मोदी के स्वच्छ भारत अभियान: Indian Railway ने की बाथरूम में चाय बनाने की शुरुआत

कल व्हाटएप्प पर एक वीडियों आया. जो कि देखने से किसी ट्रेन का लग रहा था. अगर आप उसको देख लेंगे तो घिन ही नहीं आएगी, बल्कि आगे से ट्रेन में सफर के दौरान Indian Railway के खाने-पिने का सामान खाने से परहेज करेंगे. सभी को पता है कि एक बार फिर से Indian railway ने 2017 से कैटरिंग सर्विस रेलवे ने आईआरसीटीसी को दे दी है.

जिसके बाद आईआरसीटीसी ने खुद डिपार्टमेंटल न चला कर पूरी सर्विस ही टेंडर जारी कर निजी कंपनियों को दी है. ऐसी बीच एक वीडियों सामने आता है कि किस तरह Indian Railway के  कर्मचारी मोदी जी के सपना को सच करते हुए स्वच्छ भारत अभियान के तहत बाथरूम में ही बनाते हुए दिखाई देते हैं. आइये जानते हैं इसके आगे क्या हुआ

वेंडिंग कांट्रैक्टर पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया

इसके बाद कल ही हमने उस वीडियों को अपने फेसबुक पेज WorkerVoice.in पर अपलोड करते हुए रेलमंत्री श्री पियूस गोयल और रेलमंत्रालय को जानकारी दी. इसके बाद आज के हिंदुस्तान अखबार ने दाबा किया गया है कि दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) ने बुधवार को वेंडिंग कांट्रैक्टर पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया. इस बार की जानकारी खुद रेलवे ने हैदराबाद में दी.
इस वीडियो की माने तो एक वेंडर को चाय / कॉफी के डिब्बे के साथ ट्रेन के शौचालय से बाहर निकलते देखा जा रहा है जिससे पता चलता है कि डिब्बों में शौचालय के भीतर से पानी मिलाया जा रहा था. वीडियो के सामने आने और वायरल होने के कुछ दिन बाद जारी की गयी विज्ञप्ति में कहा गया कि घटना पिछले साल दिसंबर में यहां के सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर चेन्नई सेंट्रल – हैदराबाद चारमीनार एक्सप्रेस में हुई.
इसके बारे में एससीआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी एम उमाशंकर कुमार ने विज्ञप्ति में कहा कि जांच के बाद सिकंदराबाद एवं काजीपेट के बीच के खंड पर काम करने वाले ट्रेन साइड वेंडिंग कांट्रैक्टर पी शिवप्रसाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गयी. जिस वेंडर को वीडियो में देखा गया है वो शिवप्रसाद के अंतर्गत कार्यरत था. उन्होंने बताया कि शिवप्रसाद पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया.
अब आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं कि क्या एक लाख के जुर्माना से आप खुश हैं. क्या उस ट्रेन साइड वेंडर का लाइसेंस रद्द नहीं होना चाहिए. इसके साथ ही उसको टेंडर देने वाले पर भी कार्रवाई होनी चाहिए कि नहीं? जानकारी के लिए बता दूं हर ट्रेन में आईआरसीटीसी का एक स्टाफ देखरेख के लिए होता है. क्या उसकी जिम्मेवारी नहीं बनती?

हम किसी भी कैटर या वेंडर को नहीं जानते. हम तो Indian Railway पर भरोषा कर ही कोई भी सेवा का उपयोग करते हैं. ऐसे में हमें तो पता भी नहीं की ये लोग India Railway के पीठ पीछे बाथरूम का चाय पीला रहे या खाना. ऐसे में रेलमंत्री को सामने आकर जबाब देना चाहिए कि रेल का किराया दोगुना करने के बाद भी यात्री के सेहत के साथ ये कैसा खिलवाड़.

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