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    Equal Pay For Equal Work Kya hai? कैसे करें मांग, सर्कुलर डाउनलोड करें

    Equal Pay For Equal Work Kya hai? कैसे करें मांग, सर्कुलर डाउनलोड करें

    आज पूरे देश की समस्यों में सबसे अहम समस्या बेरोजगारी है. सरकार के द्वारा इस मुददे को दूर करना तो दूर इस पर बात करने से भी कतराते है. आज हर सेक्टर में सरकार ठेका प्रथा को बढावा दे रही है. आज से 47 साल पहले ठेका मजदूर (संचालन एवं उन्मूलन) कानून 1970, देश की संसद ने बनाया था. कानून बनाते समय सरकार ने यह माना था कि ठेका मजदूरों को रोजगार के लिए रखे जाने के चलते कई समस्याएं सामने आ रही हैं. इसके पूर्ण रूप में खात्मे के लिए ही संसद में काफी सोच विचार के बाद उपरोक्त कानून बनाया गया था. दूसरी पंच वर्षीय योजना में योजना आयोग ने त्रिपक्षीय कमेटियों (सरकार-मालिक-मजदूर) की सिफारिश व आम राय से यह माना था कि-

    1. जहां कहीं भी सम्भव है ठेका मजदूरों द्वारा किए जा रहे काम को ही समाप्त कर दिया जाए.
    2. जहां कहीं यह सम्भव न हो वहां ठेका मजदूर के काम को संचालित कर उन्हें वेतन अदायगी व अन्य जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं.

    इन दोनों कामों को लागू करवाने की जिम्मेदारी केन्द्र व राज्य सरकारों के तहत चल रहे श्रम विभाग की थी. परन्तु सरकार एवं उनके आधीन चलने वाले श्रम विभाग ने इस कार्य को ईमानदारी से अंजाम नहीं दिया है.

    इस कानून के बनने के 47 वर्षो के अनुभव के आधार पर साफ कहा जा सकता है कि सरकार ने ठेका मजदूरी के संचालन व उन्मूलन के कोई गम्भीर प्रयास नहीं किए. उल्टा कॉर्पोरेट्स के हक में नग्न रूप से इस प्रथा को बढ़ावा दिया है. 1990 के बाद से नवउदारवादी नीतियों के तहत इसमें और तेजी आई है. 

    शर्म की बात तो यह है कि निजी कारखानों/ संस्थानों के इस खेल में सरकारें भी शामिल हो गई हैं. सरकारी क्षेत्र में होने वाले कार्य भी 70 से 80 प्रतिशत तक ठेका मजदूरों द्वारा किया जा रहा हैं. यहां तक कि सार्वजनिक इकाईयों, सरकारी अस्पतालों, स्कूलों, कालेजों, डीटीसी, दिल्ली जल बोर्ड, बिजली विभाग, एमसीडी इत्यादि तक में डाक्टरों, शिक्षकों, ड्राईवरों, कन्डक्टरों व कर्मचारियों की स्थाई पदों पर भर्ती न करके साल दर साल ठेके पर भर्ती की जा रही है.
     

    इंडियन स्टफिंग फैडरेशन के रिर्पोट के अनुसार आज पूरे देश में लगभग 1 करोड 25 लाख लोग सरकारी विभाग में कार्यरत है, जिसमें 69 लाख लोग केवल ठेके पर काम कर रहे हैं. सरकार मानती है कि ठेका वर्कर को समान काम करने के वावजूद समान वतन का भुगतान नही किया जा रहा है. यही असमानता विद्रोह की ओर वर्कर को  प्रेरित  करता है, जिसका गंभीर परिणाम आये दिन देखने को मिलते है. मारुति कार मेकर कम्पनी, गुडगॉवा में एच.आर. एक्जकयुटिव की मौत इसी का परिणाम है. उसके बाद संसद में हंगामे के बाद तत्काल सरकार ने कड़ा फैसला लिया. जिसके बाद चीफ लेबर कमीश्नर (सेन्ट्रल) ने सर्कुलर  नं. office Memorandum दिनांक- 23.1.2013, fileNo.14(113) Misc RLC (Cood)/2012 सरकार के सभी मिनिस्ट्री को जारी किया. जिसके तहत -

    Equal Pay For Equal Work (समान काम का समान वेतन) Kya hai? 

    "The workmen employed by the contractor perform the same or similar kind of work as workmen directly employed by the principal employer of the establishment, the wage rate, holidays, hours of work and other conditions of the services of the workmen of the contractor shall be the same as applicable to the workmen directly employed the principle employed of the establishment on the same or similar kind of work”.

    ("अगर कोई ठेकेदार के द्वारा न्युक्त ठेका वर्कर अपने प्रधान नियोक्ता द्वारा न्युक्त वर्कर के बराबर कार्य करता है, तो ठेकेदार के द्वारा काम करने वाले ठेका वर्कर का वेतन, छुटटी और सेवा शर्ते उस संस्था के प्रधान नियोक्ता के वर्कर के बराबर होगा".) 

     Equal Pay For Equal Work Kya hai? कैसे करें मांग, सर्कुलर डाउनलोड करें (Video)




    उक्त बातें आपको Contract Labour (Regulation and Abolition) Act, 1970 and Central Rules framed thereunder के Section 25-(2)(v)(a) में भी है. इस सर्कुलर में ठेका मजदूर (संचालन एवं उन्मूलन) कानून 1970, और उसके केन्द्रिय नियम के तहत उल्लंघन करने वाले पर कानूनी कार्रवाई करने की बात विशेषता से कही गयी है.

    यह सर्कुलर खुद भारत सरकार का जारी किया हुआ सर्कुलर है. इसके तहत आप समान काम का समान वेतन का मांग कर सकते हैं. उम्मीद करूंगा कि आपको सर्कुलर मिल गया होगा. अगर नहीं मिला तो यहां क्लिक करें. इसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला 26 अक्टूबर 2016 है. इसका कॉपी भी आप यहां क्लीक कर डाउनलोड करें सकते हैं. इसको पढ़ें और अपने साथियों के साथ शेयर करें.

    यह भी देखें-

    10 comments:

    1. सुरजीत जी अगर कोई ठेकेदार के द्वारा न लग कर यदि सीधा सरकारी संस्थान द्वारा संविदा कर्मचारी रखा गया हो तो क्या वो भी समान वेतन पाने का हकदार है इस पर भी कुछ लिखे।

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    2. जी जरूर हरीश जी, फीडबैक के लिए धन्यबाद साहब.

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    3. Sir, I want Superme Court order for Equal pay for Equal work order number or case details please send me PDF file my mail id Veeresh.c99@gmail.com

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    4. सुप्रीम कोर्ट का 26 अक्टूबर 2016 का समान काम का समान वेतन का आर्डर का कॉपी डाउनलोड करें- https://www.workervoice.in/p/judgments.html

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    5. हम बिहार के एक सरकारी कंपनी से सीधे नियोजित कर्मी हैं।
      हमारे कॉर्पोरेशन में जिन्हें समान वेतन मिल रहा है उन्हें सिर्फ बेसिक ग्रेड पे और DA मिलता है, परंतु उन्हें मकान किराया भत्ता, मेडिकल आदि नही दिया जा रहा है।
      क्या ये अनुमान्य भत्ते समान वेतन पा रहे कर्मियों को भी मिलने चाहिये,, अगर हाँ, तो यदि कोई संबंधित सर्कुलर हो तो कृपया बताएं।
      धन्यवाद।

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      1. अमरेंद्र अजय जी, नमस्कार दोस्त. बहुत ही बढ़िया सवाल. समान काम का समान वेतन का प्रावधान Contract Labour (Regulation and Abolition) Act, 1970 and Central Rules framed thereunder के Section 25-(2)(v)(a) में है. जिसके अनुसार काम यदि समान है तो सैलरी, सेवा शर्त, काम के घन्टे भी समान होंगे. आप इस धारा को qoute कर मांग कर सकते हैं. सैलरी समान का मतलब उसके एक एक component समान होंगे न.

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    6. Replies
      1. Thank you dost, Please hamare blog ko niche email id submit kar subscribe karen.

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    7. Sir ji hum contract base pr nahi daily wage par hai kya yeh act hum pr bhi lagu hoga or hoga to kya krna padega

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      1. Ji jarur. Supreme Court ke 26 Oct 2016 ke Equal Pay ke order ke anusar har tarah ke karmcahri ke liye lagu hoga agar wah equal kaam karta hai to....Aap eske liye apne employer se demand kijiye ...eske bare me jald hi step by step batayunga...hamare es blog ko subscribe kr lijiye.

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