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    Minimum Wages in Delhi Advisory Board का 28 Jan 2019 Meeting Updates

    Minimum Wages in Delhi Advisory Board का 28 Jan 2019 Meeting Updates

    आप सभी लोग बेसब्री इस इन्तजार कर रहे हैं कि Minimum Wages in Delhi Advisory Board के 28 Jan Meeting मीटिंग में क्या हुआ? इसका सबसे बड़ा कारण यह हैं कि इस मीटिंग में दिल्ली के मजदूरों का नया न्यूनतम वेतन तय होना हैं. इसके बारे में हमने ही पहले भी आपको उपडेट दिया था और इस बार भी उपडेट देने जा रहें हैं. उम्मीद करुंगा कि इससे जुड़ा कोई भी सवाल हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में बेहिचक पूछेंगे.

    Minimum Wages in Delhi कुछ ठोस नतीजे पर नहीं पंहुचा जा सका.

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली सरकार ने मजदूरों का नया न्यूनतम वेतन का तय करने के लिए Minimum Wages Advisory Board का गठन किया है. माननीय कोर्ट के 31 अक्टूबर 2018 के फैसले अनुसार बोर्ड को तीन महीने के अंदर न्यूनतम वेतन तय करना है. अभी 21 जनवरी 2019 को इसकी अहम बैठक हुई हैं. जिसमे कुछ ठोस नतीजे पर नहीं पंहुचा जा सका.

    Minimum Wages Advisory Board 28 जनवरी 2019 की मीटिंग की जानकारी

    विगत 21 जनवरी 2019 को इसकी बैठक के बारे में जानकारी के लिए हमने आपको Minimum Wages Advisory Board के सदस्य व सीटू दिल्ली के महासचिव श्री अनुराग सक्सेना से बातचीत दिखाई थी. आज हम आपको 28 जनवरी 2019 की मीटिंग की जानकारी देंगे. इस बार हम आपको Minimum Wages Advisory Board के दूसरे सदस्य व् सेन्ट्रल ट्रेड यूनियन एक्टू के नेता श्री वी.के.एस. गौतम से बातचीत का उपडेट देंगे. जिसको आप हमारे यूट्यूब चैनल वर्कर वॉयस डॉट इन पर या नीचे के लिंक को क्लीक कर देख सकते हैं.

    Minimum Wages in Delhi Advisory Board का 28 Jan 2019 Meeting Updates



    इससे इतना तो तय हैं कि वर्कर वॉयस ने अपना काम कर दिया हैं. आपकी आवाज वर्कर वॉयस के माध्यम से मजदुर संगठन और सरकार तक पहुंच चुकी हैं. आज आपलोगो के बदौलत ही न्यूनतम वेतन के फ़ूड यूनिट में माता-पिता के यूनिट को ऐड करना का आवाज उठाया गया हैं. अगर किसी भी तरह यह मांग पूरी हो जाती हैं तो न्यूनतम वेतन हर हाल में 14000 से ज्यादा होना तय हैं. इसका पूरा श्रेय आपके प्यार और समर्थन को जाता हैं.


    इतना ही नहीं बल्कि अभी के वर्तमान न्यूनतम वेतन में मकान किराया 874 रुपया मासिक कहीं से भी उचित दर नहीं हैं. आज जबकि न्यूनतम वेतन हर तबके के वर्कर को दिया जाता हैं अब चाहे वह फैक्ट्री, चाहे किसी सरकारी संस्थान में ठेका, आउटसोर्सिंग पर काम करते हों. ऐसे में 874 रुपया मासिक किराया में कबूतर का खोप तो मिल सकता हैं मगर एक मजदूर के रहने के लिए झोपडी नहीं. ऐसे भी न्यूनतम वेतन में Un Skilled से लेकर Highly Skilled यानी ग्रेड्यूट्स वर्कर का वेतन तय किया जाता हैं. अब बड़ा सवाल यह हैं कि कितने ग्रेड्यूट्स वर्कर परिवार झुग्गी में 874 रुपया मासिक किराया देकर रहता हैं?


    खैर, हम आपके एक-एक आवाज को सरकार तक पहुंचने में कोई कसर नहीं छोड़ रहें हैं. आपलोगों से भी निवेदन हैं कि इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि खबर देश के हरेक मजदुर भाइयों तक पहुचें.

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    2 comments:

    1. 874रुपया का किराया मकान का कहा लिया जाता है हमें बताओ सारे के सारे ले लेंगे दो हजार से बारह से ऊपर तक के मकान किराया मिलता है

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      1. आपने बिलकुल सभी बात कहा है दोस्त. इसके लिए सरकार दोषी है इसके साथ ही जिसने १४००० पहले तय किया वह भी. इसी में मकान किराया ८७४ रुपया लिखा है. यह बात हमने लोगो को बताया ही नहीं बल्कि सरकार को भी ईमेल कर उसको बढ़ाने का मांग ही नहीं किया बल्कि माता-पिता का यूनिट जोड़ न्यूनतम वेतन २६००० का प्रपोजल भी भेजा. पढ़िए - https://www.workervoice.in/2018/12/Minimum-Wages-26000-Montly-Delhi-Govt-Proposal-Suggestion.html

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