रेलवे में नौकरी की मांग को लेकर मुंबई के छात्रों का प्रदर्शन, रेल सेवा ठप्प

एक बार फिर से छात्रों ने नौकरी की मांग को लेकर स्टेशन को निशाना बनाया है. इस बार कहीं और नहीं बल्कि देश की  सबसे व्यस्तम कही जाने वाली मुंबई शहर है. मुंबई के छात्रों ने नौकरी की मांग करते हुए हजारों को संख्या में रेल की पटरियों पर बैठ गए हैं. जिसके वजह से आने जाने वाले ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह से ठप हो गई है. मुंबई के लोकल सेवा पर इसकी काफी फर्क देखने को मिल रहा है. रोजाना ऑफिस जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

नौकरी की मांग को लेकर मुंबई के छात्रों का प्रदर्शन

रेलवे में वर्षों से काम कर रहे ये अप्रेंटिस स्टूडेंट हैं लेकिन इन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही है. हिंदुस्तान में खबर के अनुसार, छात्रों को कंट्रोल में लाने के मुंबई पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो छात्रों ने इसके जवाब में ट्रेनों पर पर पत्थर फेंके हैं. यह बात सही है कि काम नहीं मिलने से गुस्सा है. उनका गुस्सा जायज है. मगर इस तरह हिंसक होने से काम नहीं चलेगा. ऐसे में तो सरकार को आपके आंदोलन को खत्म करने में आसानी होगी.
सरकार के खिलाफ नौकरी मांगने के लिए छात्रों का यह कोई पहला आंदोलन नहीं है. यह बात और है कि बिना किसी संगठन नेतृत्वकर्ता  होने के कारण इसको हिंसक रूप दे दिया जाता है. जब कोई भी आंदोलन हिंसक होता है तो सरकार को उस आंदोलन को दमन करने में आसानी हो जाती है. फिर छात्रों या आंदोलनकारी पर एफआईआर गिरफ्तारी शुरू हो जाता है.

इसके बाद मुद्दा एक तरह से कहिए तो दबा दिया जाता है. इससे पहल भी कुछ इसी तरह का प्रदर्शन बिहार एक नालंदा जिले के बिहार शरीफ रेलवे स्टेशन पर हुआ था. जो कि बाद में उग्र रूप लिया जिसके बाद तोड़फोड़, अगजनी आदि के बाद असल मुद्दा दब ही गया. अगर आंदोलन के माध्यम से मांग पूरी करवानी है तो अहिंसा का रास्ता चुनना होगा.

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