CAB CAA NRC: अभी हाल ही में मोदी सरकार के द्वारा CAB (Citizenship Amendment Bill) पास होने के बाद Act का रूप ले चूका हैं. इसके बाद सरकार के तरफ से अमित शाह का यह भी बयान आया हैं कि अब पुरे देश में NRC (National Register of Citizens) लागू होगा. जिसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. ऐसे में हर लोगों की अपनी-अपनी राय हैं. मगर फिर भी लोगों के मन में हैं कि आखिर “यह CAB CAA और NRC क्या हैं और इसका आमजन मजदूरों पर क्या असर होगा.” हम इसको बहुत ही साधारण तरीके से बताने की कोशिश करेंगे ताकि आप इसके विरोध के वजह को समझ सकें और अपनी प्रतिक्रिया दें सकें.
CAB CAA NRC क्या है, लागू होने से मजदूरों पर क्या असर होगा
अब सबसे पहले समझते हैं कि यह मोदी सरकार के द्वारा CAB (Citizenship Amendment Bill) क्या हैं और आखिर सरकार को इसको लाने की जरुरत क्यों पड़ी? दरअसल केंद्र सरकार इसके जरिये में The Citizenship Act 1955 में संसोधन (बदलाब) करना चाहती हैं ताकि अफगानिस्तान, पकिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दू, बौद्ध, सिख, ईसाई, पारसी कोई भारत में नागरिकता दे सके. इसके लागू होते ही उनलोगों को आसानी से भारत की नागरिकता मिल जाएगी. इसमें सरकार ने मुसलमानों को छोड़ दिया है.
कानून में इस बदलाब के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान जैसे देशों से जो गैर-मुस्लिम शरणार्थी भारत आएंगे, उन्हें यहां की नागरिकता मिलना आसान हो जाएगा. इसके लिए उन्हें भारत में कम से कम 6 साल बिताने होंगे. पहले नागरिकता देने का पैमाना 11 साल से अधिक था. असल विरोध यही से शुरू होता हैं. इसके बारे में विपक्ष का आरोप हैं कि मोदी सरकार का यह फैसला धर्म के आधार पर बांटने वाला हैं. इसके साथ ही यह संविधान के आर्टिकल 14 का उलंघन हैं.
देश कि आबादी 130 करोड़ पार कर चुकी?
यह तो हुआ, जो सरकार ने बदलाव किया. अब यह जानना बहुत जरुरी हैं कि आखिर सरकार को ऐसा कदम क्यों उठाना पड़ा. इसको समझने के लिए आपको थोड़ा असम के तरफ रुख करना होगा. इसके साथ ही हम समझ पायेंगे कि किस तरह से CAB और NRC एक दूसरे से कनेक्टेड हैं और सरकार की इसके पीछे मनसा क्या हैं?
CAA और NRC को मिलकर देखते हैं तो क्या सामने आता हैं?
NRC में नाम छूट गया या छोड़ दिया गया तो?
भागी बहादुर 1962 के भारत-चीन युद्ध में गोरखा रेजीमेंट की ओर से लड़ चुके हैं फिर भी बस्का के अंबारी गांव में रहने वाला उनका परिवार अब एनआरसी की फाइनल लिस्ट से बाहर हो गया है.आपको क्या लगता कि उनके पास कागज नहीं रहे होंगे. वो अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाये और बंदी बना लिए गए. अब सोचिए एक सेना का पढ़ा-लिखा जवान के साथ ऐसा हो सकता तो कल एक अनपढ़ मजदुर जिसको गैस का सब्सिडी तक खाता में नहीं आता तब भी उसको चालू नहीं करवा सकता. उसका अगर सरकारी तंत्र की गलती से NRC में नाम छूट गया या छोड़ दिया गया तो घुश्पैठिया ही घोषित होगा.
CAA और NRC मजदूरों पर क्या असर होगा?
अब देखिए न बिहार में हर साल बाढ़ आता हैं. ऐसे में ज्यादातर गरीबों के पास सिर छिपाने का जगह ही नहीं हैं ऐसे में बड़ा सवाल उठता हैं कि वो किस कागज के जरिये अपनी नागरिकता साबित कर पायेंगे? आज झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले दिहाड़ी मजदुर की कौन सोचेगा? आप पढ़ें लिखें हैं तो आपका फर्ज नहीं बनता कि उनको चिंता आप करें?
CAB CAA और NRC क्या हैं और इसका मजदूरों पर क्या असर होगा?
NRC लागू करने में खर्चा नहीं आयेगा?
मगर हमारी राय तो यह हैं कि मान लीजिये कि आपके मोहल्ले में चोरी होती हैं तो क्या पुलिस चोर को पकड़ने के लिए पुरे मोहल्ले के एक-एक व्यक्ति को थाने में बुलाकर यह तो नहीं कहेगी कि तुमने चोरी नहीं की इसका सबूत दो? बल्कि आप कहेंगे नहीं ..पुलिस संदिग्ध से पूछताक्ष और फिर करवाई करेगी. यही बात, अगर सरकार या प्रशासन को कोई घुश्पैठिया लगता हैं या किसी की शिकायत मिली हो तो उसकी जाँच करें न.
अब इसके लिए नोटबंदी की तरह फिर से आम जनता को लाइन में लगाने की क्या जरुरत हैं. सरकार के नोटबंदी से कितना कालाधन आया और कितना कालाधन वाला लाइन में लगा वह आप सभी को पता हैं. बैंक की लाइन में 150 से ज्यादा आम आदमी मारे गए. आप ही सोचिए न कि एक मगरमच्छ को पकड़ने के लिए पूरा तालाब सुखना कहाँ तक बुद्धिमानी हैं. ऐसे में सैंकड़ों मछलिया तो मर जायेगी उसका क्या?
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Surjeet Shyamal एक श्रमिक जागरूकता लेखक हैं, जो Private Employees को PF, वेतन, ग्रेच्युटी और लेबर कानून से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सरल हिंदी में प्रदान करते हैं। उनका लक्ष्य कर्मचारियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना और सही मार्गदर्शन देना है, ताकि वे सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य जीवन जी सकें। Read More
सुरजीत ज़ब आप जैसे लोग इसतरह से समस्याओ को बताते हैं तो डर जरूर लगता है लेकिन जो मुझे समझ मे आता वो ये की हम इस देश के नागरिक हैं और हम हमेसा रहेंगे इसमें कोई सक नहीं हैं लेकिन हमारी समस्या क्या है की सब कुछ हम सरकार के भरोसे छोड़ देना चाहते हैँ जो सही नहीं है आज जिस क़ानून का बरोध हम कर रहे हैं अगर उसको ना कर के उसमे जो खमियां है उसके ऊपर सरकार को घेरें तो सायद ज्यादा फ़ायदा होगा हमारे लिए देश के लिए अगर खामियों को हम दूर करा ले तो कमसे कम अपना और अपने परिवार का भविष्य तो सुरक्छित कर सकते हैं लेकिन उन कमियों को दूर कराने के बजह हम उस काम को ही ख़राबकेह रहे हैं जो अगर नहीं किया गया तो हम ज्यादा नुकसान उठा ने पे मजबूर होना पड़ेगा ऐसा मुझे लगता है ये मेरा मानना है बाक़ी आप तो पढ़े लिखे लोग है आप को सोचना है की खून किसी के काम आना चाहिए या रोड पे यूँही बहने देना चाहिए सोचना जरुर…