प्रभुजी के नाक के नीचे रेलनीर घोटाला गति पर, शिकायत को किया अनदेखी

Blog –भारतील रेल में 2 करोड़ 30 लाख यात्री रोज़ यात्रा करते हैं. जिसमे यात्रा के दौरान यात्री की सुरक्षा से लेकर खानपान तक के लिए रेलवे ने व्यवस्था कर रखी है. अब बात अलग है कि यात्रियों को कुछ भष्ट्र अधिकारियों के कारण जी सुविधा या सुरक्षा मिलना चाहिए वह नहीं मिल पता है. अभी हाल ही में ट्रेन में रेलनीर घोटाला की शिकायत की थी. जिस पर रेलमंत्री ने चुप्पी साध ली.

रेलनीर घोटाला गति पर

यहाँ अपनी आपबीती शेयर करने जा रहा हूँ. जिससे आपको आसानी से समझ में आ जायेगा कि ट्रेन में किस तरह से रेलनीर घोटाला गति पर है. दिनांक 02 जून को 2017 को नई दिल्ली से पटना के लिए सुपरफास्ट सम्पूर्ण क्रांति एक्सप्रेस के एस-7 में सीट आरक्षित था. ट्रेन अपने टाइम से खुली मगर पुरे ट्रेन कि तुलना में एस-7 कोच में अत्यधिक भीड़ थी. गर्मी के मारे गाला सुख रहा था. करीब 2 घंटे कि यात्रा करने के बाद ट्रेन का वेंडर पानी लेकर आया. जब मैंने पानी माँगा तो उसने पूछा कि सर कितना बोतल दे दूँ. मैंने सोचा कि पता नहीं बाद में पानी मिले न मिले और बोला कि 4 बोतल दे दो.

मगर यह क्या? रेलनीर कि जगह सस्ता बोतलबंद पेयजल “पवन एक्वा” दे रहा था. जब पूछा कि मुझे केवल रेलनीर ही चाहिए तो उस वेंडर ने कहा सर एस ट्रेन में केवल यही मिलेगा. चाहे तो आप बगल में पेट्री कार में पता कर लें. उस समय मज़बूरी में 2 बोतल वही सस्ता बोतलबंद पानी ले लिया. मगर भीड़ छटने के बाद पेंट्री कार में रेलनीर ढूंढने गया. मगर या क्या वहां भी यही जबाब मिला कि सम्पूर्ण क्रांति एक्सप्रेस में रेलनीर कि सप्लाई है ही नहीं.

जिसके तुरंत बाद ही माननीय रेलमंत्री श्री सुरेश प्रभु, डीआरएम, नॉर्थन रेलवे, दिल्ली, आईआरसीटीसी पीआरओ को ट्विटर के द्वारा शिकायत किया. जिसके तुरंत ही मुझे ट्विटर के द्वारा पीएनआर नंबर माँगा गया और बताया गया कि आपकी शिकायत सम्बंधित विभाग को करवाई के लिए भेजा दिया गया है. जिसके बाद मैंने पीएनआर नंबर देने के बाद अगले स्टेशन पर रेलनीर उपलब्ध करने की मांग की. उसके जबाब में दुबारा आया कि “आपकी शिकायत सम्बंधित विभाग को करवाई के लिए भेजा दिया गया है”.

मज़बूरी में दुबारा से पानी के के जरुरत पड़ी वही डब्बा लेना पड़ा. जिसमे 1 बोतल “पवन एक्वा” और दूसरा “बीबो” का दिया गया. पूरी रात रेल के अधिकारी केवल ट्विटर-2 खेलते रहें.. मगर रेलनीर उपलब्ध तो दूर किसी का संतोषजनक उतर तक नहीं आया. मिडिया में काफी कुछ सुनने को मिलता था कि अमुक यात्री ने सुरेश प्रभु कि ट्वीट किया और फलां सुविधा उपलब्ध कराई गई. खैर सुबह समय से भारी मन से पटना पहुँच गया.

Railneer
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 घर पहुंचते ही सुबह जो सम्बंधित विभाग से जबाब आया वह चौकाने वाला था. रेलवे ने @IRCATERING‏  ने उपरोक्त शिकायत का निवारण हेतु कहा की सीमित उत्पादन के कारण सभी स्टेशनों और ट्रेनों को अनिवार्य रूप से रेलनीयर की आपूर्ति नहीं किया जाता है.

क्या आप जानते है रेल नीर घोटाला क्या है?

सभी की याद होगा अक्टूबर 2016 की घटना जब राजधानी एक्सप्रेस और अन्य सुपर फास्ट ट्रेनों में बोतलबंद पेयजल की आपूर्ति में कथित भ्रष्टाचार के सिलसिले छापेमारी हुई थी और कुछ अधिकारिओं को गिरफ्तार भी किया गया था. एनडीटीवी के खबर के अनुसार विशेष सीबीआई न्यायाधीश विनोद कुमार ने वरिष्ठ रेल अधिकारी – संदीप सिलास और एमएस चालिया और व्यापारी शरण बिहारी अग्रवाल को उस वक्त न्यायिक हिरासत में भेजा था. जांच एजेंसी ने कहा था कि सिलास और चलिया ने अग्रवाल के साथ साजिश रची और रेल नीर लेने की जगह उन्होंने कुछ निजी फर्मों को ट्रेनों में पानी आपूर्ति करने की इजाजत दे दी.
जिससे सरकारी खजाने को तकरीबन 6.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. सीबीआई ने कहा कि जांच के दौरान छापेमारी की गई। छापेमारी में तकरीबन 28 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए जिनमें से चार लाख रुपये के जाली नोट थे. सीबीआई ने आरोप लगाया कि सिलास और चलिया मुख्य व्यावसायिक प्रबंधक के पद पर आसीन थे और उन्होंने रेल नीर की जगह सस्ते बोतलबंद पेयजल की आपूर्ति के लिए इन कंपनियों की तरफदारी की.

रेलनीर के जगह लोकल पानी का बोतल सप्लाई के पीछे असली कारण क्या है?

रेलवे बोर्ड के आदेश के मुताबिक रेल नीर की बोतलें आईआरसीटीसी से प्राइवेट सप्लायरों को 10.50 रुपए प्रति बोतल कीमत पर मिलती है जबकि इन सप्लायरों को यात्रियों को ये बोतलें 15 रुपए प्रति बोतल के हिसाब से बेचना तय किया गया है. मगर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार से सराबोर इन अधिकारियों ने प्राइवेट सप्लायरों से 6-7 रुपए कीमत वाली पानी की बोतलें खरीदकर ट्रेनों में बेचना शुरू कर दिया. इन बोतलों के पानी की शुद्धता की भी कोई गारंटी नहीं होती थी. इस तरह रेल यात्रियों के स्वास्थ्य से खुलेआम खिलवाड़ होता रहा.

यह भी बात भी जाने पवन एक्वा के बारे में

नई दुनिया में छपी खबर के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जयप्रकाश नड्डा, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यक्रम में बांटी गई अमन एक्वा पानी की बोलत में सांप मिलने से हड़कंप मच गया था. जो कि एक तरफ से देखें तो आम आदमी/यात्री के लिए काफी हैरान करने वाला है.

रेलनीर के बारे में सुप्रीम कोर्ट का क्या आदेश है? 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में अगस्त 2016 में छापी खबर के अनुसार माननीय सुप्रीम कोर्ट ने केवल रेलवे को मुंबई डिवीज़न के अंतर्गत ट्रेनों और स्टेशनों पर केवल रेलनीर बेचने का आर्डर दिया था. यह आर्डर यात्रीयों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर दिया गया था. अब सवाल यह है कि क्या बांकी शहरों में लोकल पेय जल स्वास्थ्यवर्धक कैसे हो सकता है.
इस सभी बातों के विश्लेषण करें, तो जब दिल्ली से खुलने वाली सम्पूर्ण क्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस में रेलनीर कि जगह सस्ता ब्रांड “पवन एक्वा” “बीबो” आदि खुलेआम बेचा जा रहा है, मतलब साफ यही कि भारत के राजकीयकोष कि चुना लगाकर लोकल ठेकेदार को फायदा पहुँचाने का काम जोरो पर है. प्रभुजी के नाक के नीचे अभी भी रेलनीर घोटाला गति पर है. भले ही मोदी जी भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा देते रहें. मगर शिकायत करने के बाद भी अधिकारिओं के कान खड़े होने के बजाए आँखें मूँद लेना, रेल प्रशासन पर सवालिया निशान खड़ा करता है. मगर जनता को पता होना चाहिए की उनकी खून पसीने की कमाई को लेकर किस तरह उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है.
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