सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन में सैलरी मिलेगी या नहीं मैटर में फैसला दिया

सुप्रीम कोर्ट ने “लॉकडाउन में सैलरी मिलेगी या नहीं” मैटर में फैसला आना था. आपलोगों को बेसब्री से इंतजार होगा कि क्या फैसला आया? सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 4 जून को फैसला सुरक्षित रख लिया था. जिसका फैसला 12 जून को आना था. आज हम अपने इस पोस्ट में इस फैसले की मुख्य बातों की जानकारी देने जा रहे हैं. इसके साथ बतायेंगे कि अभी भी आपको लॉकडाउन में सैलरी नहीं मिली तो क्या करना होगा.

लॉकडाउन में सैलरी

केंद्र सरकार ने कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए Lockdown किया था. जिसके बाद प्रवासी मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए 29 मार्च 2020 को एक सर्कुलर जारी किया था. जिसके अनुसार कोई भी नियोक्ता “किसी भी कर्मचारी का Lockdown अवधि के दौरान न तो Salary देने में देरी करेगा और न ही कटौती ही करेगा”.

जिस नोटिफिकेशन को कुछ नियोक्ता सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देता हैं. जिसमें माननीय कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 4 जून को फैसला सुरक्षित रख लिया था. जिसका फाइनल आर्डर 12 जून को आ चुका है. आइये हम जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने 28 पेज के फैसले में क्या कहा?

लॉकडाउन में सैलरी – सुप्रीम कोर्ट फैसला

केंद्र सरकार के लॉकडाउन के दौरान सैलरी के नोटिफिकेशन को नियोक्ता और नियोक्ता संघ ने चुनौती दी हैं. इस नोटिफिकेशन का कुछ नियोक्ता याचिकाकर्ता ने पुरजोर विरोध किया तो कुछ ने आधी सैलरी देने की बात की हैं. इसके साथ ही कुछ नियोक्ता ने यह भी कहा कि यह तो प्रवासी मजदूरों के लिए हैं. कुछ ने तो यह भी कहा कि लॉकडाउन के वजह से उनकी कंपनी/फैक्ट्री बंद हैं. ऐसे में केंद्र सरकार कोई उनको राहत देना चाहिए.

एक तरह से देखें तो कोई भी याचिकाकर्ता कंपनी किसी भी हाल में कर्मचारियों को सैलरी देने के पक्ष में नहीं हैं. इसके लिए उन्होंने अलग-अलग तथ्य और समस्या कोर्ट के सामने प्रस्तुत करते हुए केंद्र सरकार के नोटिफकेशन रद्द करने की मांग की.

कुछ एम्प्लोयी/ट्रेड यूनियन ने भी केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के समर्थन में याचिका लगाई थी. एम्प्लायर याचिकाकर्ताओं के अपील के केंद्र सरकार ने जवाब दिया. जिसके लिए केंद्र का प्रतिनिधित्व श्री के.के. वेणुगोपाल अटॉर्नी जनरल ने किया.

उन्होंने केंद्र सरकार के तरफ से खंडन करते हुए कहा था कि कुछ नियोक्ता ने कहा हैं कि पूरी सैलरी केवल प्रवासी कामगारों को देने चाहिए. जबकि ऐसे समय में उनके नियमित कर्मचारियों को भी पूरी सैलरी देनी चाहिए. जब व्यवसाय प्रभावी रूप से बंद हो, और उनके पास कोई आय न हो.

इस पर याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सभी उद्योगों और निजी प्रतिष्ठानों की वित्तीय क्षमता अलग-अलग है, परिस्थितियों और सभी प्रतिष्ठानों को लॉकडाउन अवधि के दौरान अपने कर्मचारियों को मजदूरी का भुगतान करने की दिशा जारी करने के लिए एक श्रेणी में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है और संभावित रूप से किसी भी कार्यकारी कार्रवाई द्वारा निर्देशित नहीं किया जा सकता है.

याचिकाकर्ता प्रार्थना के साथ आगे आए हैं कि वे उक्त अवधि के दौरान 50 प्रतिशत मजदूरी देने के लिए तैयार हैं. उनमें से कुछ ने कहा कि वे अपने कर्मचारियों के साथ तालाबंदी की अवधि के दौरान मजदूरी के भुगतान के संबंध में बातचीत कर रहे हैं और कुछ श्रमिकों ने तो फिर से नौकरी जॉइन कर चुके हैं.

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में लॉकडाउन में सैलरी के आदेश 29 मार्च 2020 को सही ठहराया हैं. सभी के बातों का खंडन करते हुए कहा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जनहित में दिनांक 29.03.2020 का निर्देश जारी किया गया हैं. यह दिशा-निर्देश न तो मनमाने और न ही मनमौजी आदेश हैं.

भारत सरकार के द्वारा तालाबंदी अवधि के दौरान कर्मचारियों और श्रमिकों विशेषकर संविदात्मक और आकस्मिक श्रमिकों की वित्तीय कठिनाई को कम करने के लिए एक अस्थायी उपाय के रूप में उपरोक्त निर्देश जारी किया है. श्री वेणुगोपाल ने कहा कि 17.05.2020 के आदेश से, राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति ने अपने पहले से लागू निर्देशों को रद्द कर दिया है. जिसके बाद लॉकडाउन में सैलरी देने का का यह आदेश केवल 54 दिनों तक ही लागू रहेगा.

समाज में मजदूरों और कर्मचारियों के निचले तबके के भीतर वित्तीय संकट को रोकने के लिए प्रतिवादी द्वारा यह उपाय किया गया था. भारत सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देश जहां वस्तु में एक परोपकार के रूप में आर्थिक और कल्याणकारी उपाय को प्राप्त करने की मांग करते हैं.

भारत सरकार ने सभी लघु और मध्यम उद्योगों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की पेशकश की है ताकि उन्हें मौजूदा वित्तीय स्थिति का सामना करने में सक्षम बनाया जा सके ताकि वे सुनिश्चित हो सकें कि वे मजदूरी के भुगतान के बोझ से निपट सकें और व्यवहार्य बने रहें.

सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन में सैलरी मिलेगी या नहीं मैटर में फैसला दिया

सुप्रीम कोर्ट फैसला

कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा हैं कि हमारा विचार है कि याचिकाकर्ताओं और उत्तरदाताओं द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को एक साथ तय किया जाना है इस प्रकार हमारा विचार है कि भारत सरकार एक विस्तृत काउंटर हलफनामा दाखिल कर सकती है, जिसके लिए उन्होंने पहले ही चार हफ्ते की अवधि के भीतर काउंटर हलफनामे में प्रार्थना की है.  प्रतिउत्तर जिसे एक सप्ताह की अवधि के भीतर दायर किया जाना है और जुलाई 2020 के अंतिम सप्ताह में फिर सुनवाई की जायेगी.

कुछ रिट याचिकाओं में, इस अदालत ने पहले ही नियोक्ता के खिलाफ कोई भी कठोर कार्रवाई नहीं करने का आदेश पारित किया था. दिनांक 04.06.2020 के हमारे आदेश में, हमने निर्देशित किया है “इस बीच, 29.03.2020 की अधिसूचना के अनुसार नियोक्ताओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाएगी”. उपरोक्त आदेश सभी मामलों में जारी रहेगा.

लॉकडाउन नियोक्ताओं के साथ-साथ कर्मचारियों पर भी उतना ही विपरीत प्रभाव पड़ा. विभिन्न उद्योगों, प्रतिष्ठानों को उक्त अवधि के दौरान कार्य करने की अनुमति नहीं थी और जो कार्य करने की अनुमति देते थे, वे भी अपनी क्षमता के अनुसार कार्य नहीं कर सकते थे. श्रमिक और कर्मचारी हालांकि काम करने के लिए तैयार थे, लेकिन उद्योगों के बंद होने के कारण काम नहीं कर सके और नुकसान उठाना पड़ा.

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, सभी उद्योग / प्रतिष्ठान अलग-अलग प्रकृति, वित्तीय क्षमता सहित अलग-अलग क्षमता के हैं. अधिकांश उद्योगों, कारखानों और प्रतिष्ठानों में, श्रमिकों का प्रतिनिधित्व ट्रेड यूनियनों या अन्य कर्मचारी संघों द्वारा किया जाता है. राज्य यह भी सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है कि औद्योगिक प्रतिष्ठान सुचारू रूप से चल रहे हैं और नियोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच विवाद सुलझाए जा सकते हैं.

यह विवादित नहीं हो सकता है कि उद्योग और मजदूर दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है. इसके विपरीत कोई भी उद्योग या प्रतिष्ठान कर्मचारियों / मजदूरों के बिना जीवित नहीं रह सकता. हम इस प्रकार से राय रखते हैं कि श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच 50 दिनों के ऊपर के वेतन के भुगतान के संबंध में मतभेदों और विवादों को सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए.

हम इस प्रकार अंतरिम उपायों का पालन करते हैं, जिसका लाभ सभी निजी प्रतिष्ठान, उद्योग, कारखाने और श्रमिक ट्रेड यूनियन / कर्मचारी संघ आदि उठा सकते हैं, जिन्हें राज्य प्राधिकरण द्वारा सुविधा दी जा सकती है.

  1. निजी प्रतिष्ठान, उद्योग, नियोक्ता जो किसी विशेष राज्य में लागू होने के दौरान 50 दिनों के लिए या किसी अन्य अवधि के लिए मजदूरी / भुगतान के संबंध में श्रमिकों / कर्मचारियों के साथ बातचीत और समझौता करने के लिए तैयार है. जिस दौरान लॉकडाउन के कारण उनका औद्योगिक प्रतिष्ठान बंद हो गया था. वो इसके लिए आपस में बातचीत की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं और यदि वे खुद से समझौता करने में असमर्थ हैं, तो संबंधित श्रम अधिकारियों को एक अनुरोध सौंपें, जो विभिन्न विवादों के तहत दायित्व को सौंपने के लिए विवाद के बीच सौंपे जाते हैं. ऐसे अनुरोध प्राप्त करने वाले पक्ष, संबंधित कर्मचारी व्यापार संघ / श्रमिक संघ / कार्यकर्ताओं को बातचीत, सुलह और समझौता करने की तारीख पर उपस्थित होने के लिए बुला सकते है. नियोक्ताओं और श्रमिकों का समझौता भारत सरकार, गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए 29.03.2020 के आदेश आदेश के बावजूद किया जायेगा.
  2. उन नियोक्ताओं के प्रतिष्ठान, उद्योग, कारखाने जो लॉकडाउन की अवधि के दौरान काम कर रहे थे. अगर हालांकि उनकी क्षमता के अनुसार नहीं है तो वो भी उठा सकते जैसा कि दिशा संख्या (i) में दर्शाया गया है.
  3. निजी प्रतिष्ठान, उद्योग, कारखाने श्रमिकों / कर्मचारियों को उनकी स्थापना में काम करने की अनुमति देंगे जो काम करने के इच्छुक हैं, जो श्रमिकों / कर्मचारियों के अधिकारों के पक्षपात के बिना 50 दिनों से अधिक के अवैतनिक मजदूरी के लिए हो सकते हैं. निजी प्रतिष्ठान, कारखाने जो दिशा-निर्देश (i) और (ii) के अनुसार कदम उठाने के लिए आगे बढ़ते हैं, अपनी प्रतिक्रिया / भागीदारी के लिए श्रमिकों और कर्मचारियों को ऐसे कदमों के बारे में प्रचार और संचार करेंगे. निपटान, यदि कोई हो, जैसा कि ऊपर बताया गया है, नियोक्ता और कर्मचारियों के अधिकारों के पक्षपात के बिना होगा, जो इन रिट याचिकाओं में लंबित है.
  4. केंद्र सरकार, सभी राज्य / केंद्रशासित प्रदेश अपने श्रम मंत्रालय के माध्यम से को प्रसारित करेंगे और सभी निजी प्रतिष्ठानों, नियोक्ताओं, कारखानों और श्रमिकों / कर्मचारियों के लाभ के लिए इस आदेश का प्रचार करेंगे.

जिन लोगों ने याचिका लगाईं हैं नियोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच कोई समझौता किया जाता है तो विवरण देने का एक हलफनामा देना होगा. जो सुनवाई की अगली तारीख तक दायर किया जाएगा. जो कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में सूचीबद्ध होगा.

SC Judgment 12.06.2020

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12 thoughts on “सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन में सैलरी मिलेगी या नहीं मैटर में फैसला दिया”

  1. Sar namaste ji abhi tak Meri salary Nahin Mili Hai a chuki hai koi abhi tak Nahin I hai aur Kahate Hain Ki Ham Ghar Baithe Hain Ki Kya Tumhen salary Denge

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  2. Dear sir
    Jaipur mai pyramid exports company hume payment nahi kar rahi hai aur job se bhi hata diya aur hume salary mangne per job se hata diya aur mujhe nuksaan pachuchane ki kosis bhi kar rahe hai aap bata de kya kare koi bhi sahi reply nahi de raha
    Labour office mai bhi written letter de diya waha se koi response nahi hai wo mana kar rahe hai kisi bhi tarah ki madat ke liye

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    • जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के बाद किस तरह अपना समस्या रखनी हैं. इसकी जानकारी दी जायेगी.

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  3. सर हमने अपने मालिक से बात की है कहते है काम नही तोह पैसे नही मिलेंगे हमें 25 march से 17 may तक का सैलरी नही मिला है तोह फिर हम क्या करे।

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  4. 50 दिनों में 25 मार्च से 17 मई, यानी कंपनी को अप्रैल महीने का वेतन देना पड़ेगा???

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  5. Sir ji Central Government ka 29 March wala notification kaha se milega, aur supreme court ke naye Jo videsh nikale Hain uska PDF kaha se milega

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  6. Khurshid Alam
    Sir mai delhi me shopzo brand pvt.ltd me kam karrahatha lockdown k bad company ne pure March ka payment nahi kiya hai aur August tak baitha rakhkhi hai payment magne se company bolrahi hai k pahle app regignation do
    Sir keya kare kuch samajh nahi araha hai please advise me

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