EPS pension hike 2026 – अगर आप नौकरी पेशा कर्मचारी है। ऐसे में अगर आपका पीएफ कटता है तो यह जानकारी आपके लिए अहम है। देशभर के कर्मचारी संगठन पिछले कई वर्षों से ईपीएस के तहत मिनियम पेंशन 1000 रूपये को बढाकर 7500 रुपया करने की मांग कर रहे हैं। जब आम कर्मचारी के इस मुद्दे को लेकर संसद में सवाल उठाया गया तो केंद्र सरकार के तरफ से क्या जवाब दिया गया, आइए विस्तार से जानते हैं?
EPS pension hike 2026 News in Hindi
अगर आप किसी ऐसी कम्पनी या संस्थान में काम करते हैं। जहां 20 या 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में आपकी कंपनी की जिम्मेदारी बनती है कि वो खुद EPFO के पास रजिस्टर्ड हो। जिसके बाद आपका पीएफ का खाता खुलवाए। आपका पीएफ का खाता खुलने के बाद आपके मूल वेतन (बेसिक+डीए) का 12 फीसदी आपके सैलरी से काट कर आपक पीएफ खाता में जमा करवाए। जिसके बाद ठीक उतना ही यानी 12 प्रतिशत कंपनी अपने तरफ से भी आपके पीएफ खाता में जमा करती है।
आपको बात दें कि कर्मचारी का 12% और एम्प्लायर के 12 फीसदी कंट्रीब्यूशन में से 3.67% आपके ईपीएफ खाते में जमा होता है। जबकि एम्प्लायर के 12 प्रतिशत में से बचा 8.33 फीसदी आपके ईपीएस यानी पेंशन के लिए जमा होता है। जिसमें से ही आपको रिटारमेंट के बाद पेंशन दिया जाता है। जो कि अभी मिनियम पेंशन 1000 है। जिसको 7500 करने की मांग पर केंद्र सरकार ने संसद में जवाब दिया है।
संसद में पूछा सवाल
लोकसभा में 20.07.2026 को सांसद भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे ने पूछा कि क्या श्रम और रोजगार मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि:
(a) क्या EPS-95 राष्ट्रीय आंदोलन समिति की महंगाई भत्ते (DA) के साथ 7,500 रुपये प्रति माह की न्यूनतम पेंशन की मांग लंबे समय से लंबित है और यदि हां, तो इसका विवरण क्या है;
(b) क्या सरकार का यह मानना है कि बुजुर्ग श्रमिकों के सम्मानजनक जीवन के लिए वर्तमान 1,000-2,000 रुपये प्रति माह की पेंशन अपर्याप्त है और यदि हां, तो इसके क्या कारण हैं;
(c) इस संबंध में गठित विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों पर सरकार द्वारा अब तक क्या कार्रवाई की गई है;
(d) क्या सरकार पेंशन बढ़ाने के लिए बजटीय सहायता या पेंशन फंड के पुनर्गठन पर विचार कर रही है; और
(e) लाखों बुजुर्ग पेंशनभोगियों से जुड़े इस मानवीय मुद्दे पर अंतिम निर्णय कब तक लिए जाने की संभावना है?
जवाब श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने दिया
(a) से (e): ट्रेड यूनियनों और जन-प्रतिनिधियों सहित विभिन्न हितधारकों से ‘कर्मचारी पेंशन योजना (EPS), 1995’ के तहत न्यूनतम पेंशन को मौजूदा 1,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाने के लिए अनुरोध प्राप्त हुए हैं।
EPS, 1995 एक “डिफाइन्ड कंट्रीब्यूशन-डिफाइन्ड बेनिफिट” (तय योगदान-तय लाभ) वाली सोशल सिक्योरिटी स्कीम है। एम्प्लॉइज पेंशन फंड का कॉर्पस (कुल जमा राशि) इन चीज़ों से बनता है: (i) एम्प्लॉयर द्वारा वेतन का 8.33 प्रतिशत योगदान; और (ii) केंद्र सरकार द्वारा बजट सहायता के ज़रिए वेतन का 1.16 प्रतिशत योगदान (यह योगदान 15,000 रुपये प्रति माह तक के वेतन पर लागू होता है)। स्कीम के तहत सभी लाभ इसी जमा राशि से दिए जाते हैं। EPS, 1995 के पैरा 32 के तहत ज़रूरी होने के कारण, इस फंड का हर साल मूल्यांकन किया जाता है।
सरकार EPS, 1995 के तहत पेंशनभोगियों को बजट सहायता के ज़रिए हर महीने कम से कम 1,000 रुपये की पेंशन दे रही है। यह सहायता, EPFO को EPS के लिए हर साल वेतन का 1.16 प्रतिशत बजट सहायता के तौर पर दिए जाने के अलावा है।
EPS 1995 की जगह EPS 2026 ने ले ली है।
सरकार EPFO योजनाओं के सदस्यों को मज़बूत सामाजिक सुरक्षा कवरेज देने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही वह फंड की स्थिरता और उस पर भविष्य की देनदारियों का भी ध्यान रखती है।
संसद में सरकार के जवाब से स्पष्ट है कि न्यूनतम वेतन को बढ़ाने के लिए सरकार के तरफ से कोई घोषणा नहीं की गई है। अब आप ही बताइये कि इतने कम पेंशन में पेंशनधारी कर्मचारी का गुजारा कैसे हो पायेगा?
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Surjeet Shyamal एक श्रमिक जागरूकता लेखक हैं, जो Private Employees को PF, वेतन, ग्रेच्युटी और लेबर कानून से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सरल हिंदी में प्रदान करते हैं। उनका लक्ष्य कर्मचारियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना और सही मार्गदर्शन देना है, ताकि वे सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य जीवन जी सकें। Read More