीं किया जाता है। अगर कोई इसके खिलाफ आवाज उठता भी है तो उसको उसी सरकारी तंत्र द्वारा उलटे केस मुकदमे में फंसा दिया जाता है।

अब अगर सरकारी और निजी संस्थान आदि में करप्शन की बात की जाए तो इसके लिए सबसे बढ़िया उदहारण प्राइवेट स्कूल से बढ़िया कुछ नहीं होगा। आज आप अपने बच्चे को प्राइवेट स्कुल में 20,000 से लेकर 2 लाख रूपये तक रिश्वत देकर नामांकन करवाते हैं। यही नहीं बल्कि 100 रूपये की किताब आपको झक मारकर 500 रूपये में खरीदनी पड़ती है। आप किसी से भी पूछ लीजिये, वो कहेंगे कि प्राइवेट स्कूल और हॉस्पिटल एक ऐसी जगह है। जहाँ बिना बंदूक दिखाए आम आदमी को खुलेआम लूटा जाता है।

शिक्षा ना पाने की वजह से देश पीछे चला जाएगा?

हमारे देश में गरीबों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। अगर सही से देखें तो प्राइवेट स्कूल में सरकारी स्कूलों की तुलना में ऐसा क्या पढ़ाया जाता है कि उनकी फ़ीस इतनी ज्यादा होती है? अब अगर आने वाले समय में सरकारी स्कूल को प्राइवेट स्कूल कर दिया जाता है तो गरीब का बच्चा पढ़ नहीं पायेगा। जिसके कारण शिक्षा ना पाने की वजह से हमारा देश काफी पीछे चला जाएगा। आपने कभी सोचा है कि हमारे देश के बच्चों का भविष्य क्या होगा? अरे भाई “पढ़ेगा इंडिया तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया”।

सरकारी कंपनियों के निजीकरण में आम आदमी की सवारी रेल गाड़ी का नंबर भी है। अब जैसा कि हमारा यह टॉपिक निजीकरण के बारे में है तो “क्या रेलवे का निजीकरण होना सही फैसला है? सरकार के इस फैसले से आम गरीब मजदूरों का क्या फायदा और क्या नुकसान हो सकता है?” पिछले वर्ष मुझसे कुछ ऐसा ही सवाल बीबीसी न्यूज के रिपोर्टर ने अपने एक रिपोर्ट के लिए फोन कर पूछा था। मैं एक लेबर एक्टिविस्ट हूँ और पिछले कई वर्षों से मजदूरों के लिए लिखता हूँ। यही नहीं बल्कि भारतीय रेलवे के एक उपक्रम आईआरसीटीसी में काम करने का भी अनुभव है।

रेलवे के निजीकरण के बारे में कुछ अहम् बात

ऐसे तो “रेलवे के निजीकरण” को सरकार के द्वारा पहले इंकार किया जा रहा था। मगर अब खुलेआम सरकार ने घोषणा कर दी है। मैंने रेलवे के निजीकरण के बारे में कुछ अहम् बात BBC Hindi News बताई थी। जिससे न केवल आम आदमी बल्कि वहाँ काम करने वाले कर्मचारियों को भी जानना आवश्यक है। वह कुछ इस प्रकार से है –

1. ये सिर्फ़ रेलवे कर्मचारियों ही नहीं बल्कि यात्रियों की जेब पर भी वार है। ट्रेन के किराए का 43 फ़ीसदी सब्सिडी यात्रियों को मिलती है। निजी कंपनियां तो ये रियायत यात्रियों को नहीं देंगी। ऐसे में ग़रीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों की जेब पर भार बढ़ेगा।

2. अभी लोगों को लग रहा है जब निजीकरण होगा तो अच्छी सेवा मिलेगी लेकिन वास्तव में ऐसा होगा इस पर शक है। रेलवे में केटरिंग तो पहले से ही आईआरसीटीसी के हाथ में है, ये भी रेलवे की निजी कंपनी ही है, क्या केटरिंग से लोग संतुष्ट हैं?

3. जब सरकार की कमाई होती है तो वो पैसा देश के विकास में लगता है। स्कूल खुलते हैं, स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होती हैं, लेकिन जब रेलवे की कमाई निजी हाथों में जाएगी तो ये पैसा जनहित में नहीं लगेगा।”

निजीकरण के फायदे और नुकसान क्या है, गरीब मजदूरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

आप मोटे तौर पर जानिए कि सरकार का मक़सद देश में कॉर्पोरेट को फ़ायदा पहुंचाना है। निजीकरण से आम कर्मचारियों के शोषण की व्यवस्था और मज़बूत होगी। आप ही सोचिए कि रेलवे का टिकट 4 महीने पहले फूल हो जाता है। स्लीपर ट्रेनों में सीट से अधिक यात्री सफर करते और जेनरल बोगी का तो बाथरूम भी खचाखच भरा होता है। ऐसे में ट्रेन का घाटे में होने का सवाल ही कहाँ उठता है? आप ही जरा सोचिए कि “अगर कंपनी घाटे में है तो उसको उधोगपति खरीद क्यों रहे हैं और अगर कंपनी घाटे में नहीं है तो सरकार बेच क्यों रही है”? आप अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बतायें। धन्यबाद ।

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