महापर्व छठ में भी Bihar Teacher को नही मिला वेतन, अब क्या होगा

बिहार में छठ पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि कोई भी पर्व बिना पैसों के सही तरीके से मनाया जा सकता है. मगर बिहार नियोजित शिक्षक (Bihar Teacher) को काली दीपावली  मनाने के बाद छठ में भी वेतन के लिए मंत्री से संतरी तक के दरवार में चक्कर लगा रहे हैं. इसको लेकर कल दिनांक 23.10.2017 को TSUNSS बिहार (गोपगुट) का प्रतिनिधि मंडल लम्बित D.EL.ED परीक्षा कराने हेतू बोर्ड कार्यालय जाने के बाद निदेशक प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, प्रधान सचिव सहित शिक्षा मंत्री से मिल बात रखी एवं वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए शिक्षकों की व्यथा सुनाई. बिहार टीचर का भुगतान ना होने पर शिक्षा मंत्री नें दुख जताते हुए पर्सनल सेक्रेटरी, आला अफसर को तलब किया.

बिहार टीचर को नही मिला वेतन

Bihar Teacher के भुगतान सम्बन्धी संचिका भेजी जा चुकी है, फिर भी अबतक वेतन भुगतान नही हुआ. मगर सवाल उठता है कि आखिर मामला कहां फंस गया. संघीय शिक्षक प्रतिनिधियों नें कहा – यदि अविलम्ब भुगतान नही हुआ तो मूल्यांकन का बहिष्कार करते हुए आंदोलन हेतू संघ बाध्य होगा. सरकार के इस उदासीन रवैया को मद्देनजर शिक्षकों ने कहा है कि सरकार हमें समय पर सम्मानजनक वेतन ना देकर हमारा आर्थिक मानसिक शोषण कर रही है.

एक तरफ़ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात की जा रही है लेकिन वही दुसरी ओर शिक्षक, सरकारी उदासीनता से स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहें हैं. इस प्रतिनिधि मंडल में TSUNSS बिहार (गोपगुट) के प्रदेश सचिव अमित कुमार एवं सैयद शाकिर इमाम, प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पाण्डेय, सीतामढ़ी के सर्वेश कुमार, नितेश कुमार, देवव्रत कुमार, एवं पश्चिम चम्पारण के जिला सोशल मीडिया प्रभारी सुनिल कुमार “राउत” शामिल थे.
इधर परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्री बंशीधर वृजवासी ने कहा कि दीपावली और छठ जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के मौके पर भी हम नियोजित शिक्षकों को वेतन नहीं देना घोर निराशाजनक और सरकार  शिक्षक विरोधी मानसिकता का परिचायक है. उन्होंने आगे कहा कि सोशल मीडिया मे शिक्षकों का गुस्सा बिल्कुल जायज और आहत मन की वेदना का प्रस्फुटन है.
हम भी एक सामान्य से शिक्षक हैं और इस आर्थिक अभाव के शिकार हैं. आप साथीगण तो अपना गुस्सा कभी सरकार पर तो कभी संघीय नेतृत्व पर उतार लेते हैं लेकिन हम नेतृत्व वर्ग के लोग अपनी पीड़ा किससे कहें. आपसब चाहे जो समझें, बकाये वेतन भुगतान के लिए हम हर संभव दरवाजे पर दस्तक दिये, किन्तु जब सरकार हीं झूठ बोलने लगे और फरेब करे तो हम भी विवश हो जाते हैं. लेकिन साथियों हम हार मानने वाले नहीं हैं.
वेतन के भुगतान संबंध में उन्होंने राज्य लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के नाम तैयार कर अपनी शिकायत रजिस्टर करा दिया है. राज्य लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने लंबित वेतन भुगतान के मामले मे 2 नवम्बर को सुनवाई की तिथि निर्धारित कर दी है.

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