Central Government Contract Employees Salary समान वेतन नियम

Central Government Contract Employees Salary – अगर आप किसी भी सेंट्रल गवर्नमेंट के ऑफिस, मंत्रालय, पीएसयू आदि में कॉन्ट्रैक्ट वर्कर, आउटसोर्स वर्कर या डेली वेजर के रूप में काम करते है। ऐसे में आपको अपने इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं कि आपको समान वेतन पाने का क्या नियम है। जिसके तहत केंद्र सरकार के द्वारा जारी सर्कुलर का कॉपी भी देंगे, जिससे की आप अपने विभाग में दिखाकर मांग कर सकें।

Central Government Contract Employees Salary

अभी देश में मंहगाई का जो स्तर बढ़ा है। जिसके बाद आपको मिलने वाला सैलरी एक बार फिर से कम लग रहा होगा। अभी तक आपको केवल न्यूनतम वेतन पर संतोष करना पड़ता है। जबकि आप जो काम करते हैं उसके अनुसार आपको समान काम का समान वेतन मिलना चाहिए।

अब इसके बाद आपके मन में यह सवाल जरूर होगा कि आखिर समान काम का समान वेतन पाने का क्या नियम है? हम आपको क़ानूनी प्रावधान के साथ प्रूफ भी देने जा रहे हैं, जिससे आपकी मांग को मजबूती मिलेगी।

Contract Employees Salary समान वेतन नियम

भारत सरकार की ओर से मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) द्वारा 23 जनवरी 2013 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया गया था। जिसके पैरा 2 के अनुसार-

  • हाल के दिनों में यह देखा गया है कि विभिन्न केंद्रीय सरकारी मंत्रालयों और विभागों द्वारा बड़ी संख्या में श्रमिकों को संविदा पर नियुक्त किया जा रहा है। इस संबंध में संसद में प्रश्न प्राप्त हुए हैं, साथ ही कानून के विभिन्न प्रावधानों के अनुपालन न होने से संबंधित कई शिकायतें भी मिली हैं। इनमें विभिन्न कानूनों के तहत मिलने वाले वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ शामिल हैं।
  • इसी प्रकार, यदि ठेकेदार द्वारा नियोजित श्रमिक, प्रतिष्ठान के प्रधान नियोक्ता द्वारा सीधे नियोजित श्रमिकों के समान या मिलते-जुलते प्रकार का कार्य करते हैं, तो ठेकेदार के श्रमिकों की मजदूरी दरें, छुट्टियां, कार्य के घंटे और सेवा की अन्य शर्तें वही होंगी जो प्रतिष्ठान के प्रधान नियोक्ता द्वारा सीधे नियोजित श्रमिकों पर समान या मिलते-जुलते प्रकार के कार्य के लिए लागू होती हैं।

कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी का कितना सैलरी?

जी हां, आपने बिलकुल सही पढ़ा कि अगर कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी उसी विभाग में काम करने वाले सरकारी कर्मचारी के बराबर काम कर रहा है। ऐसे में उसको उसके बराबर सैलरी, काम के घंटे और सेवा शर्त होनी चाहिए। कहने एक मतलब सैलरी ही नहीं बल्कि परमोशन आदि एक भी लाभ मिलना चाहिए। जबकि एक कॉन्ट्रैक्ट वर्कर का हर साल सेवा रेन्यु का उसको हर साल फ्रेसर कर दिया जाता है, ताकि उसको उपयुक्त कोई भी सुविधा नहीं दिया जा सकें।

अब आप इससे खुद ही देख सकते हैं कि आप (Contract Employees) जिस विभाग में काम करते हैं। उस विभाग के किस सरकारी कर्मचारी के बराबर काम करते हैं। आपके और उस सरकारी कर्मचारी के सैलरी में कितना का अंतर है। एक तरफ आपको समय से न्यूनतम वेतन भी नहीं मिलता है तो दूसरी तरफ सरकारी कर्मचारी के लिए 8वें वेतन आयोग के लागू करने की बात चल रही है।

Central Government Contract Employees Salary समान वेतन नियम

कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 42 फीसदी

केंद्र सरकार के द्वारा सुरजीत श्यामल बनाम भारत सरकार जनहित याचिका की मांग के से 2017 में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 42 फीसदी बढ़ाया गया था। जिसके बाद न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के अनुसार 5 साल के बाद न्यूनतम वेतन का रिवाइज किया जाना चाहिए था। जबकि अभी 8 साल बीतने जा रहा है और ऐसा लगता है कि केंद्र की मोदी सरकार को केंद्र में काम करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का कोई परवाह नहीं है। आप अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखकर बतायेंगे।

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