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    AIIMS के सुलभ कम्पनी के ठेका वर्करों का बुला हाल, आगे से अस्पताल जाएं तो | WORKER NEWS

    AIIMS के सुलभ कम्पनी के ठेका वर्करों का बुला हाल, आगे से अस्पताल जाएं तो | WORKER NEWS

    नई दिल्ली: देश का सबसे बड़ा अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली (AIIMS) है. पुरे देश के विभिन्न अस्पतालों के रेफर किये हुए मरीज यहां इलाज करने आते हैं. यहां करीब 400 ठेका वर्कर जो कि शुलभ इंटरनेशनल के माध्यम से ठेका पर कार्यरत हैं. उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर शोषण का आरोप लगाया है. 

    रखा तो गया सफाई के लिए मगर चपराशी से लेकर अटेंडेंट का काम लिया जाता

    यहां साफ़-सफाई के लिए न्युक्त एक वर्कर ने बताया कि उनको ऐसा रखा तो गया सफाई के लिए मगर चपराशी से लेकर अटेंडेंट तक का काम लिया जाता है, वे लोग मरीज को स्ट्रेचर पर लाने, ले जाने से लेकर, हर वो काम करते जो उनका सुपरवाइजर करवाता है. अगर कोई काम करने से मना करे तो उसको नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है. यह तो ठेका वर्कर के लिए के आम बात है. उनको तो हर जगह डरा कर ही काम लिया जाता है.
     

    AIIMS के सुलभ कम्पनी के ठेका वर्करों का बुला हाल, 

    ऐसे तो AIIMS में काम करने वाले एक वर्कर ने ईमेल करके इन बातों की जानकारी दी. इसके बाद जब फोन किया तो उसने वहां होने वाले पीड़ा बयान किया. इसके साथ ही यह भी रिक्वेस्ट किया कि इस स्टोरी के साथ उनका नाम पब्लिश न करें. आगे साथी वर्कर ने बताया कि ऐसे तो पहले 9 हजार के आसपास वेतन मिलते था. मगर पिछले साल जून 2017 से 13,600 रुपया मिलने लगा है. जब मैंने पूछा कि पता है ये पैसा कैसे बढ़ा तो उस साथ ने कहा कि सुना था किसी ने केस किया था, जिसके बाद बढ़ा है. जब मैंने बताया कि वह केस (PIL) करने वाला कोई और नहीं मैं ही था तो वह काफी खुश हुए.

    नौकरी छूटने के बाद बहुत परेशानी का सामना करना होता है

    उस वर्कर ने बताया कि सैलरी के आलावा न हमें पीएफ, न एसआई, न बोनस, न ग्रेच्युटी आदि ही मिलता है. जब मैंने पूछा कि यूनियन क्यों नहीं बना लेते? फिर उसने कहा कि यूनियन बनाने से सभी डरते हैं. जैसे ही लोग पीएफ आदि की बात करते हैं तो उनको नौकरी से ही निकाल दिया जाता है, यूनियन बनाना तो बहुत बड़ी बात है. यह कहिये की सभी लोग डरते हैं. ऐसे भी सब दिल्ली से बाहर से कमाने आये हैं. सभी बाल बच्चे वाले हैं और नौकरी छूटने के बाद बहुत परेशानी का सामना करना होता है. 

    हमें भी समान काम का समान वेतन मिलना चाहिए

    उससे भी आश्चर्ज तब हुआ जब उस वर्कर साथी ने बताया कि ऐसे भी नहीं की, हमें रोज काम मिल जाता है. यह सुपरवाइजर तय करता है कि कौन आज काम करेगा और कौन वापस घर को जायेगा. उसने आगे बताया कि ठेकेदार को तो छोड़िये स्थाई कर्मचारी भी हमलोगो का शोषण करने में पीछे नहीं रहते हैं. उनका बात नहीं मानने पर नौकरी से निकलवा देने की धमकी आम बात है. सबसे बड़ी बात की सैलरी कभी भी हमें समय से नहीं दी जाती है. AIIMS में ठेका पर काम करने वाले उस साथ ने कहा कि, "हम पर परमानेंट के बराबर काम करते हैं और हमें भी समान काम का समान वेतन मिलना चाहिए."

    हम अस्पताल का गुस्सा इन चतुर्थवर्गीय पर निकाल देते हैं, आगे से अस्पताल जाएं तो

    अब देखिये न पुरे देश के मरीज का इलाज करने वाले अपने ही अस्पताल में काम करने वाले ठेका वर्कर के साथ कैसे पेश आता है, अक्सर ऐसा होता है कि जाने-अनजाने में हम अस्पताल प्रशासन या डॉक्टर का गुस्सा मात्र न्यूनतम वेतन पर अपना पेट पालने वाले इन चतुर्थवर्गीय ठेका वर्कर पर निकाल देते हैं. अगली बार जब कभी आप अस्पताल जाए तो कम से कम इन वर्करों से प्यार से पेश आयें. मुझे ख़ुशी है कि मेरे एक छोटे से प्रयास (PIL) से ऐसे साथी लोग को फायदा मिला. ऐसे भी पुरे देश के ठेका वर्कर चुपचाप शोषण सहने को विवश हैं.

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    4 comments:

    1. आप ने जो PIL डाली है उसे सभी जो वर्कर एम्स मे कार्य कर रहे उनका वेतन बढ़ गया है मे आपको बहुत बहुत बधाई देता हूँ अौर आप गरीबो को उनका हक दिलवाते रहीये भाई जी

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      1. आपका मेरे ब्लॉग पर आने के लिए और कमेंट के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.आज भी सेंट्रल गवर्नमेंट के अंतर्गत काम करने वाले बहुत से वर्कर को न्यूनतम वेतन न देकर खुलेआम कानून का उलंघन किया जा रहा है. जिसके बाद लगता है कि बिना प्रचार प्रसार के केंद्र सरकार का नया न्यूनतम वेतन वृद्धि का फायदा सबको मिलना संभव नही. इसके लिए अपने साथियों को जितना हो सके जानकारी दें और हमारे यूट्यूब चैनल से जोड़ें - https://youtu.be/S_SHjHsIk0o

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    2. Aiims me kholli gunda gardi hoti hai wHa ke sab afsar pesa khate hai unke khane ke baad kahi jaake sulbh karmchari ko vetan milta aur ye aaj se nahi 15 saal se dhanda chal raha hai meri hath jod ke vinti hai sab se is msg ko jada se jada logo ko bataye

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      1. जानकारी देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्त. मगर इसके खिलाफ लड़ने के लिए कोई और नही आयेगा बल्कि आपलोगों को ही एकजुट होकर आवाज उठाना पड़ेगा.

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